भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने की दिशा में बड़ी घोषणा की है। देशभर में 72,300 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जो इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के रास्ते को आसान बनाएंगे। इस पहल का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण करना है, बल्कि भारत को EV सेक्टर में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करना भी है। मौजूदा समय में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है।
आइए समझते है कि यह पहल कैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री में अहम् भूमिका निभाएगी और यह निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।
क्या है मामला?
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत यह निर्णय लिया गया है कि पूरे देश में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इन चार्जिंग स्टेशनों को प्रमुख शहरों, हाईवे और ग्रामीण इलाकों में स्थापित किया जाएगा ताकि EV उपयोगकर्ताओं को लंबी यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अगले 15 महीनों में देशभर में 72,300 फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 48,400 स्टेशन दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए, जबकि 22,100 स्टेशन चारपहिया वाहनों के लिए होंगे। इसके अलावा, हाईवे और महत्वपूर्ण कॉरिडोर पर बसों और ट्रकों के लिए 1,800 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।
फास्ट चार्जिंग स्टेशन के लिए 2000 करोड़ की सब्सिडी
केंद्र सरकार ने पीएम ई-ड्राइव स्कीम के तहत देशभर में फास्ट इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी आवंटित की है। यह स्कीम मार्च 2026 तक मान्य रहेगी। भारी उद्योग मंत्रालय ने सभी राज्यों को दिशानिर्देश जारी कर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान किया है।
चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह महत्वपूर्ण है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 40-60 वर्गमीटर, कारों के लिए 60 वर्गमीटर, और बसों के लिए 300 वर्गमीटर जगह की जरूरत होगी। राज्यों की स्थानीय निकायें स्थान आवंटन और नियम सुनिश्चित करेंगी, जबकि बिजली मंत्रालय आवश्यक बिजली सप्लाई करेगा। पंजाब और बंगाल जैसे राज्यों ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे फास्ट चार्जिंग स्टेशन की योजना को जल्द लागू किया जा सके।
इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर के लिए 40 शहरों की सूची तैयार
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 40 प्रमुख शहरों की पहचान की है। इन शहरों का चयन उनकी सड़कों पर मौजूद इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर की संख्या के आधार पर किया गया है। इस सूची में दिल्ली सबसे ऊपर है, जबकि जोधपुर और उदयपुर अंतिम स्थान पर हैं।
इसके साथ ही, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCP) के तहत आने वाले 131 अन्य शहरों को भी इस पहल में शामिल किया गया है। ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए इन शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या एक महत्वपूर्ण मानदंड होगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री में तेज़ी से बढ़ती डिमांड निवेशकों के लिए नए अवसर ला रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन से जुड़े स्टार्टअप और कंपनियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। दोपहिया और चारपहिया EV की बढ़ती बिक्री, इलेक्ट्रिक ट्रकों और बसों का आगमन, और बड़े शहरों में EV की स्वीकार्यता निवेशकों के लिए उच्च संभावनाएं प्रस्तुत करती है।
इसके अलावा, EV से जुड़े शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में स्वदेशी तकनीक पर जोर देने वाली फर्मों लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे में, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में निवेश करना भविष्य की संभावनाओं को भुनाने का एक बेहतरीन अवसर हो सकता है।
भविष्य की बातें
भारत सरकार ने 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी को 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी निर्माण, और स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही, इस साल के अंत तक सड़कों पर इलेक्ट्रिक ट्रक भी दिख सकते हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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