भारत वर्तमान में ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच अपनी आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। पश्चिम एशिया संकट और बढ़ते क्रूड ऑयल दबाव के बीच सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर फॉरेक्स रिजर्व की रक्षा करने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के कुछ दिन बाद यह कदम उठाया गया है।
आइए जानें कि अगर भारत गोल्ड इम्पोर्ट पर सख्ती करता है तो अर्थव्यवस्था, प्राइस और आम नागरिक पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
क्या है मामला?
भारत सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है, जबकि प्लैटिनम आयात पर ड्यूटी 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दी गई है। इसके साथ ही गोल्ड-सिल्वर डोरी, कॉइन्स और अन्य संबंधित प्रोडक्ट्स पर भी टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव किए गए हैं। सरकार ने 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है, जिससे कुल प्रभावी आयात टैक्स 15% हो गया है। यह कदम पीएम मोदी की उस अपील के तुरंत बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने नागरिकों से कम से कम एक साल तक गोल्ड खरीदना टालने की बात कही थी।

भारत अपनी लगभग पूरी गोल्ड डिमांड आयात से पूरी करता है और FY26 में गोल्ड आयात $71.98 बिलियन तक पहुंच गया, जो देश के कुल आयात बिल का करीब 9-10% हिस्सा है। क्रूड ऑयल के बाद गोल्ड भारत का दूसरा सबसे बड़ा आयात गुड्स बन चुका है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संकट के कारण फॉरेक्स रिजर्व और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव बढ़ रहा है, सरकार अनावश्यक गोल्ड आयात को कम करके डॉलर बचाने और रुपये को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है।
गोल्ड की प्राइस पर क्या असर पड़ेगा?
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद भारत में गोल्ड और सिल्वर तुरंत महंगे हो गए हैं। MCX पर गोल्ड और सिल्वर की प्राइस में 6% से ज्यादा की तेजी देखी गई। 15 मई 2026 को 24 कैरेट गोल्ड की कीमत करीब ₹16,009 प्रति ग्राम यानी लगभग ₹1,60,090 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। पहले 6% कस्टम ड्यूटी पर ₹1,60,090 के गोल्ड पर करीब ₹9,605 ड्यूटी लगती थी, जो नई 15% ड्यूटी के बाद बढ़कर लगभग ₹24,014 हो गई है। यानी सिर्फ कस्टम ड्यूटी बढ़ने से ही गोल्ड की लैंडेड कॉस्ट करीब ₹14,409 बढ़ गई, जिसमें GST, ज्वेलर मार्जिन और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं।
इसी तरह, सिल्वर की कीमत करीब ₹2,90,000 प्रति किलो मानें तो पहले 6% कस्टम ड्यूटी पर करीब ₹17,400 ड्यूटी लगती थी, जो अब 15% ड्यूटी के बाद बढ़कर ₹43,500 हो गई है। यानी सिल्वर पर भी केवल ड्यूटी बढ़ने से लैंडेड कॉस्ट करीब ₹26,100 प्रति किलो बढ़ गई।
सरकार का उद्देश्य केवल प्राइस बढ़ाना नहीं, बल्कि गोल्ड की डिमांड को नियंत्रित करना भी है। भारत में गोल्ड खरीदना केवल निवेश नहीं बल्कि शादी, त्योहार और परंपराओं से भी जुड़ा है। ऐसे में अधिक प्राइस निवेश खरीद को कम करेंगी, जबकि पीएम मोदी की अपील लोगों को गैर-जरूरी खरीद टालने के लिए प्रेरित करेगी।
अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा गोल्ड आयात करता है, जिससे बड़ी मात्रा में डॉलर देश से बाहर जाते हैं। सरकार मानती है कि यदि गोल्ड आयात 30-40% भी घटता है, तो सालाना $20-25 बिलियन तक की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है। इससे फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव कम होगा, करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) नियंत्रित रहेगा और रुपये को सपोर्ट मिलेगा। साथ ही सरकार रीसाइक्लिंग और घरेलू वैल्यू चेन को भी बढ़ावा देना चाहती है, इसलिए रिकवरी और रीसाइक्लिंग कैटेगरी पर रियायती ड्यूटी रखी गई है।
हालांकि, NDTV के अनुसार, इंडस्ट्री के कुछ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अधिक ड्यूटी के कारण फिर से स्मगलिंग और ग्रे मार्केट बढ़ सकते हैं। ड्यूटी गैप बढ़ने पर पड़ोसी देशों के जरिए अवैध गोल्ड सप्लाई और कैश ट्रांजैक्शन बढ़ने का खतरा रहता है। ज्वेलर्स और बुलियन ट्रेडर्स को भी कम डिमांड और बढ़ती इन्वेंट्री कॉस्ट का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी सरकार का साफ संदेश है कि मौजूदा ग्लोबल संकट के समय भारत के डॉलर बचाना प्राथमिकता है और अनावश्यक गोल्ड आयात को सीमित करना जरूरी हो गया है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से फिजिकल गोल्ड महंगा हो गया है, जिससे निवेशकों का रुझान अब गोल्ड ETF, डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स जैसे विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, मार्च तिमाही में भारत के गोल्ड ETFs में 186% YoY की रिकॉर्ड बढ़ोतरी और 20 मीट्रिक टन का इनफ्लो देखा गया, जो पेपर गोल्ड की बढ़ती लोकप्रियता दिखाता है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है, इसलिए अधिक प्राइस और बढ़ी ड्यूटी डोमेस्टिक डिमांड को धीमा कर सकती हैं। शॉर्ट टर्म में ज्वेलरी और बुलियन कारोबार, संबधित स्टॉक्स पर दबाव रह सकता है है, लेकिन लंबे समय में CAD में सुधार और रुपये की मजबूती से निवेश माहौल बेहतर हो सकता है।
भविष्य की बातें
GTRI के अनुसार, भारत का गोल्ड बार आयात 2022 के $36.5 बिलियन से बढ़कर 2025 में $58.9 बिलियन तक पहुंच गया, जिसमें UAE की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से भारत-UAE फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत दिए गए टैरिफ लाभों की समीक्षा की डिमांड भी तेज हो रही है।
सरकार का फोकस फिलहाल फॉरेक्स बचाने और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को नियंत्रित करने पर है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी नागरिकों से आयात आधारित खर्च कम करने की अपील की है, क्योंकि मिडिल ईस्ट तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी अनिश्चितता वैश्विक सप्लाई चेन और क्रूड ऑयल बाजार को प्रभावित कर रही है।
हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट संकट और हाई क्रूड ऑयल दाम बने रहेंगे, तब तक गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी ऊंची रह सकती है। इससे गोल्ड की डिमांड वॉल्यूम के लिहाज से 10-15% तक घट सकती है, जबकि उपभोक्ता हल्के वजन की ज्वेलरी की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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