भारत सरकार ने गन्ने के रस और बी-हैवी गुड़ का उपयोग करके इथेनॉल उत्पादन करने की मंजूरी दी, तो क्या हो सकता है 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य पूरा?
अब से कुछ वर्ष पहले भारत में कुछ ही लोग एथेनॉल से परचित थे, लेकिन अभी के समय में एथेनॉल का उपयोग पेट्रोल में बढ़ता जा रहा है क्योंकि सरकार एनवायरनमेंट फ्रेंडली ईधन के लिए एथेनॉल को बढ़ावा दे रही है।
सरकार ने गन्ने के रस और बी-हैवी गुड़ का उपयोग करके इथेनॉल बनाने की अनुमति दे देती है। यह निर्णय हाल ही में गन्ने के रस के इथेनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने के बाद लिया गया है।
इसके अलावा सरकार का लक्ष्य है कि वह 2025-26 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का मुकाम हासिल करे। लेकिन अभी सवाल यह आता है कि क्या भारत 20% एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को पूरा कर सकता है?
चलिए समझते है!
क्या है मामला?
CNBC TV18 के अनुसार, सोमवार (18 दिसंबर) को खाद्य मंत्रालय के निर्णय के बाद, चीनी की स्टॉक्स में 10% से ज्यादा वृद्धि हुई। सरकार ने गन्ने के रस का इस्तेमाल करके एथेनॉल बनाने पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस लेने का निर्णय किया है।
इस महीने की शुरुआत में, भारत सरकार ने चीनी मिलों को इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस का उपयोग बंद करने के लिए निर्देशित किया और इसके बजाय चीनी उत्पादन बढ़ाने को कहा। यह निर्देश कम बारिश के कारण हुए छोटे गन्ने की कटौती के बीच घरेलू आपूर्ति की चिंता को दूर करने के लिए दिया गया था।
पहले ही उत्पादन में कमी की संभावना ने घरेलू स्तर पर चीनी के मूल्यों को लगभग 14 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जिसने सरकार की फ़ूड इन्फ्लेशन के खिलाफ लड़ाई को और मुश्किल कर दिया है।
एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस का योगदान
एथेनॉल के उत्पादन में गन्ना अहम भूमिका निभाता है क्योंकि गन्ने में सुक्राेज पाया जाता है जो कि एथेनॉल बनाने के लिए आवश्यक है। एथेनॉल एक अल्कोहल है जिसे गन्ने के रस से विशेष प्रक्रिया के माध्यम से परिवर्तित किया जाता है।
भारत में कई तरह से एथेनॉल का उत्पादन किया जाता है जिनमें गन्ने का रस, बी-हैवी मोलासेस और सी-हैवी मोलासेस शामिल है। वर्तमान समय में गन्ने के रस के माध्यम से 20%, बी-हैवी मोलासेस से 60% और बहुत कम मात्रा में सी-हैवी मोलासेस से एथेनॉल का उत्पादन किया जाता है।

यहां आप देख सकते है कि एथेनॉल मिश्रण का उपयोग साल – दर – साल कैसे बढ़ रहा है।
एथेनॉल पर नई निर्देश क्या है?
बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार, शुक्रवार को सरकार ने शुगर मिल्स को एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का रस और बी-हैवी मोलासेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, लेकिन इसके लिए शुगर की दिशा में 2023-24 सप्लाई वर्ष के लिए 17 लाख टन का सीमा लगा दी गई है।
भविष्य की बातें
भारत सरकार ने 2025-26 तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 20% रखा है, लेकिन वर्तमान में इस स्तर पर इथेनॉल मिश्रण उत्पादन मुश्किल हो सकता है क्योंकि वर्तमान में देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक नहीं है।
एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को सरकार की ओर से काफी प्रोत्साहन मिला है जिसे हम इस बात से समझ सकते है कि पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण 2019-20 में 5% से बढ़कर 12% हो गया। इसलिए यह उम्मीद कि जा सकती है कि भारत अपने 20% के लक्ष्य को पा सकता है।
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*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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