भारत के मिड-साइज़ स्टार्टअप्स IPO क्यों चुन रहे हैं?

भारत के मिड-साइज़ स्टार्टअप्स IPO क्यों चुन रहे हैं?
Share

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले कुछ समय से एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। एक समय था जब हर स्टार्टअप का अंतिम लक्ष्य ‘यूनिकॉर्न’ (एक बिलियन डॉलर का वैल्यूएशन) बनना होता था, लेकिन अब यह प्राथमिकता बदल रही है। आजकल मिड-साइज के स्टार्टअप्स, प्राइवेट मार्केट्स में हाई वैल्यूएशन या ‘यूनिकॉर्न’ टैग के पीछे भागने के बजाय शेयर मार्केट में लिस्ट होने यानी IPO को तरजीह दे रहे हैं।

यह बदलाव केवल एक नया ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह बदलती आर्थिक परिस्थितियों का परिणाम है। 2026 की तरफ बढ़ते हुए, यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय उद्यमी अब अनिश्चित प्राइवेट फंडिंग के इंतजार में रहने के बजाय पब्लिक मार्केट की पारदर्शिता और स्थिरता को अपना रहे हैं।

आइए संरचनात्मक बदलाव के कारणों और इसके दूरगामी परिणामों को समझते है।

क्या है मामला?

भारतीय शेयर मार्केट में नई-एज और मिड-साइज़ कंपनियों का रुख अब तेजी से बदल रहा है। 2021 के पोस्ट-पैंडेमिक दौर में जहां स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न वैल्यूएशन की तलाश में लंबे समय तक प्राइवेट बने रहना पसंद कर रहे थे, वहीं अब कई कंपनियां पहले ही पब्लिक मार्केट में आने पर विचार कर रही हैं।

पिछले साल, एक्सचेंज पर लिस्ट हुई नई-एज कंपनियों ने IPO के जरिए करीब ₹36,000 करोड़ की पब्लिक कैपिटल जुटाई। इसने फाउंडर्स, शुरुआती निवेशकों और कर्मचारियों को सार्थक लिक्विडिटी प्रदान की। एथर एनर्जी, अर्बन कंपनी, लेंसकार्ट, मीशो, ग्रो, फिजिक्सवाला और पाइन लैब्स जैसी कंपनियों की लिस्टिंग ने इसे भारत के टेक IPO के लिहाज से सबसे सक्रिय वर्षों में शामिल कर दिया।

वेंचर कैपिटल का बदलता रुख और चयनात्मक पूंजी

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में वेंचर कैपिटल का नजरिया अब बदल चुका है। ‘ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट’ का दौर पीछे छूट रहा है और निवेशक अब उन्हीं कंपनियों को पूंजी दे रहे हैं, जिनके पास मजबूत बिजनेस मॉडल और प्रोफिटेबिलिटी का साफ रास्ता है। इसे चयनात्मक पूंजी का दौर कहा जा रहा है।

आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं। भारत में VC निवेश 2012 में करीब USD 2 बिलियन था, जो पोस्ट-कोविड दौर में USD 40 बिलियन तक पहुंचा। इसके बाद 2022 में यह आधा रह गया और 2023 में गिरकर करीब USD 10 बिलियन पर आ गया। प्राइवेट फंडिंग के सख्त होते माहौल में मिड-साइज़ स्टार्टअप्स के लिए IPO एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

निवेशकों के लिए, विशेष रूप से रिटेल निवेशकों के लिए, यह ट्रेंड एक दोधारी तलवार की तरह हो सकता है, लेकिन इसके सकारात्मक पक्ष अधिक हैं। जब कंपनियां यूनिकॉर्न बनने से पहले ही मार्केट में लिस्ट हो जाती हैं, तो आम निवेशकों को उनके ग्रोथ स्टोरी में शुरुआती चरण में शामिल होने का मौका मिलता है। पहले, जब कंपनियां प्राइवेट हाथों में होती थीं, तो उनकी वैल्यूएशन का बड़ा हिस्सा प्राइवेट निवेशकों (PE/VC) के पास चला जाता था और जब तक वे IPO लाती थीं, तब तक ग्रोथ की गुंजाइश कम हो चुकी होती थी।

मिड-साइज़ स्टार्टअप्स के IPO लाने से मार्केट में डायवर्सिफिकेशन आता है और निवेशकों के पास चुनने के लिए अधिक विकल्प होते हैं। साथ ही, चूंकि ये कंपनियां पब्लिक स्क्रूटनी के दायरे में आती हैं, इसलिए उनकी पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस का स्तर बेहतर होता है। हालांकि, निवेशकों को यह भी देखना होगा कि अधिकतम स्टार्टअप वर्षों से नुकसान झेल रहे है इसलिए उनके बिज़नेस मॉडल, फाइनेंशियल्स और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी हो जाता है।

भविष्य की बातें

2026 में न्यू-एज कंपनियों के IPO की पाइपलाइन पिछले साल जितनी ही व्यस्त नजर आ रही है। फोनपे, ज़ेप्टो, ओयो, बोट, इंफ्रा.मार्केट और शैडोफैक्स जैसी कंपनियां पब्लिक मार्केट से करीब ₹50,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही हैं, जिसमें फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल दोनों शामिल हैं। यह संकेत देता है कि टेक और डिजिटल-फर्स्ट कंपनियों के लिए IPO अब पूंजी जुटाने का एक प्रमुख रास्ता बन चुका है।

हालांकि, निवेशक और इनवेस्टमेंट बैंकर्स का मानना है कि इस रफ्तार को बनाए रखना आसान नहीं होगा। आगे का रास्ता व्यापक मार्केट स्थितियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करेगा, खासकर उन टेक कंपनियों के लिए जो अभी घाटे में हैं या हाल ही में मुनाफे में आई हैं। पब्लिक निवेशक अब वैल्यूएशन, कैश फ्लो और लिस्टिंग के बाद के प्रदर्शन को लेकर ज्यादा चयनात्मक हो गए हैं, जिससे 2026 के IPO मार्केट में गुणवत्ता और अनुशासन की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Options Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets. Subscription Fee ₹399/month* for 6 Months
Call TypeTrade Type

Teji Mandi Xpress Options

₹399/month* for 6 Months

Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets.

Strategy Type

Options Trading

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top