आयकर अधिनियम, 2025 (Income-tax Act, 2025) लागू होने के बाद इस बार ITR फाइलिंग सीजन में एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है, क्या नए टैक्स ईयर (Tax Year) सिस्टम के आने के बाद अब एक ही आय के लिए दो आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने होंगे?
यह भ्रम इसलिए पैदा हुआ क्योंकि सरकार 1 अप्रैल 2026 से असेसमेंट ईयर (Assessment Year) की जगह टैक्स ईयर (Tax Year) की नई व्यवस्था लागू कर रही है। कई लोगों को लगा कि इस बदलाव के दौरान उन्हें एक अतिरिक्त ITR भी भरना पड़ेगा।
हालांकि, अब आयकर विभाग ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
क्या है मामला?
अब तक आयकर व्यवस्था में दो अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल होता था। एक वित्त वर्ष (Financial Year/Previous Year), जिसमें आय अर्जित की जाती थी, और दूसरा असेसमेंट ईयर (Assessment Year), जिसमें उस आय का ITR दाखिल किया जाता था।
इस वजह से कई करदाताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि ITR में जिस वर्ष का उल्लेख है, वह आय अर्जित करने का वर्ष नहीं, बल्कि उसका असेसमेंट ईयर है।
इसी भ्रम को दूर करने के लिए आयकर अधिनियम, 2025 में टैक्स ईयर की नई व्यवस्था लाई गई है। अब आय अर्जित करने और टैक्स से जुड़े वर्ष के लिए एक ही शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।
हालांकि, केवल नाम बदला है। मौजूदा ITR फाइलिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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तो आखिर कितने ITR भरने होंगे?
इसका जवाब है: सिर्फ एक।
अगर आपकी आय 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच की है, तो आपको केवल असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के तहत एक ही ITR दाखिल करना होगा।
उसी आय के लिए टैक्स ईयर के तहत अलग से दूसरा ITR भरने की कोई जरूरत नहीं है।
आयकर विभाग ने साफ किया है कि नया कानून लागू होने के बावजूद मौजूदा फाइलिंग सीजन पहले की तरह ही चलेगा।
इस बार कौन-सा आयकर कानून लागू होगा?
कई करदाताओं के मन में यह सवाल भी है कि इस बार ITR दाखिल करते समय आयकर अधिनियम, 1961 लागू होगा या आयकर अधिनियम, 2025।
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आय कब अर्जित की गई है, न कि ITR कब दाखिल किया जा रहा है।
चूंकि मौजूदा ITR वित्त वर्ष 2025-26 की आय से जुड़ा है, इसलिए इस पर आयकर अधिनियम, 1961 ही लागू होगा। 1 अप्रैल 2026 से नया कानून लागू होने का इस आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
नया टैक्स ईयर सिस्टम कब से लागू होगा?
नया टैक्स ईयर सिस्टम 1 अप्रैल 2026 से अर्जित होने वाली आय पर लागू होगा।
इसे आसान तरीके से समझें:
- 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच की आय के लिए केवल AY 2026-27 के तहत एक ITR दाखिल करना होगा।
- 1 अप्रैल 2026 के बाद अर्जित आय टैक्स ईयर 2026-27 के तहत मानी जाएगी।
- टैक्स ईयर सिस्टम के तहत पहला ITR 31 मार्च 2027 के बाद, तय समय-सीमा के अनुसार दाखिल किया जाएगा।
आपके लिए इसमें क्या है?
ज्यादातर करदाताओं के लिए इस फाइलिंग सीजन में कुछ भी नहीं बदला है।
आपको पहले की तरह सही ITR फॉर्म चुनकर तय समय-सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल करना है। टैक्स ईयर की नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है, न कि करदाताओं पर अतिरिक्त अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ाना।
भविष्य की बातें
टैक्स ईयर की नई व्यवस्था का मकसद भारत की टैक्स प्रणाली को अधिक सरल और समझने योग्य बनाना है। इससे अलग-अलग वर्षों की जगह एक ही स्पष्ट अवधि का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे करदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान हो सके।
फिलहाल करदाताओं को AY 2026-27 के तहत केवल एक ITR ही दाखिल करना है। टैक्स ईयर के तहत पहला ITR केवल 1 अप्रैल 2026 के बाद अर्जित आय के लिए होगा, जिसे 31 मार्च 2027 के बाद निर्धारित समय-सीमा के अनुसार दाखिल किया जाएगा।
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