भारत में गोल्ड की प्राइस फिलहाल तेज गिरावट का सामना कर रही हैं। 23 मार्च 2026 को MCX पर गोल्ड प्रति 10 ग्राम 7,000 रुपये तक गिर चुका है, जबकि सिल्वर प्रति किलोग्राम 14,000 रुपये तक गिर गई है। यह गिरावट पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद हो रही है, जो आमतौर पर गोल्ड को सुरक्षित आश्रय बनाती है। लेकिन असली वजह आश्चर्यजनक है।
सेफ हेवन माने जाने वाले गोल्ड में आखिर चल क्या रहा है अभी अनिश्चितता के समय इसे बढ़ना चाहिए, लेकिन लगातार गिरता जा रहा है, आइए समझते है।
क्या है मामला?
भारत और ग्लोबल मार्केट दोनों में गोल्ड और सिल्वर की प्राइस में तेज गिरावट देखने को मिल रही है, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। MCX पर मार्च 2026 सिल्वर फ्यूचर करीब 6% गिरकर 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया, जबकि गोल्ड की कीमत में भी 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल मार्केट में भी कमजोरी स्पष्ट दिख रही है। COMEX पर गोल्ड 3% गिरकर 4,462 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, और पिछले सप्ताह इसमें लगभग 11% की गिरावट आई, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।
भारत में गोल्ड की प्राइस पिछले एक सप्ताह में लगभग 10% गिर चुकी हैं। भारत में त्योहारों के मौसम में भी खरीदारी की जगह बिकवाली हो रही है, जैसे उगादी, गुड़ी पड़वा (गुढी पाडवा) और चैत्र नवरात्रि के दौरान निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं।
सिल्वर की प्राइस में गिरावट की वजह
सिल्वर की प्राइस में हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह यह है कि पहले प्राइस में काफी तेज बढ़त देखने को मिली थी। जियोपॉलिटिकल तनाव के शुरुआती दौर में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सिल्वर में भारी खरीदारी की, जिससे प्राइस हाई स्तर पर पहुंच गईं। अब हाई स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं, जिससे प्राइस में तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है।
दूसरी बड़ी वजह ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। क्रूड ऑयल की प्राइस 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहने से महंगाई की चिंता बढ़ी है। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हुई है और दरें बढ़ने की संभावना बढ़ी है। ज्यादा ब्याज दरें होने पर निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर झुकते हैं जहां निश्चित रिटर्न मिलता है, जिससे सिल्वर जैसे कमोडिटी पर दबाव आता है।
लिक्विडिटी भी गिरावट का एक अहम कारण बन रही है। ग्लोबल इक्विटी मार्केट में कमजोरी के चलते कई निवेशक अपने अन्य निवेश में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सिल्वर में बनी पोजिशन को कम कर रहे हैं। सिल्वर की प्राइस गोल्ड की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखाती हैं, इसलिए गिरावट भी अपेक्षाकृत तेज रही है। वर्तमान में ग्लोबल स्पॉट सिल्वर करीब 3% से अधिक गिर चुका है, जो मार्केट में बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए यह स्थिति सतर्क रहने का संकेत है।द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। अगर गोल्ड 4,494 डॉलर के सपोर्ट स्तर से नीचे आया तो और गिरावट आ सकती है। लंबी अवधि के निवेशक डिप्स पर स्टैगर्ड तरीके से खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन आक्रामक पोजीशन से बचें। ब्याज दर संकेतों और डॉलर की गति पर नजर रखें।
भारत में त्योहार बिकवाली का मौका मुनाफा वसूली के लिए है, लेकिन लंबे समय में महंगाई और अनिश्चितता गोल्ड को सपोर्ट दे सकती है। निवेशक छोटी-छोटी खरीदारी से जोखिम कम कर सकते हैं। यह करेक्शन लंबी अवधि के निवेश के लिए अवसर भी पैदा कर रहा है।
भविष्य की बातें
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और बदलते आर्थिक संकेतों के कारण ग्लोबल मेटल्स मार्केट दबाव में है, जिसका असर गोल्ड की प्राइस पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हाल ही के सेशन में गोल्ड में लगातार गिरावट देखी गई है और पिछले कुछ वर्षों की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट में से एक दर्ज हुई है।
फिलहाल गोल्ड अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आ चुका है और 4,250-4,400 डॉलर प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो प्राइस 3,800 डॉलर तक फिसल सकती हैं। वहीं, 4,400 डॉलर के ऊपर टिके रहने पर गोल्ड में रिकवरी देखने को मिल सकती है, जो प्राइस को 4,700-4,800 डॉलर के दायरे तक ले जा सकती है।
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