क्या हैं सेल्फ-हीलिंग रोड्स? भारत में इनका भविष्य?

भारत में सड़कें बन रहीं हैं हाईटेक! जानिए सेल्फ-रिपेयरिंग रोड्स तकनीक के बारे में जो गड्डों की समस्या को दूर कर सकती है।
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भारतीय सड़कें, खासकर राष्ट्रीय राजमार्ग, अक्सर गड्डों की समस्या से जूझते रहे हैं। ये गड्ढे न सिर्फ गाड़ियों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि दुर्घटनाओं का भी कारण बनते हैं।

लेकिन अब एक अच्छी खबर है! भारत सरकार गड्डों की इस समस्या का समाधान खोजने की राह पर है। आने वाले समय में आप ऐसी सड़कें देख सकते हैं, जो खुद ही अपने गड्डों को भर लेंगी!

आइए देखें, यह कैसे काम करेगा।

क्या है मामला?

सड़कों में पाए जाने वाले गड्डे भारत के लिए सिरदर्द बन गए है क्योंकि इनकी वजह से न सिर्फ रोजमर्रा की यात्रा में भी देरी होती है बल्कि हर साल हजारों लोग अपनी जान भी गवांते है। आंकड़ों पर गौर करें, तो सिर्फ 2022 में ही इन गड्डों की वजह से लगभग 4,446 दुर्घटनाएं हुईं।

यह ग्राफ 2018 से 2022 के बीच कुल रोड एक्सीडेंट के आकड़ों को दर्शाता है

यह ग्राफ 2018 से 2022 के बीच कुल रोड एक्सीडेंट के आकड़ों को दर्शाता है।

दुनियाँ के दूसरे सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले देश के लिए ये कोई अच्छी बात नहीं है और इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘सेल्फ-हीलिंग रोड्स’ तकनीक को अपनाने पर विचार किया है। हालांकि करीब दस साल पहले नीदरलैंड्स के वैज्ञानिक एरिक श्लांगेन ने सेल्फ-हीलिंग रोड्स बनाएं थे।

क्या है सेल्फ-हीलिंग रोड्स तकनीक?

यह एक ऐसी सड़क निर्माण तकनीक है, जहां सड़क खुद ही अपने छोटे-मोटे गड्डों को भरने में सक्षम होती है। इसमें डामर में स्टील फाइबर और विशेष बिटुमेन (सड़क को चिपकाने वाला पदार्थ) का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। जब भी सड़क पर कोई दरार या छोटा गड्डा पड़ता है, तो यह विशेष बिटुमेन गर्म होकर उस जगह को भर देता है।

सड़कों के रखरखाव पर सरकार हर साल काफी खर्च करती है। लेकिन भविष्य में ये लागत काफी कम हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि भले ही सेल्फ-हीलिंग रोड्स को बनाना थोड़ा महंगा हो सकता है, परंतु लंबे समय में रख-रखाव का खर्च ना होने से ये सड़कें कुल मिलाकर सस्ती साबित होंगी। यही नहीं, ये तकनीक सड़कों को 80 साल तक टिकाऊ बना सकती है।

NHAI की संभावित योजना

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस तकनीक को अपनाने की योजना बना रहा है। अभी परीक्षण के तौर पर कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर टेस्ट सफल होते हैं, तो भविष्य में देश भर में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न सिर्फ सड़कों की मरम्मत पर लगने वाला समय और पैसा बचेगा, बल्कि सफर भी सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।

भारतीय सड़क रखरखाव के लिए हर साल काफी पैसा खर्च किया जाता है। FY25 के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क रखरखाव पर 2,600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जबकि यह राशि FY23 में 2,573.66 करोड़ रुपये थी।

विदेशों में भी हो रहा है इस तकनीक का उपयोग

सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गड्डे सड़कों की एक बड़ी समस्या है। लेकिन अच्छी खबर ये है कि विदेशों में इस समस्या का समाधान खोज लिया गया है। नीदरलैंड्स में पिछले 12 सालों से 12 अलग-अलग सड़कों पर ‘सेल्फ-हीलिंग रोड्स’ का परीक्षण किया जा रहा है।

यहां तक कि इनमें से एक सड़क तो साल 2010 से ही आम लोगों के इस्तेमाल के लिए खुली हुई है और यह सफलतापूर्वक चल रही है। इतना ही नहीं, यूनाइटेड किंगडम भी इसी तकनीक को अपनाने पर विचार कर रहा है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

अभी हाल ही मार्च 2024 में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न राज्यों में 112 नेशनल हाइवेज प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया है। अगर इसकी लागत की बात करें तो लगभग 12.04 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1 लाख करोड़ रुपये) होगी। इसके साथ ही सेल्फ-हीलिंग रोड्स जैसी तकनीकों को अपनाकर यह सेक्टर और भी तेजी से विकास की ओर बढ़ने की उम्मीद है।

अगर हम भारतीय स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों की बात करें, जो इस सेक्टर में काम करती है तो उनमें IRB इन्फ्रास्ट्रक्चर, G R इंफ्राप्रोजेक्ट्स, PNC इंफ्राटेक, दिलीप बिल्डकॉन, अशोका बिल्डकॉन और भारत रोड नेटवर्क लिमिटेड शामिल है।

भविष्य के हाईवे

अगर स्व-मरम्मत करने वाली सड़कें सफल रहीं, तो यह भारतीय सड़कों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव होगा। इससे न सिर्फ गड्डों की समस्या दूर होगी, बल्कि सड़कों का रख-रखाव भी आसान हो जाएगा। भविष्य में यह तकनीक और भी विकसित हो सकती है, जिससे यह सेक्टर निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।

IBEF के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क वाला देश है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 67 लाख किलोमीटर है। इसके साथ ही भारत सरकार ने FY25 के लिए नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के तहत 111 लाख करोड़ रुपये (1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) का आवंटन किया गया है। FY25 में रोड सेक्टर में 18% कैपिटल एक्सपेंडिचर होने की उम्मीद है।

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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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