भारतीय अर्थव्यवस्था में कंजम्पशन सेक्टर का बहुत बड़ा योगदान है, और खाने-पीने जैसी रोजमर्रा की चीजों के प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां यानी FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर इसी का अहम हिस्सा है।
आपने हाल ही में शेयर मार्केट की खबरों में FMCG और कंजम्पशन से जुड़े सेक्टर की चर्चा ज़रूर सुनी होगी। आखिर अचानक ये सुर्खियों में क्यों हैं? क्या यह निवेशकों के लिए किसी सुनहरे अवसर की ओर इशारा करता है? आइए, समझते है।
क्या है मामला?
स्टेटिस्टिक्स मिनिस्ट्री द्वारा किए गए सर्वे में पता चला हैं कि 2011-12 की तुलना में 2022-23 में ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति मासिक कंजम्पशन में इन्फ्लेशन को ध्यान में रखते हुए 40% से अधिक की वृद्धि हुई है। साथ ही, कई विशेषज्ञों का मानना है कि नई गठबंधन सरकार FMCG कंपनियों के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।
इस बार कंजम्पशन और FMCG सेक्टर फोकस में रहने की एक और वजह यह भी है कि इस बार IMD के अनुमान के अनुसार, मानसून (जून से सितंबर 2024) सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है यानि ज्यादा बारिश होने की संभावना है जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा और इसका असर FMCG सेक्टर को भी होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रौनक लौटने की उम्मीद
कोविड-19 के बाद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पहले से ही दबाव है। आय में कमी, महंगाई, बेरोजगारी और कृषि गतिविधियों में गिरावट के कारण 2020 से गैर-शहरी क्षेत्रों से डिमांड में सुधार देखने को नहीं मिला है। हालांकि, मानसून में सुधार और सरकार की नीतियों में बदलाव की उम्मीद के चलते FY25 में यह ट्रेंड बदलने की उम्मीद है।
अनुमान के अनुसार इस साल मानसून सामान्य से अधिक रहेगा, साथ ही, खेती उत्पादन बढ़ने, जलाशयों के जलस्तर में सुधार होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी मदद मिल सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, महंगाई कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फिर से रौनक लौट आएगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार के समर्थन से FMCG और कंजम्पशन सेक्टर आने वाले समय में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके साथ ही पिछले एक साल में FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर ने मार्केट बेंचमार्क इंडेक्स जैसे कि निफ़्टी और सेंसेक्स की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। इसकी वजह ग्रामीण इलाकों में कम डिमांड रही है। मौसम की खराब स्थिति और कम आमदनी ने कृषि उत्पादन को प्रभावित किया। साथ ही, महंगाई बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुस्त रही है।
हालांकि, इन क्षेत्रों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं। बेहतर मानसून और कंपनियों द्वारा बिक्री बढ़ाने के प्रयासों से ग्रामीण डिमांड में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, नई सरकार ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने वाली नीतियां ला सकती है। इससे ग्रामीण डिमांड में बढ़ोत्तरी होगी, जो FMCG और कंजम्पशन सेक्टर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
भविष्य की बातें
पहले सरकार ने ज्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया था, लेकिन इस बार उम्मीद की जा रही है कि कंजम्पशन बढ़ाने पर जो दिया जाएगा। जिसका सीधा फायदा FMCG कंपनियों को होगा।
मिंट के अनुसार, NDA सरकार के तीसरे कार्यकाल में FMCG और कंजम्पशन क्षेत्र निवेशकों की नज़रों में आ सकते हैं। इसके साथ ही, नई सरकार बनने के बाद से FMCG कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी देखी गई है। इसका कारण माना जा रहा है कि नई सरकार ग्रामीण विकास और कंजम्पशन को बढ़ावा देने वाली नीतियां लागू कर सकती है, जिसकी पूरी हमें जुलाई में आने वाले वजट में देखने को मिल सकती है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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