भारत का ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन अपने एक बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सफलता के साथ कई नई और जटिल चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अगस्त 2025 तक, इस पहल ने भारत को फॉरेन एक्सचेंज में 1.44 लाख करोड़ रुपये बचाने में मदद की है और लगभग 245 लाख मीट्रिक टन क्रूड ऑयल के आयात को प्रतिस्थापित किया है।
31 जनवरी 2026 तक भारत ने 19.98% इथेनॉल ब्लेंडिंग का आंकड़ा छू लिया है, जो E20 लक्ष्य के लगभग बराबर है। आइए समझते है कि कैसे तेजी से बढ़ते इस सेक्टर में अब डिमांड से अधिक सप्लाई की स्थिति बन गई है, जिससे पूरी इंडस्ट्री के सामने नए सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है मामला?
भारत की 50,000 करोड़ रुपये की ग्रीन फ्यूल इंडस्ट्री वर्तमान में एक बड़े सप्लाई संकट का सामना कर रही है। देश में इथेनॉल उत्पादन की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी लगभग 20 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है और जल्द ही 4 बिलियन लीटर की अतिरिक्त कैपेसिटी शुरू होने वाली है। इसके विपरीत, मौजूदा E20 नीति के तहत वर्तमान इथेनॉल वर्ष में डिमांड केवल 11 बिलियन लीटर अनुमानित है। इस वजह से सिस्टम में 50% से अधिक एक्सेस कैपेसिटी जमा हो गई है।
नतीजतन, डिस्टिलरीज अपनी कैपेसिटी का केवल 25 से 30% ही उपयोग कर पा रही हैं और नए प्लांट्स की मंजूरी रोक दी गई है। वर्ष 2024 से 2025 के दौरान लगभग 100 नई डिस्टिलरीज ने काम करना शुरू किया था, लेकिन अब डिमांड न होने से संकट गहरा गया है। इंडस्ट्री E27, E85 या E100 जैसे उच्च ब्लेंड्स या डीजल ब्लेंडिंग के स्पष्ट रोडमैप का इंतजार कर रहा है, ताकि इस कैपेसिटी का पूरा उपयोग किया जा सके।
फीडस्टॉक में बदलाव
इथेनॉल उत्पादन में फीडस्टॉक का समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है। अब ग्रेन-बेस्ड (अनाज आधारित) फीडस्टॉक कुल सप्लाई का लगभग 69% हिस्सा बनाते हैं, जिसमें अकेले मक्के (कॉर्न) का योगदान 50% के करीब है। वहीं, गन्ने पर आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी घटकर लगभग 31% रह गई है। सरकारी नीतियों ने मक्के को बहुत बढ़ावा दिया है, जिससे FY22 और FY25 के बीच मक्के से बने इथेनॉल की प्राइस में सालाना 11.7% की वृद्धि हुई है।
इसके प्रभाव से मक्के के उत्पादन में 8.77% और खेती के रकबे में 6.68% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। FY16 के बाद से मक्के की पैदावार 48% उछलकर FY25 तक 3.78 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।
इथेनॉल सेक्टर में रफ्तार थमी
इथेनॉल इंडस्ट्री सरकार की नीतियों और शुरुआती उत्साह से ₹50,000 करोड़ के स्तर तक पहुंच गई, लेकिन ब्लेंडिंग 20% पर अटकने से बड़ी चुनौती पैदा हो गई है। डिस्टिलरीज़ ने लगभग 20 बिलियन लीटर क्षमता खड़ी कर ली, पर ऑइल कंपनियों द्वारा कम ऑफटेक के कारण क्षमता खाली है और इन्वेंटरी बढ़ रही है। 2024-25 में लगभग 100 नई डिस्टिलरीज़ शुरू हुईं, लेकिन मांग उसी गति से नहीं बढ़ी, जिससे निवेश की व्यवहार्यता पर दबाव है।
उच्च ब्लेंडिंग (E27, E85, E100) और डीज़ल ब्लेंडिंग पर सरकार की स्पष्ट नीति न होने से अनिश्चितता और बढ़ी है। डीज़ल के साथ इथेनॉल प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता, और मिश्रण की स्थिरता, इंजन की क्षमता और लॉन्गटर्म प्रदर्शन पर गंभीर तकनीकी चुनौतियाँ हैं।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
एक समय में निवेशकों का पसंदीदा रहा यह सेक्टर अब मार्जिन स्क्वीज के दौर से गुजर रहा है। कैपेसिटी यूटिलाइजेशन का 25 से 30% पर आ जाना और 50% एक्सेस कैपेसिटी का निर्माण, डिस्टिलरीज की बैलेंस शीट पर भारी दबाव डाल रहा है। जब तक सरकार 20% से आगे के ब्लेंडिंग टारगेट्स की घोषणा नहीं करती, तब तक अंडरयूटिलाइज्ड प्लांट्स का आर्थिक जोखिम बना रहेगा।
इसके अलावा, जो निवेशक लॉन्ग टर्म नजरिया रखते हैं, उनके लिए यह सप्लाई ग्लट एक स्ट्रक्चरल अपॉर्चुनिटी बन सकता है, बशर्ते सरकार भविष्य में डीजल ब्लेंडिंग या फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स को कमर्शियलाइज करने के लिए टैक्स हॉलिडे या नए इंसेंटिव्स प्रदान करे।
भविष्य की बातें
इथेनॉल इंडस्ट्री का भविष्य अब केवल टारगेट्स हासिल करने पर नहीं, बल्कि इस विशाल स्केल को सस्टेनेबल तरीके से मैनेज करने पर निर्भर करता है। 20 बिलियन लीटर की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी और 4 बिलियन लीटर की आगामी कैपेसिटी का सदुपयोग करने के लिए, पॉलिसीमेकर्स को कंज्यूमर्स और ऑटोमेकर्स की तकनीकी चिंताओं का समाधान करना होगा।
E27 या E30 की ओर बढ़ने से पहले, पुरानी गाड़ियों के इंजनों की कम्पैटिबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, एग्रीकल्चर सेक्टर में फ्यूल और फूड सिक्योरिटी के बैलेंस को साधना अत्यंत आवश्यक है ताकि दलहन और तिलहन का उत्पादन प्रभावित न हो। यदि सरकार स्पष्ट लॉन्ग टर्म नीतियों, स्टेबल डिमांड सिग्नल्स और कंज्यूमर्स के लिए उचित प्राइसिंग मॉडल्स पर काम करती है, तो यह ग्रीन फ्यूल सेक्टर अपना मोमेंटम वापस पा सकता है। जो निवेशक इस बदलाव के बीच सही समय का इंतजार करेंगे, वे लंबी अवधि में लाभान्वित हो सकते हैं, बशर्ते निवेश पूर्ण रिसर्च के बाद ही किया जाए।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।
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