भारत ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट में $750M की दी मंजूरी!

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भारत वर्तमान में अपनी आर्थिक यात्रा के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ ग्रोथ अब केवल असेंबली या स्केल से नहीं, बल्कि गहरी वैल्यू एडिशन और डिजाइन क्षमता से आकार ले रही है। पिछले वर्षों में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत आधार दिया है, जिसमें मोबाइल फोन प्रोडक्शन का तेज विस्तार शामिल है।

आइए भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले हालिया कदम को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्या यह थीम निवेशकों के लिए एक बड़ा निवेश अवसर बन सकता है।

क्या है मामला?

भारत सरकार ने 30 मार्च 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 29 नए प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इन प्रस्तावों में कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जो लगभग 751 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है। इन अप्रूवल्स से 84,515 करोड़ रुपये का प्रोजेक्टेड प्रोडक्शन और 14,246 डायरेक्ट एम्प्लॉयमेंट जनरेट होने की उम्मीद है।

यह मंजूरी 46 पहले अप्रूव्ड एप्लीकेशंस (54,567 करोड़ रुपये) के बाद आई है, जिससे ECMS के तहत कुल 75 अप्रूवल्स हो गए हैं। कुल निवेश अब 61,671 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो शुरूआती टारगेट 59,350 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन प्रोजेक्ट्स में डिस्प्ले मॉड्यूल्स, एंटेना, कैपेसिटर्स, कनेक्टर्स, हीट सिंक्स, ली-आयन सेल्स, रिले, रेसिस्टर्स, ट्रांसड्यूसर्स, एसएमडी पैसिव्स, फ्लेक्सिबल PCB, इंडक्टर्स, लैमिनेट्स, मेटालाइज्ड फिल्म्स और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स जैसी 16 प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

खास बात यह है कि इनमें देश का पहला SMD पैसिव प्लांट (टैंटलम बेस्ड कैपेसिटर्स के लिए), पहला फ्लेक्सिबल PCB प्लांट और पहला रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट फैसिलिटी शामिल है, जो रेयर अर्थ ऑक्साइड से मैग्नेट्स बनाएगा।

डिजाइन इन इंडिया: सब्सिडी के लिए नई शर्त

केंद्रीय IT और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कंपनियां अगर भारत को सिर्फ फैक्ट्री फ्लोर की तरह इस्तेमाल करेंगी तो सब्सिडी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, “रियल वैल्यू तभी कैप्चर होती है जब डिजाइन इन इंडिया हो।”

ECMS के तहत इंसेंटिव्स अब डिजाइन, क्वालिटी और इंजीनियरिंग क्षमता को भारत में विकसित करने से जुड़े हैं। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने चार प्रमुख प्राथमिकताएं बताईं है जिनमें मजबूत इन-हाउस डिजाइन क्षमता, रॉबस्ट डोमेस्टिक सप्लाई चेन, सिक्स सिग्मा क्वालिटी प्रोग्राम्स और स्किल्ड वर्कफोर्स डेवलपमेंट के लिए 4-5 ट्रेनिंग सेंटर्स (प्रत्येक में कम से कम 5,000 लोगों को ट्रेनिंग) शामिल है।

यह नीति स्केल से आगे जाकर स्ट्रैटेजिक वैल्यू पर फोकस कर रही है। सरकार का जोर है कि कंपनियां इंडिपेंडेंटली या यूनिवर्सिटी/इंस्टीट्यूशंस के साथ कोलैबोरेशन से डिजाइन क्षमता बनाएं और कैपिटल इक्विपमेंट में भी लोकल मैन्युफैक्चरर्स को प्राथमिकता दें।

प्रमुख प्रोजेक्ट्स और कंपनियों की भूमिका

इन अप्रूवल्स में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। डिक्सन डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Dixon Technologies की यूनिट) को डिस्प्ले मॉड्यूल्स के लिए मंजूरी मिली है। कंपनी का 1,100 करोड़ रुपये का डिस्प्ले प्लांट ग्रेटर नोएडा में है, जो जून से ट्रायल्स शुरू करेगा। इनका टारगेट सालाना 60 मिलियन मोबाइल फोन डिस्प्ले और 24 मिलियन IT हार्डवेयर डिस्प्ले की क्षमता है।

इससे मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में लोकल वैल्यू एडिशन 18% से बढ़कर लगभग 40% हो सकता है। अन्य कंपनियों में VVDN टेक्नोलॉजीज (VVDN Technologies), मॉलेक्स इंडिया, अम्फेनॉल (Amphenol FCI India), TDK इंडिया (TDK India), लोहुम क्लीनटेक (Lohum Cleantech) (रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स), विशय कंपोनेंट्स (Vishay Components India) और कई अन्य शामिल हैं।

कैपिटल गुड्स और सप्लाई चेन आइटम्स पर भी फोकस है, जो इंपोर्ट डिपेंडेंस कम करने और रेजिलिएंट सप्लाई चेन बनाने में मदद करेगा।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यह डेवलपमेंट इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेशकों के लिए मजबूत संकेत है। कुल 61,671 करोड़ रुपये के अप्रूवल्स और 65,040 डायरेक्ट एम्प्लॉयमेंट के साथ स्कीम तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनियां जो डिजाइन और इंजीनियरिंग में निवेश करेंगी, उन्हें इंसेंटिव्स मिलेंगे, जबकि सिर्फ असेंबली पर निर्भर रहने वालों को सब्सिडी का खतरा है।

यह उन निवेशकों के लिए अवसर है जो लोकल सप्लाई चेन, एडवांस्ड कंपोनेंट्स और कैपिटल इक्विपमेंट कंपनियों में रुचि रखते हैं। डिक्सन जैसे प्लेयर्स के प्रोजेक्ट्स से वैल्यू एडिशन बढ़ने की उम्मीद है, जो लंबे समय में बेहतर मार्जिन और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस ला सकता है। निवेशकों को अब डिजाइन क्षमता और क्वालिटी फोकस वाली कंपनियों ट्रैक करने पर ध्यान देना चाहिए।

भविष्य की बातें

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 125 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 500 बिलियन डॉलर करना है। ECMS इन प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इंपोर्ट पर निर्भरता कम करेगी और डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन बढ़ाएगी।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंडस्ट्री से तेज इंप्लीमेंटेशन की उम्मीद जताई है। जियोपॉलिटिकल स्थिति को देखते हुए रेजिलिएंट और डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन बनाना जरूरी है। अगर कंपनियां डिजाइन, क्वालिटी और स्किल डेवलपमेंट में निवेश करेंगी तो भारत इलेक्ट्रॉनिक्स का ग्लोबल हब बन सकता है।

निवेशकों के लिए यह लॉन्ग-टर्म थीम है। जो इस बदलाव को जल्दी समझेंगे और डिजाइन-फोकस्ड कंपनियों में लॉन्ग टर्म होराइजन के साथ निवेश करेंगे, वे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स भविष्य को आकार देने में सहायक होंगे, बशर्ते निवेशक पूर्ण रिसर्च के बाद ही निवेश करें।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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