भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गुरुवार, 29 मई 2025 में इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में निवेशकों के हितों की रक्षा और मार्केट की स्थिरता बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण नियमों की घोषणा की है। ये नए प्रावधान F&O सेगमेंट में पारदर्शिता बढ़ाने, रिस्क मैनजमेंट को मजबूत करने और छोटे निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
आइए इस आर्टिकल में हम इन नियमों को विस्तार से समझें और जानें निवेशकों के लिए यह क्या मायने रखते है।
नए नियमों की आवश्यकता क्यों?
SEBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, और इक्विटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान लगभग 93% रिटेल ट्रेडर्स को औसतन 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का नुकसान हुआ है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए SEBI ने नए नियम लागू किए हैं इनका उद्देश्य F&O को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि निवेशकों को जागरूक और सुरक्षित रखना है।
SEBI के नए नियमों के प्रमुख बिंदु
1. मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) में बदलाव
SEBI ने मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब किसी भी स्टॉक के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स में कुल ओपन इंटरेस्ट की सीमा (MWPL) उस स्टॉक के फ्री फ्लोट का 15% या पिछले तीन महीनों का 65 गुना औसत डेली डिलीवरी वैल्यू (ADDV) में से जो भी कम होगा, उसके आधार पर होगी। इसकी न्यूनतम सीमा फ्री फ्लोट का 10% निर्धारित की गई है। यह नियम 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा और इसका उद्देश्य डेरिवेटिव्स जोखिम को अंडरलाइंग कैश मार्केट लिक्विडिटी के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना है।
2. बैन पीरियड के दौरान पोजीशन मैनेजमेंट
जब किसी स्टॉक का FutEq OI (फ्यूचर्स इक्विवेलेंट ओपन इंटरेस्ट) MWPL के 95% से अधिक हो जाता है, तो उस पर बैन लग जाता है। नए नियमों के अनुसार, बैन पीरियड के दौरान निवेशक केवल अपनी मौजूदा पोजीशन को कम कर सकते हैं, नई पोजीशन नहीं बना सकते। साथ ही, डेल्टा पोजीशन में बदलाव (जैसे लॉन्ग से शॉर्ट में जाना) की अनुमति नहीं होगी। यह नियम 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा और इसका उद्देश्य बैन पीरियड के दौरान होने वाली अस्थिरता को कम करना है।
3. इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर नई पोजीशन सीमाएं
SEBI ने इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए नई पोजीशन सीमाएं निर्धारित की हैं। इंडेक्स ऑप्शन के लिए नेट FutEq OI की सीमा ₹1,500 करोड़ और ग्रॉस FutEq OI की सीमा ₹10,000 करोड़ (लॉन्ग और शॉर्ट दोनों तरफ) तय की गई है। इंडेक्स फ्यूचर्स के लिए FPI कैटेगरी I, म्यूचुअल फंड्स और क्लाइंट्स की पोजीशन सीमा 15% ओपन इंटरेस्ट या ₹500 करोड़ (जो भी अधिक हो) होगी, जबकि FPI कैटेगरी II (इंडिविजुअल्स/फैमिली ऑफिस) के लिए यह सीमा 5% ओपन इंटरेस्ट या ₹500 करोड़ होगी। ये नियम 1 जुलाई 2025 से लागू होंगे।
4. इंट्राडे MWPL मॉनिटरिंग
नए नियमों के तहत, स्टॉक एक्सचेंज अब दिन में कम से कम 4 बार MWPL के उपयोग की जांच करेंगे। यदि OI सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त मार्जिन या सर्विलांस एक्शन लिया जाएगा। इसका उद्देश्य मार्केट की इंटीग्रिटी को बनाए रखना और सेटलमेंट जोखिमों को कम करना है। यह नियम 3 नवंबर 2025 से लागू होगा।
5. नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए नए मानदंड
SEBI ने डेरिवेटिव्स में शामिल होने वाले नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए नए मानदंड निर्धारित किए हैं। इनमें कम से कम 14 कांस्टीट्यूएंट्स होने चाहिए, टॉप कंस्टीट्येंट का वेटेज 20% से अधिक नहीं होना चाहिए और टॉप 3 कंस्टीट्येंट्स का कुल वेटेज 45% से अधिक नहीं होना चाहिए। ये नियम 3 नवंबर 2025 से लागू होंगे और इनका उद्देश्य मार्केट में हेरफेर की संभावना को कम करना है।
6. F&O में प्री-ओपन सेशन की शुरुआत
SEBI ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) मार्केट में कैश मार्केट की तरह प्री-ओपन सेशन शुरू करने की घोषणा की है। SEBI के सर्कुलर के अनुसार, यह सेशन वर्तमान माह के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स, सिंगल स्टॉक्स और इंडेक्स दोनों पर लागू होगा, जो कैश मार्केट के प्री-ओपन और पोस्ट-क्लोजिंग सेशन की तर्ज पर होगा। समाप्ति से पहले के अंतिम पांच ट्रेडिंग दिनों में, ये सेशन अगले माह के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स तक विस्तारित होंगे, क्योंकि रोलओवर के कारण लिक्विडिटी एक एक्सपायरी से दूसरी में स्थानांतरित होती है। यह नियम 6 दिसंबर 2025 से प्रभावी होगा।
7. बैन पीरियड में सिंगल स्टॉक्स में पोजीशन क्रिएशन
SEBI ने बैन पीरियड के दौरान सिंगल स्टॉक्स में ट्रेडिंग की अनुमति दी है, बशर्ते यह पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करे। SEBI के सर्कुलर के अनुसार, किसी स्क्रिप के बैन पीरियड में प्रवेश करने के बाद, ट्रेडिंग से दिन के अंत में फ्यूचर इक्विवेलेंट ओपन इंटरेस्ट (FutEq OI) में कमी आनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि दिन 1 के अंत में डेल्टा पोजीशन +10 या -10 है, तो इसे दिन 2 के अंत तक 0 तक कम करना होगा। SEBI ने स्पष्ट किया कि डेल्टा वैल्यू के संकेत में बदलाव को पोजीशन में कमी के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही, स्क्रिप की वैल्यू में उतार-चढ़ाव के कारण FutEq OI में निष्क्रिय वृद्धि को उल्लंघन नहीं माना जाएगा। यह नियम 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा।
नए नियमों का निवेशकों पर प्रभाव
इन नए नियमों का निवेशकों पर कई तरह से प्रभाव पड़ेगा। छोटे निवेशकों को MWPL और पोजीशन लिमिट्स के कारण अत्यधिक सट्टेबाजी से सुरक्षा मिलेगी। इंट्राडे मॉनिटरिंग और FutEq OI की गणना से मार्केट में पारदर्शिता बढ़ेगी और मार्केट मैनिपुलेशन की संभावना कम होगी। वहीं, इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को इंडेक्स फ्यूचर्स में उच्च एक्सपोजर लिमिट के कारण अधिक फ्लेक्सिबिलिटी मिलेगी।
निष्कर्ष
SEBI के ये नए नियम F&O मार्केट को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। निवेशकों को इन बदलावों को समझकर ही डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग करनी चाहिए, ताकि जोखिमों से बचा जा सके। ये नियम न केवल निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे बल्कि मार्केट की लॉन्गटर्म विकास यात्रा में भी मदद करेंगे।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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