जेन Z डेब्ट ट्रैप: 41% नए उधारकर्ता और साइलेंट डेब्ट

जेन Z डेब्ट ट्रैप: 41% नए उधारकर्ता और साइलेंट डेब्ट
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भारतीय क्रेडिट मार्केट में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है, जिसमें युवा पीढ़ी की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ट्रांसयूनियन CIBIL की रिपोर्ट के अनुसार, 41% फर्स्ट-टाइम उधारकर्ता अब जेन जेड (Gen Z) से हैं। यह आंकड़ा युवाओं में क्रेडिट एक्सेस की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है, साथ ही साइलेंट डेब्ट यानी छिपे हुए कर्ज के संभावित जोखिम की ओर भी संकेत करता है।

18 से 30 वर्ष की आयु वाले इन युवाओं के लिए क्रेडिट अब एक सामान्य हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या यह वित्तीय प्रगति है या अनदेखे ऋण का बढ़ता बोझ? आइए इस आर्टिकल में इस प्रवृत्ति का विश्लेषण करें।

जेन जेड का क्रेडिट मार्केट में उदय

जेन जेड (Gen Z) या जेनरेशन जेड का मतलब है वह पीढ़ी जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है, वह अब भारत के क्रेडिट इकोसिस्टम का प्रमुख हिस्सा बन चुके है। रिपोर्ट के अनुसार, 41% नए उधारकर्ता जेन जेड से संबंधित हैं, जिनकी आयु 18 से 30 वर्ष के बीच है। यह युवा वर्ग फास्टर कंजम्प्शन ग्रोथ को बढ़ावा दे रहा है, जिससे मर्चेंट्स को अधिक रेवेन्यू मिल रहा है और ई-कॉमर्स क्षेत्र को बूस्ट प्राप्त हो रहा है। जेन जेड गैजेट्स और ट्रैवल जैसे खर्चों के लिए क्रेडिट का उपयोग कर रहे है।

ट्रांसयूनियन CIBIL रिपोर्ट में उल्लेख है कि क्रेडिट-एलिजिबल आबादी लगभग 1,036 मिलियन है। जैसे-जैसे ये युवा वर्कफोर्स में शामिल हो रहे हैं, क्रेडिट मार्केट में उनकी भागीदारी और बढ़ने की संभावना है। FY22-23 में पहला ऋण लेने वाले एक तिहाई उपभोक्ताओं ने एक वर्ष के अंदर दूसरा क्रेडिट प्रोडक्ट लिया, जिसमें 44% ने उसी लेंडर को प्राथमिकता दी। यह ट्रेंड क्रेडिट सिस्टम में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

साइलेंट डेब्ट: छिपे कर्ज का बढ़ता खतरा

इंडिया टुडे के अनुसार, स्क्रिपबॉक्स (Scripbox) के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन ने इस स्थिति को ‘डबल बोनांजा’ बताया है। युवाओं को क्रेडिट कार्ड्स, पर्सनल लोन्स और ऐप आधारित EMI की आसान उपलब्धता के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से ग्लोबल लाइफस्टाइल की एक्सपोजर मिल रही है। फोन, गैजेट्स, ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रैवल जैसे दैनिक खर्च अब क्रेडिट से फंड किए जा रहे हैं।

साइलेंट डेब्ट के प्रमुख स्रोत क्रेडिट कार्ड्स, BNPL (Buy Now, Pay Later) यानी पे लेटर प्रोडक्ट्स, डिजिटल माइक्रो-लोन्स और लाइफस्टाइल EMI हैं। भारत में 11 करोड़ से अधिक एक्टिव क्रेडिट कार्ड्स हैं। H1 FY25 के दौरान BNPL सेगमेंट में लगभग 97,000 करोड़ रुपये का डिजिटल क्रेडिट डिस्बर्स किया गया। BNPL और माइक्रो-लोन्स अब क्रेडिट ब्यूरो में रिपोर्ट किए जा रहे हैं, जिससे ये फॉर्मल क्रेडिट हिस्ट्री का हिस्सा बन रहे हैं और भविष्य के बड़े लोन्स पर प्रभाव डाल रहे हैं।

आंकड़े चिंताजनक हैं। आउटस्टैंडिंग क्रेडिट कार्ड डेब्ट 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। 91 से 360 दिनों तक ओवरड्यू डेलिंक्वेंसीज (delinquencies) में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 44% की वृद्धि हुई है। युवा कमाई करने वाले अक्सर अपने कर्ज के बोझ को कम आंकते हैं क्योंकि ये दायित्व कई प्लेटफॉर्म्स पर बिखरे होते हैं और इन्हें सुविधाजनक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी

ट्रांसयूनियन CIBIL (TransUnion CIBIL) रिपोर्ट फाइनेंशियल इंक्लूजन के सकारात्मक पहलू को भी उजागर करती है। फर्स्ट-टाइम लोन ओरिजिनेशन्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 37% है, जो मौजूदा उधारकर्ताओं में 27% से काफी अधिक है। इससे पता चलता है कि अधिक महिलाएं फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में प्रवेश कर रही हैं।

इसी प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों से 32% फर्स्ट-टाइम उधारकर्ता आ रहे हैं। लेंडर्स सक्रिय रूप से नए उधारकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लेंडर्स फर्स्ट-टाइम उधारकर्ताओं को मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

जोखिम संकेत और प्रबंधन की आवश्यकता

साइलेंट डेब्ट लंबे समय के लक्ष्यों जैसे फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस या बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। समस्या उधार लेने में नहीं, बल्कि अन्य दायित्वों के साथ रीपेमेंट मैनेज करने में है।

जोखिम के शुरुआती संकेतों में शामिल हैं: क्रेडिट कार्ड पर केवल मिनिमम देय राशि का भुगतान, कई रीपेमेंट डेट्स का जुगलबंदी, 30% से अधिक क्रेडिट यूटिलाइजेशन, पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए लोन्स लेना, फ्रीक्वेंट ओवरड्राफ्ट्स, बचत में कमी या कंजम्प्शन क्रेडिट का एसेंशियल्स पर उपयोग। डेब्ट-टू-इनकम रेशियो 30-35% से अधिक होने पर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी प्रभावित होती है। मिस्ड या लेट पेमेंट्स से क्रेडिट स्कोर गिरता है, जो भविष्य में उधार की लागत बढ़ाता है।

मैनेजमेंट के लिए सुझाव हैं: सभी दायित्वों को कंसोलिडेट करना, हाई-इंटरेस्ट डेब्ट को पहले चुकाना, रियलिस्टिक बजटिंग के साथ नई क्रेडिट सीमित करना, इमरजेंसी फंड बनाना और नियमित रूप से क्रेडिट रिपोर्ट्स की समीक्षा करना। अगर कंजम्प्शन-ओरिएंटेड लेंडिंग अनचेक रही तो यह समग्र फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को प्रभावित कर सकती है।

निष्कर्ष

इंडिया टुडे के अनुसार, सचिन जैन जेन जेड की रेजिलिएंस, सीखने की क्षमता और प्रयोगशीलता पर आशावादी हैं। उनका मानना है कि करियर बढ़ने और इनकम स्थिर होने के साथ उधार का तरीका और सोच-समझकर संतुलित होगा। साइलेंट डेब्ट आज कई जेन जेड उधारकर्ताओं की वास्तविकता है, लेकिन जागरूकता, सावधानीपूर्ण प्लानिंग और अनुशासित रीपेमेंट से आज की सुविधाएं कल के फाइनेंशियल स्ट्रेन में नहीं बदलेंगी।

ट्रांसयूनियन CIBIL रिपोर्ट और एनालिस्ट दोनों ही जिम्मेदार उधार और फाइनेंशियल लिटरेसी पर जोर देते हैं। 41% का यह आंकड़ा एक चेतावनी और अवसर दोनों है। यदि युवा पीढ़ी आज साइलेंट डेब्ट को समझकर मैनेज करेगी, तो भविष्य का भारत अधिक मजबूत फाइनेंशियल इकोसिस्टम वाला होगा।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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