भारतीय शेयर बाजार में SEBI ने हाल ही में स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने के लिए एक नई प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाना और क्लोजिंग प्राइस को और अधिक सटीक बनाना है। आइए, इस प्रस्ताव को विस्तार से समझें।
क्या है मामला?
SEBI ने 5 दिसंबर 2024 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है जिसमें स्टॉक मार्केट में ‘क्लोज़ ऑक्शन सेशन’ (CAS) की प्रक्रिया को लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इस नई प्रक्रिया के तहत, सामान्य ट्रेडिंग घंटे समाप्त होने के बाद 15:30 से 15:45 के बीच 15 मिनट का एक विशेष सेशन आयोजित होगा। इस दौरान निवेशक खरीद और बिक्री के ऑर्डर देकर स्टॉक का क्लोजिंग प्राइस तय करेंगे।
अभी तक भारत में, स्टॉक का क्लोजिंग प्राइस लास्ट 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर निर्धारित किया जाता है। SEBI का मानना है कि यह प्रक्रिया सभी मार्केट स्थितियों को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करती है, खासकर जब मार्केट अत्यधिक वोलैटिलिटी के दौर से गुजर रहा होता है।
सेबी का CAS प्रस्ताव
SEBI ने ‘क्लोज़ ऑक्शन सेशन’ (CAS) को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव दिया है। प्रारंभिक चरण में इसे केवल उन्हीं स्टॉक्स पर लागू किया जाएगा जिनके पास डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स हैं, ताकि पर्याप्त तरलता सुनिश्चित की जा सके। समय के साथ, इसे अन्य स्टॉक्स तक भी विस्तारित किया जा सकता है।

या फिर,

थ्री-सेशन स्ट्रक्चर नॉ कैंसलेशन की अवधि को हटा देती है और प्री-ओपन सेशन की कॉल ऑक्शन प्रक्रिया के साथ अधिक तालमेल बैठाती है।
यह प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?
क्लोजिंग प्राइस किसी भी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण डेटा पॉइंट होती है। यह न केवल अगले दिन की ट्रेडिंग के लिए संदर्भ प्रदान करती है, बल्कि फंड मैनेजर्स, निवेशक और एनालिस्ट द्वारा स्टॉक का आकलन करने के लिए भी उपयोग किया जाती है। वर्तमान प्रणाली में कई बार देखा गया है कि क्लोजिंग प्राइस मार्केट की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती है, जिससे निवेशकों को गलत संकेत मिल सकते हैं।
नए क्लोज ऑक्शन सेशन से यह समस्या हल होने की संभावना है। यह प्रक्रिया मार्केट में क्लोजिंग प्राइस निर्धारण को पारदर्शी बनाएगी और निवेशकों को अधिक सटीक डेटा प्रदान करेगी।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
मनी कंट्रोल के अनुसार, भारत में वर्तमान में क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण पिछले आधे घंटे के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय पैसिव फंड हाउस ने इसे लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया कई स्टॉक्स में प्राइस वोलैटिलिटी को बढ़ा सकती है और बड़े ऑर्डर्स के पूरे न होने का जोखिम भी पैदा करती है।
यह समस्या उन दिनों में और गंभीर हो जाती है जब बड़े इवेंट्स होते हैं, जैसे इंडेक्स रीबैलेंसिंग और डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन। इससे पैसिव फंड्स के ट्रैकिंग डिफरेंस में भी इजाफा होता है, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
भविष्य की बातें
नए ‘क्लोज ऑक्शन सेशन’ प्रस्ताव के साथ, SEBI ने भारतीय इक्विटी मार्केट में सुधार की एक और पहल की है। इसके लिए, SEBI ने ‘क्लोज़ ऑक्शन सेशन’ (CAS) प्रस्ताव पर जनता से सुझाव मांगे हैं। यह फीडबैक डिज़ाइन और कार्यान्वयन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करेगा, ताकि यह मार्केट के सभी प्रतिभागियों के लिए प्रभावी साबित हो सके। सुझाव देने की अंतिम तारीख 26 दिसंबर 2024 निर्धारित की गई है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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