19 नवंबर 2023 को लाल सागर में गैलेक्सी लीडर नाम के एक जहाज को हौथी विद्रोही समूह द्वारा हाईजैक कर लिया गया। बहुत से लोग इसे एक और रेबल हमला समझ रहे थे, लेकिन इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को फिर से उथल – पुथल कर दिया है क्योंकि यह एक-दो हमले नहीं थे, बल्कि हौथी विद्रोहियों ने ड्रोन का उपयोग करके 19 नवंबर से 18 दिसंबर के बीच व्यापारिक जहाजों पर 37 हमले किए।
लेकिन, लाल सागर में ये हमले क्यों हो रहे है और ये ग्लोबल व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकते है?
चलिए समझते है!
क्या है मामला?
हौथी विद्रोही, यमन का एक उग्रवादी समूह है जिसको ईरान का सहयोग मिला हुआ है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर लाल सागर में यह हमले क्यों हो रहे है? क्योंकि हौथी विद्रोही जहाजों पर हमला कर हमास के लिए अपना समर्थन व्यक्त कर रहे है।
इसलिए, लाल सागर से होकर जो भी जहाज जा रहे है वह उनको इज़राइल के समर्थन में मान रहे है। जैसे कि आप जानते है कि काफी समय से इज़राइल – हमास युध्द चल रहा है इसलिए हौथी विद्रोहियों का कहना है कि जब तक इज़राइल हमास पर अपने हमले को नहीं रोकता है तब तक लाल सागर में हमले जारी रहेंगे।
इसी वजह से, हौथी विद्रोहियों द्वारा अंतराष्ट्रीय व्यापार को बाधित करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि समुंद्री मार्ग के द्वारा जो व्यापार होता है वह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बहुत जरुरी है।
लाल सागर दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
लाल सागर लगभग 2,000 किलोमीटर लंबा है जो स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर को हिंद महासागर (Indian Ocean) से जोड़ता है। इकनॉमिक टाइम्स में बताया गया है कि यूके स्थित फ्रेट एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के अनुसार, 2023 के पहली छमाही में लाल सागर से स्वेज नहर के माध्यम से प्रतिदिन कुल 9 मिलियन बैरल तेल गुजरा है।
हर साल इस क्षेत्र से ग्लोबल व्यापार का 12%, तेल डिमांड का 9%, LNG आयत का 6% और कंटेनर शिपमेंट का 30% इस रास्ते से गुजरते है।

यह इमेज दर्शाती है कि स्वेज नहर अंतराष्ट्रीय व्यापार के लिए कितनी अहम है।
स्वेज नहर को क्रॉस करने के बाद यूरोप पहुंचना बहुत आसान हो जाता है जब स्वेज नहर का निर्माण नहीं हुआ था, तब यूरोप तक पहुंचने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता था, जिससे शिपिंग समय, ईंधन खर्च काफी ज्यादा होता था। इसलिए अंतराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से इस पूरे को क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और ऐसे में अगर इस क्षेत्र में कोई समस्या आती है तो यह दुनियां भर की अर्थव्यवस्थाओं और मार्केट को प्रभावित कर सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
लाल सागर का युद्ध पहले ही जहाजों के बीच खर्चों में वृद्धि का कारण बन गया है, जिससे भारतीय इम्पोर्टर के लिए शिपिंग खर्चे बढ़ गए हैं। भारतीय इम्पोर्ट लागतें बढ़ रही हैं जो खासकर चमड़ा, प्लास्टिक, और मसालों जैसे सेक्टरों को प्रभावित कर रही हैं, साथ ही बासमती चावल जैसे मुख्य निर्यात आइटमों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
अगर यह युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो आने वाले समय में निवेशकों को इसका असर मार्केट में देखने को मिल सकता है क्योंकि भारत वर्तमान समय में 85% से अधिक कच्चा तेल और 50% से अधिक गैस आयात करता है और इस संकट की वजह से ऑइल मार्केटिंग कंपनियां जैसे, BPCL, HPCL, IOC आदि प्रभावित हो सकती है।
भविष्य की बातें
भारत का 20% व्यापार स्वेज नहर के माध्यम से होता है इसलिए हमें दो तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
तेल: भारत के दो मुख्य सप्लायर है पश्चिम एशिया और रूस, जहां पश्चिम एशिया से इम्पोर्ट होने वाले तेल में कोई समस्या नहीं है क्योंकि ये पर्शियन गल्फ के माध्यम से आता है। लेकिन भारत के कुल तेल आयात का 40% (लगभग 1.7 मिलियन बैरल) रूस से स्वेज़ नहर के रूट से आता है इसलिए अगर रूट बदलता है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती है।
मालवाहन लागत: कुछ भारतीय इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि शिपिंग की लागतें 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, इसलिए अगर ऐसा हुआ तो भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है। जिससे उन भारतीय कंपनियों को नुकसान हो सकता है विदेशों में एक्सपोर्ट करते है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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