भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह इंडस्ट्री न केवल लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है, बल्कि देश की इंडस्ट्रियल प्रगति में भी अहम भूमिका निभाती है। भारतीय फुटवियर मार्केट, जो समय के साथ फैशन, तकनीक और कंस्यूमर की बदलती प्राथमिकताओं के साथ विकसित हुई है, अब दुनिया के सबसे बड़े फुटवियर उत्पादकों में से एक है।
इस आर्टिकल में, हम भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री का विस्तृत विश्लेषण करेंगे, जिसमें इसकी वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ, विकास की संभावनाएँ, और निवेश के अवसर शामिल होंगे।
भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री का वर्तमान परिदृश्य
भारत का फुटवियर इंडस्ट्री न केवल देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह भारतीय लेदर इंडस्ट्री के विकास का इंजन भी है। भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश है, और इसका ग्लोबल फुटवियर उत्पादन में 13% हिस्सा है। चीन की हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत है।

इसके अलावा, ग्लोबल निर्यात का 2.2% हिस्सा रखता है। भारत दुनिया का नौवां सबसे बड़ा फुटवियर निर्यातक है। DGCIS के अनुसार, भारत का फुटवियर निर्यात FY21 में 1.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर FY24 में 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है।
इसके साथ ही, भारत हर साल लगभग 2,209 मिलियन यूनिट्स फुटवियर का उत्पादन करता है, जबकि चीन सालाना 14,200 मिलियन यूनिट्स का उत्पादन करता है। भारतीय फुटवियर मार्केट में कैज़ुअल फुटवियर का दबदबा है, जो कुल फुटवियर रिटेल मार्केट का लगभग दो-तिहाई हिस्सा बनाता है। इसके अलावा, भारतीय फुटवियर मार्केट में पुरुषों के फुटवियर का हिस्सा 58% है। नॉन-लेदर फुटवियर मार्केट का 56% हिस्सा है।
फुटवियर इंडस्ट्री के सामने चुनौतियाँ और समस्याएं
हालांकि, भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। प्रमुख समस्याओं में 70% इंडस्ट्री का असंगठित होना, नकली प्रोडक्ट्स की बढ़ती समस्या, ब्रांडिंग की कमी, और मार्जिन के कमी आदि शामिल हैं। इसके अलावा, इंडस्ट्री में जटिल इन्वेंटरी मैनेजमेंट भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
फुटवियर इंडस्ट्री की अधिकतम प्रतिस्पर्धा और कम मार्जिन ने इसे संगठित करने की जरूरत को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। साथ ही, चीन और अन्य कम लागत वाले मार्केट्स से प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती है। चीन से कम दरों पर आयात होने के कारण भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है। भारत के कुल फुटवियर आयात का 38.2% हिस्सा चीन से आता है, जबकि भारतीय फुटवियर का निर्यात मुख्य रूप से USA, UAE और नीदरलैंड को होता है।
फुटवियर इंडस्ट्री में वृद्धि के प्रमुख कारक
भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री की ग्रोथ के कई कारक हैं। इनमें शहरीकरण, प्रीमियम फुटवियर की डिमांड में वृद्धि, मिलेनियल्स की बदलती प्राथमिकताएं, और तकनीकी डेवलपमेंट्स शामिल हैं। इसके अलावा, 2030 तक भारत की जनसंख्या लगभग 150 करोड़ होने की उम्मीद है, जो देश में फुटवियर की डिमांड को बढ़ावा देगी।
इसके अलावा, बढ़ती आय और क्रय शक्ति के साथ, लोग प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर अधिक खर्च करने के लिए तैयार हैं। प्रीमियमाइजेशन पर जोर देने से प्रीमियम फुटवियर मार्केट का हिस्सा FY21 के 47% से बढ़कर FY25 तक 49% की उम्मीद है।
फुटवियर इंडस्ट्री में सरकार की पहलें
‘मेक इन इंडिया’ अभियान डोमेस्टिक प्रोडक्शन को प्रोत्साहित करता है और भारत को ग्लोबल प्रोडक्शन हब के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है, और यह अभियान फुटवियर इंडस्ट्री में डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देने में अहम् भूमिका निभा रहा है।
इकोनॉमिक सर्वे 2023-24 के अनुसार, लेदर और फुटवियर सेक्टर को विदेशी व्यापार नीति 2023 के तहत निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का अवसर मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव्स (MAI) स्कीम, ट्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर एक्सपोर्ट स्कीम (TIES), और ब्याज समानीकरण योजना (Interest Equalisation Scheme/ IES) जैसी योजनाओं के माध्यम से भी सेक्टर को कई लाभ मिल सकते हैं। ये पहलें इंडस्ट्री की वृद्धि और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री में निवेशकों के लिए कई संभावनाएं हैं। प्रमुख कंपनियों में रिलैक्सो, बाटा इंडिया, और लिबर्टी शूज़ शामिल हैं, जो भारतीय स्टॉक एक्सचेंज जैसे कि NSE और BSE पर लिस्टेड हैं।
रिलैक्सो फुटवियर लिमिटेड: रिलैक्सो भारत की सबसे बड़ी फुटवियर निर्माता कंपनी है। यह कंपनी मात्रा के हिसाब से सबसे बड़ी और राजस्व के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी फुटवियर निर्माता है। 350+ स्टोर्स के साथ यह कंपनी अपने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए जानी जाती है।
बाटा इंडिया लिमिटेड: बाटा इंडिया की शुरुआत 1931 में कलकत्ता में बाटा शू के रूप में हुई थी। यह कंपनी विशेष रूप से अपने डिजिटलाइजेशन और ई-कॉमर्स के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँच बढ़ाने में अग्रणी है।
लिबर्टी शूज़ लिमिटेड: इसकी स्थापना 1954 में हरियाणा के करनाल में पाल बूट हाउस के रूप में हुई थी। इसके साथ ही 2023 में ₹656 करोड़ के टर्नओवर के साथ, फुटवियर इंडस्ट्री में हाई क्वॉलिटी और इनोवेटिव प्रोडक्ट्स के लिए प्रसिद्ध है।
भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री का भविष्य
इकोनॉमिक सर्वे 2023-24 के अनुसार, वर्तमान में भारतीय फुटवियर मार्केट की वैल्यू 26 बिलियन डॉलर है, और 2030 तक इसके 90 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही, 1lattice की रिपोर्ट के अनुसार, FY25 से FY28 के बीच 11% की CAGR ग्रोथ के साथ यह मार्केट FY28 तक ₹190.9 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।

इसके अलावा, भविष्य में भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री के लिए संभावनाएं बहुत ही उज्ज्वल हैं। अनुमानित है कि 2030 तक भारत की जनसंख्या लगभग 150 करोड़ हो जाएगी, जो फुटवियर की डिमांड को और अधिक बढ़ावा देगी। इसके साथ ही, मिलेनियल्स और जनरेशन Z की बदलती प्राथमिकताओं, जैसे कि आराम और फैशन, ने इस इंडस्ट्री में नई संभावनाओं को जन्म दिया है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर