SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) शेयर बाजार के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव लाने जा रहा है। 28 मार्च, 2024 से SEBI इक्विटी कैश सेगमेंट में वैकल्पिक T+0 सेटलमेंट लागू करने जा रहा है। इसका मतलब है कि अब आप जो भी ट्रेड करते हैं, उसका सेटलमेंट उसी दिन हो जाएगा। अभी की व्यवस्था T+1 है, यानी ट्रेड का सेटलमेंट अगले ट्रेडिंग दिन में होता है।
अभी हम इस बदलाव के बारे में विस्तार से जानेंगे, इसके प्रभावों पर गौर करेंगे और साथ ही SEBI द्वारा हाल ही में लाए गए अन्य बदलावों को भी देखेंगे।
क्या है मामला?
भारतीय शेयर बाजार को रेगुलेट करने वाली संस्था SEBI, 28 मार्च 2024 से इक्विटी कैश सेगमेंट में वैकल्पिक T+0 सेटलमेंट लागू करने जा रही है। इसका मतलब है कि आप चाहें तो इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें आप जो भी शेयर खरीदते या बेचते हैं, उसका पैसा और शेयर उसी दिन आपके डीमैट खाते में आ जाएगा या चला जाएगा। अभी की व्यवस्था T+1 है, यानी यह काम अगले ट्रेडिंग दिन में होता है।
SEBI की अध्यक्ष माधुरी पुरी बुच का कहना है कि यह बदलाव क्रिप्टोकरेंसी जैसी नई चीज़ों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। उनका मानना है कि “हमें यह सुनिश्चित करना है कि रेगुलेटेड मार्केट प्रतिस्पर्धी बना रहे और निवेशकों को समान लाभ प्रदान करे”। उन्होंने आगे बताया कि मार्च 2025 तक पूरे इक्विटी कैश सेगमेंट में T+0 सेटलमेंट अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा।
इस कदम को कैसे इम्प्लीमेंट किया जाएगा?
SEBI इस बदलाव को दो चरणों में लागू करने की योजना बना रहा है:
(a) पहला चरण: इसमें यह प्रस्ताव रखा गया है कि दोपहर 1:30 बजे तक के ट्रेड्स के लिए वैकल्पिक T+0 सेटलमेंट साइकिल लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि उसी दिन शाम 4:30 बजे तक आपके डीमैट खाते में सिक्योरिटीज और फंड का सेटलमेंट हो जाएगा।
(b) दूसरा चरण: तत्काल सेटलमेंट साइकिल के अंतर्गत आने वाले शेयरों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित है। इसमें दोपहर 3:30 बजे तक के ट्रेड्स के लिए एक वैकल्पिक ट्रेड-बाय-ट्रेड सेटलमेंट की सुविधा दी जाएगी।
इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के बीच एक API-आधारित इंटरफेस स्थापित किया जाएगा ताकि जल्दी भुगतान की सूचना रियल समय में मिल सके।
इस बदलाव का क्या असर होगा?
एनालिस्ट का कहना है कि इस बदलाव से मार्जिन राशि मुक्त हो जाएगी और मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी। हालांकि, इसका असर उन स्टॉक ब्रोकर्स के बिजनेस मॉडल पर पड़ सकता है जो ग्राहकों के फंड से मिलने वाले ब्याज इनकम पर निर्भर करते हैं। इस वजह से ब्रोकर्स के पास कम फंड रह जाएगा। लेकिन, निवेशकों को अपने फंड और शेयरों पर ज्यादा नियंत्रण मिल जाएगा।

सेबी द्वारा प्रस्तुत हालिया डेवलपमेंट पर एक नजर
पिछले कुछ वर्षों में, सेबी ने ट्रेड सेटलमेंट साइकिल को सफलतापूर्वक शॉर्ट कर दिया है। साल 2002 में ही उन्होंने इस दिशा में पहला कदम उठाया था, जहां उन्होंने सेटलमेंट का समय घटाकर T+5 से T+3 कर दिया था। इसके बाद उनकी कोशिशें जारी रहीं और साल 2003 में यह समय और कम होकर T+2 हो गया।
यही नहीं, SEBI ने साल 2021 में चरणबद्ध तरीके से T+1 सेटलमेंट लागू करना शुरू किया, जो आखिरकार जनवरी 2023 में पूरी तरह से लागू हो गया। इस तरह, भारत शेयर बाजार में सेटलमेंट का समय घटकर T+5 से T+1 तक लाने में सफल रहा है।
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*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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