एथेनॉल माइलस्टोन: 2030 का टारगेट 2025 में हासिल किया!

एथेनॉल माइलस्टोन: 2030 का टारगेट 2025 में हासिल किया!
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भारत अपने लंबे समय के एनर्जी लक्ष्यों के तहत क्लीन और अधिक सस्टेनेबल फ्यूल विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर आयातित ऑइल पर निर्भरता कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करना है। एथेनॉल, एक रिन्यूएबल फ्यूल है जो मुख्य रूप से गन्ने, मोलासेस और अन्य कृषि अपशिष्ट से बनता है, जो फॉसिल फ्यूल के उपयोग को कम करता है और हानिकारक उत्सर्जन को घटाता है।

भारत ने 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है। आइए गहराई से जानते हैं कि यह कदम फ्यूल की प्राइस, वाहन मालिकों और मार्केट पार्टिसिपेंट के लिए क्या मायने रखता है।

क्या है मामला?

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, भारत ने 2030 के मूल लक्ष्य से पांच साल पहले ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 2014 में यह ब्लेंडिंग रेट सिर्फ 1.5% था, जो जून 2025 तक बढ़कर 20% हो गया है यानि 11 साल में 13 गुना वृद्धि हुई है, जिससे भारत की क्रूड ऑइल पर निर्भरता कम हुई है।

इस दौरान, एथेनॉल उत्पादन 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 661 करोड़ लीटर हो गया, जिससे 698 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि एथेनॉल-मिश्रित फ्यूल ने एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत किया है, साथ ही इससे बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे भी हुए हैं।

इथेनॉल ब्लेंडिंग 2014 में 1.5% से बढ़कर जून 2025 तक 20% हो गई, यानी 11 साल में लगभग 13 गुना वृद्धि हुई।

इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया है। किसानों ने ₹1.18 लाख करोड़ कमाए हैं और डिस्टिलरीज़ ने ₹1.96 लाख करोड़ कमाए हैं। साथ ही, सरकार ने ₹1.36 लाख करोड़ का फॉरेन करेंसी रिज़र्व बचाया है। अधिकांश एथेनॉल गन्ने के रस, B-हैवी मोलासेस और अन्य कृषि उप-प्रोडक्ट्स से आया है।

इसके बारे में पढ़ें: भारत ने 10 लाख टन चीनी निर्यात को मंजूरी दी, आगे क्या?

क्या एथेनॉल की बढ़ती हिस्सेदारी का मतलब फ्यूल की प्राइस में कमी है?

एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से पेट्रोल की प्राइस में कमी आने की उम्मीद थी, क्योंकि एथेनॉल पेट्रोल से काफी सस्ता होता है। 2021 में, 20% ब्लेंड से पेट्रोल की प्राइस में लगभग ₹8 प्रति लीटर की कमी आने का अनुमान था।

हालांकि, ऐसा नहीं हुआ है। दिल्ली को छोड़कर अधिकांश शहरों में पेट्रोल अभी भी लगभग ₹100 प्रति लीटर के आसपास है। कई पेट्रोल वाहन मालिकों को अधिक लागत का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि एथेनॉल तेजी से जलता है, माइलेज कम देता है और इंजन घिसावट को बढ़ा सकता है।

जैसे-जैसे भारत 27% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि फ्यूल की प्राइस गिरेंगी या उपभोक्ताओं को फायदा होगा। इसके अलावा, मनीकंट्रोल के अनुसार, इस बात को लेकर भी चिंताएं उभर रही हैं कि क्या एथेनॉल-मिश्रित फ्यूल से इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ेगा, खासकर पुरानी कारों के लिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी इसका कोई प्रभाव नहीं है, क्योंकि E20 इंजन इस ब्लेंड को हैंडल कर सकते हैं, और इंश्योरेंस प्रीमियम क्लेम्स, वाहन के प्रकार और लोकेशन जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है, न कि फ्यूल के प्रकार पर।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

एथेनॉल ब्लेंडिंग में तेज वृद्धि से शुगर, बायोफ्यूल और ऑटो मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में निवेशकों के लिए नए अवसर खुल गए हैं। सरकार ने 2025 तक E20 लक्ष्य को पूरा करने के लिए एथेनॉल उत्पादन पर लगी कैप हटा दी थी। इससे शुगर मिल्स अधिक चीनी को एथेनॉल में बदल सकती हैं, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और कैश फ्लो में सुधार होगा।

चीनी डायवर्जन पर कोई सीमा न होने और एथेनॉल की डिमांड बढ़ने से शुगर और डिस्टिलरी कंपनियों को लंबे समय में ग्रोथ मिल सकती है। निवेशकों को मजबूत एथेनॉल क्षमता और फॉरवर्ड इंटीग्रेशन प्लान वाली कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।

भविष्य की बातें

भारत अब 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग से आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार अगस्त के अंत तक 27% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E27) और 2030 तक 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E30) के नॉर्म्स फाइनल करेगी। फिलहाल, भारत में E27 फ्यूल के लिए कोई स्टैंडर्ड नॉर्म्स नहीं हैं। अपनी 85% ऑइल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर भारत, विदेशी निर्भरता और प्रदूषण को कम करने के लिए एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

गडकरी ने यह भी बताया कि 11 ऑटोमोबाइल कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहन बना चुकी हैं। अब फोकस भारत के सरप्लस कृषि उत्पादन का उपयोग करके एनर्जी क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों को सपोर्ट करने पर है।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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