भारतीय IPO मार्केट में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रिकॉर्ड लिस्टिंग देखने को मिली हैं। अब इन IPOs का अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है, जब शुरुआती निवेशक, प्रमोटर्स और एंकर निवेशकों पर लगा लॉक-इन पीरियड समाप्त होगा। अगले तीन महीनों में लगभग 73 कंपनियों के 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक वैल्यू के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इससे मार्केट में शेयर्स की सप्लाई बढ़ेगी, जिसका असर कई स्टॉक्स की प्राइस और निवेशकों की रणनीति पर दिखाई दे सकता है।
आइए समझते हैं कि IPO लॉक-इन एक्सपायरी क्या होती है, आने वाले महीनों में कौन-कौन सी बड़ी कंपनियां इसके दायरे में हैं और इसका निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
क्या है मामला?
IPO के बाद कुछ श्रेणी के निवेशकों पर एक निश्चित अवधि तक शेयर बेचने की पाबंदी होती है, जिसे लॉक-इन पीरियड कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि शुरुआती निवेशक लिस्टिंग के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर शेयर बेचकर मार्केट में वोलैटिलिटी न पैदा करें।
अब मई के अंत से अगस्त 2026 के बीच यह लॉक-इन अवधि बड़ी संख्या में कंपनियों के लिए समाप्त होने जा रही है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, लगभग 73 कंपनियों के करीब 3.29 लाख करोड़ रुपये ($34 बिलियन) वैल्यू के शेयर ट्रेडिंग के लिए पात्र हो सकते हैं। इनमें एक महीने, तीन महीने और छह महीने के लॉक-इन एक्सपायरी शामिल हैं। हालांकि लॉक-इन समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि सभी निवेशक तुरंत अपने शेयर बेच देंगे, लेकिन इतनी बड़ी संभावित सप्लाई मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकती है और चुनिंदा स्टॉक्स में शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी बढ़ा सकती है।
आगामी लॉक-इन एक्सपायरी की प्रमुख इवेंट्स
आने वाले समय में विभिन्न IPOs की एक महीने, तीन महीने और छह महीने की लॉक-इन अवधि समाप्त होने वाली है, जिससे कई कंपनियों के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। कुछ मामलों में अनलॉक होने वाली हिस्सेदारी सीमित है, जबकि कई बड़ी कंपनियों में 50% से 70% तक इक्विटी मार्केट में आ सकती है।

एक महीने की श्रेणी में केवल OnEMI टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस का लॉक-इन समाप्त होगा, जबकि तीन महीने की श्रेणी में SEDEMAC मेक्ट्रोनिक्स (SEDEMAC Mechatronics), सेंट्रल माइन प्लानिंग (Central Mine Planning), साई पैरेंटेरियल (Sai Parenterals), पावरिका (Powerica) और ओम पावर ट्रांसमिशन (Om Power Transmission) जैसे नाम शामिल हैं। इन कंपनियों में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी अनलॉक होने वाली है।
हालांकि सबसे बड़ा असर छह महीने की लॉक-इन एक्सपायरी से आने की संभावना है। Meesho, ICICI Pru AMC, कोरोना रेमेडीज (Corona Remedies) और भारत कोकिंग कोल (Bharat Coking Coal) जैसी कंपनियों में बड़ी मात्रा में शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे। ऐसे बड़े अनलॉक इवेंट्स मार्केट में अतिरिक्त सप्लाई ला सकते हैं, जिससे संबंधित शेयर्स में शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी और प्रॉफिट बुकिंग का दबाव बढ़ सकता है।
लॉक-इन एक्सपायरी का मार्केट पर संभावित प्रभाव
लॉक-इन अवधि समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि सभी निवेशक तुरंत अपने शेयर बेच देंगे। फिर भी, जब बड़ी मात्रा में शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होने वाले होते हैं, तो मार्केट अक्सर संभावित सप्लाई बढ़ने की आशंका को पहले से ही प्राइस में शामिल करना शुरू कर देता है। यही कारण है कि कई बार लॉक-इन एक्सपायरी के आसपास शेयर्स में दबाव देखने को मिलता है। हाल के उदाहरणों में पाइन लैब्स (Pine Labs), फिजिक्सवाला (Physics Wallah), लेंसकार्ट (Lenskart) और वारी एनर्जीज (Waaree Energies) जैसे शेयर्स में लॉक-इन समाप्ति के बाद 3% से 11% तक की गिरावट दर्ज की गई थी, क्योंकि शुरुआती निवेशकों को मुनाफावसूली का अवसर मिला।
हालांकि हर कंपनी में इसका प्रभाव समान नहीं होता। जिन कंपनियों का प्रदर्शन लिस्टिंग के बाद कमजोर रहा है या जहां निवेशक मामूली लाभ पर बैठे हैं, वहां बिक्री का दबाव अधिक हो सकता है। दूसरी ओर, मजबूत बिजनेस मॉडल, बेहतर वित्तीय प्रदर्शन और आकर्षक ग्रोथ संभावनाओं वाली कंपनियां शुरुआती दबाव के बाद तेजी से संतुलन बना सकती हैं। इसलिए लॉक-इन एक्सपायरी को केवल एक जोखिम नहीं, बल्कि मार्केट की सप्लाई और निवेशक व्यवहार को समझने वाले महत्वपूर्ण इंडिकेटर के रूप में देखना चाहिए।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
रिटेल निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि लॉक-इन एक्सपायरी अपने आप में निवेश का कारण या बिक्री का संकेत नहीं है। यह केवल एक ऐसी घटना है जो शेयर की उपलब्ध सप्लाई बढ़ाती है।
निवेशकों को उन कंपनियों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जहां अनलॉक होने वाली हिस्सेदारी बहुत बड़ी है और शेयर पहले से दबाव में चल रहा है। ऐसे मामलों में शॉर्टटर्म उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
वहीं, यदि किसी कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स मजबूत हैं, आय में वृद्धि बनी हुई है और वैल्यूएशन उचित है, तो लॉक-इन एक्सपायरी से पैदा हुई कमजोरी लॉन्गटर्म के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। इसलिए केवल इवेंट पर नहीं बल्कि कंपनी के वास्तविक फंडामेंटल पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
भविष्य की बातें
भारतीय IPO मार्केट लगातार बड़ा हो रहा है और आने वाले वर्षों में लॉक-इन एक्सपायरी जैसी घटनाएं और अधिक सामान्य बनेंगी। जैसे-जैसे अधिक कंपनियां लिस्ट होंगी, वैसे-वैसे मार्केट को नियमित रूप से बड़े अनलॉक इवेंट्स का सामना करना पड़ेगा।
निवेशकों के लिए केवल IPO में निवेश करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पोस्ट-लिस्टिंग घटनाओं जैसे लॉक-इन एक्सपायरी, प्रमोटर हिस्सेदारी में बदलाव और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर रखना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, अगले तीन महीनों में होने वाला 34 बिलियन डॉलर का शेयर अनलॉक मार्केट में अस्थायी वोलेटिलिटी ला सकता है। हालांकि लंबे समय में किसी भी कंपनी की दिशा उसके बिजनेस प्रदर्शन, मुनाफे की क्षमता और विकास की संभावनाओं से ही तय होगी, न कि केवल लॉक-इन समाप्ति से।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।