कैसे बना भारत सोलर हब? 172 GW की पूरी कहानी

कैसे बना भारत सोलर हब? 172 GW की पूरी कहानी
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भारत की एनर्जी यात्रा पिछले दशक में तेजी से बदली है, जहां देश पारंपरिक फ्यूल आधारित सिस्टम से धीरे-धीरे क्लीन और सस्टेनेबल एनर्जी मॉडल की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती इंडस्ट्रियलाइजेशन, अर्बनाइजेशन और डिजिटल इकोनॉमी के विस्तार ने एनर्जी की डिमांड को लगातार बढ़ाया है। इसी डिमांड को पूरा करने के लिए भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी, विशेष रूप से सोलर और विंड सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश और क्षमता विस्तार किया है।

पिछले दस वर्षों में भारत की एनर्जी नीति में स्पष्ट बदलाव देखने को मिला है, जिसमें एनर्जी सिक्योरिटी, इंपोर्ट डिपेंडेंसी कम करना और लो-कार्बन ग्रोथ जैसे लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

आइए भारत के सोलर मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी बूम को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्या यह थीम निवेशकों के लिए एक बड़ा निवेश अवसर बन सकता है।

क्या है मामला?

भारत की सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी पिछले एक दशक में 3 GW से बढ़कर 172 GW हो गई है, जो देश की क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक बड़ा बदलाव दर्शाती है। वर्तमान में भारत की डोमेस्टिक सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 27 GW है, जो पूरी वैल्यू चेन के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत में सोलर पावर केवल बड़े सोलर पार्क्स तक सीमित नहीं है, बल्कि रूफटॉप इंस्टॉलेशन में भी तेजी आई है। PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रतिदिन लगभग 10,000 रूफटॉप सोलर यूनिट्स इंस्टॉल हो रही हैं और अब तक 40 लाख रूफटॉप इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं।

देश में सोलर पावर की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी लगभग 144 GW तक पहुँच चुकी है, जो दिखाती है कि मैन्युफैक्चरिंग क्षमता केवल कागज पर नहीं बल्कि वास्तविक बिजली उत्पादन में भी योगदान दे रही है।

भारत की एनर्जी डिमांड और रिन्यूएबल शिफ्ट

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ एनर्जी की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है। FY 2023-24 में भारत की कुल प्राथमिक एनर्जी सप्लाई (TPES) 9,03,158 KToE तक पहुँच गई, जिसमें कोयले का हिस्सा 60.21%, क्रूड ऑयल का 29.83% और नैचुरल गैस का 6.99% रहा।

रिन्यूएबल एनर्जी का योगदान भी लगातार बढ़ रहा है। FY 2014-15 में 17,682 KToe की तुलना में FY 2023-24 में रिन्यूएबल एनर्जी सप्लाई 31,847 KToE तक पहुँच गई, जो लगभग 10 वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्शाती है।

भारत की कुल रिन्यूएबल एनर्जी पोटेंशियल मार्च 2024 तक 21,09,655 MW आंकी गई है, जिसमें विंड एनर्जी का हिस्सा 11,63,856 MW (55%) और सोलर एनर्जी का हिस्सा 7,48,990 MW (लगभग 36%) है।

पॉलिसी सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम

सरकार द्वारा मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची (ALMM) जैसी नीतियों के माध्यम से डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। मार्च 2026 तक 17 राज्यों में कुल 1,72,592 MW सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दर्ज की गई है।

राज्य स्तर पर गुजरात (80,060 MW), राजस्थान (21,779 MW), तमिलनाडु (15,199 MW), महाराष्ट्र (11,414 MW) और हरियाणा (9,749 MW) प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरे हैं।

सरकार का फोकस केवल मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि सोलर सेल, वेफर और इंगॉट जैसे महत्वपूर्ण कॉम्पोनेंट्स के डोमेस्टिक उत्पादन को भी बढ़ावा देना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

भारत की तेजी से बढ़ती बिजली डिमांड और रिन्यूएबल एनर्जी पर बढ़ता फोकस सोलर सेक्टर को लॉन्ग टर्म ग्रोथ थीम बना सकता है। FY 2023-24 में टोटल फाइनल कंजम्पशन (TFC) 6,13,605 KToE तक पहुँच गया, जो FY 2014-15 की तुलना में 38% अधिक है।

रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की तेजी, डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग में वृद्धि और पॉलिसी सपोर्ट यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में EPC, मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर्स और पावर जनरेशन कंपनियों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में विस्तार रोजगार, कैपिटल एक्सपेंडिचर और टेक्नोलॉजी इनोवेशन को बढ़ावा दे सकता है, जिससे लॉन्ग टर्म इंडस्ट्रियल ग्रोथ को सपोर्ट मिल सकता है।

भविष्य की बातें

भारत का लक्ष्य क्लीन एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाकर लॉन्ग टर्म एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना है। सोलर मैन्युफैक्चरिंग में 3 GW से 172 GW तक की वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत तेजी से आत्मनिर्भर एनर्जी इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है।

सरकार ने जून 2026 से सभी सोलर प्रोजेक्ट्स में डोमेस्टिकली मैन्युफैक्चर्ड सेल्स के उपयोग को अनिवार्य करने का लक्ष्य रखा है और 2026 तक 42 GW डोमेस्टिक सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने का प्लान बनाया है, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी और पूरी वैल्यू चेन मजबूत हो सकेगी।

कुल मिलाकर, भारत का सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर केवल एनर्जी ट्रांजिशन की कहानी नहीं, बल्कि देश की इंडस्ट्रियल और आर्थिक ग्रोथ का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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