इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑइल की प्राइस में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। एक तरफ डिमांड में कमी और दूसरी तरफ अमेरिका में उत्पादन बढ़ने से मार्केट अस्थिर है। इसी बीच, OPEC+ देशों ने तेल उत्पादन में कटौती बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला मार्केट में क्रूड ऑइल की प्राइस को स्थिर रखने के लिए लिया गया है।
आइए जानते हैं कि इस फैसले का क्रूड ऑइल की प्राइस पर क्या असर पड़ेगा और इसका निवेशकों के लिए क्या मतलब है।
क्या है मामला?
OPEC+ ने 03 जून 2024 को एक समझौते की घोषणा की, जिसके तहत वे अपनी सप्लाई में कटौती को तीसरी तिमाही तक जारी रखेंगे और फिर अगले 12 महीनों में धीरे-धीरे कम करते जाएंगे।
यह कदम क्रूड ऑइल मार्केट को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा है, और OPEC+ जानता है कि डिमांड हमेशा कम नहीं रहेगी। इसके साथ ही, दिसंबर तक मार्केट में प्रति दिन अतिरिक्त 5 लाख बैरल तेल आने की उम्मीद है और जून 2025 तक यह संख्या बढ़कर कुल 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो जाने का अनुमान है।
क्रूड ऑइल की कीमतों पर प्रभाव
OPEC+ का लक्ष्य सप्लाई को नियंत्रित करके मार्केट को स्थिर करना है सप्लाई कम करने से डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाता है, जिससे प्राइस को बढ़ावा मिलता है। इकोनॉमिक टाइम्स अनुसार, OPEC+ वर्तमान में 5.86 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) की कटौती कर रहा है, जो ग्लोबल डिमांड का लगभग 5.7% है।

ब्रेंट क्रूड ऑइल की फ्यूचर डेरीवेटिव की बात करें, तो 04 जून 2024 के ट्रेडिंग सेशन के दौरान 7.7% की गिरावट के साथ चार महीने के निचले स्तर $77.6 प्रति बैरल पर पहुंच गयी है। इसी तरह, 04 जून 2024 तक पिछले पांच ट्रेडिंग सीजन में WTI की प्राइस में भी 8% की गिरावट आई है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
OPEC+ के फैसले का ऑइल क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के स्टॉक्स पर असर पड़ सकता है। अगर क्रूड ऑइल की प्राइस में बढ़ोत्तरी होती है, तो इन कंपनियों को फायदा हो सकता है। वहीं, अगर प्राइस में गिरावट आती है, तो इन कंपनियों को नुकसान हो सकता है।
निवेशकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि क्रूड ऑइल की प्राइस कई फैक्टर्स से प्रभावित होती हैं, न सिर्फ OPEC+ के फैसलों से। जैसे ग्लोबल आर्थिक स्थिति, जिओपॉलिटिकल इवेंट्स और डॉलर की मजबूती/कमजोरी भी क्रूड ऑइल की प्राइस को प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए, निवेशकों को ऑइल सेक्टर में निवेश करने से पहले मार्केट के सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
भविष्य की बातें
OPEC+ का मानना है कि 2024 में डिमांड अधिक रहेगी, जिसके कारण वे उत्पादन में कटौती कर रहे हैं। दूसरी तरफ, अंतर्राष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि स्टॉक के स्तर को मिलाकर, 2024 में OPEC+ के तेल की डिमांड काफी कम, औसतन 41.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन होगी।
सरल शब्दों में कहें तो, OPEC+ ऑइल की डिमांड को ऊंचा रखकर प्राइस को बढ़ाना चाहता है, जबकि IEA का मानना है कि डिमांड कमजोर रहेगी। यह विरोधाभास मार्केट में अनिश्चितता पैदा करता है, और यह देखना होगा कि भविष्य में वास्तविक डिमांड कैसी रहती है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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