SEBI का प्रस्ताव, रिटेल निवेशकों को भी मिलेगा डायरेक्ट मार्केट एक्सेस

SEBI का प्रस्ताव, रिटेल निवेशकों को भी मिलेगा डायरेक्ट मार्केट एक्सेस
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भारतीय कैपिटल मार्केट तेजी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। इसी दिशा में SEBI ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत डायरेक्ट मार्केट एक्सेस (DMA) की सुविधा सभी श्रेणियों के निवेशकों, खासकर रिटेल निवेशकों, के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है। अभी तक यह सुविधा मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों तक सीमित है। यह प्रस्ताव मार्केट में तेज ऑर्डर एक्सेक्यूशन, अधिक एफिशिएंसी और निवेशकों की व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही, यह स्टॉक एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटरी से जुड़े तकनीकी नियमों में व्यापक बदलाव का हिस्सा है।

आइए समझते है कि SEBI का डायरेक्ट मार्केट एक्सेस (DMA) प्रस्ताव क्या है और यह रिटेल निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है।

क्या है मामला?

SEBI ने जून 22, 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में सुझाव दिया है कि डायरेक्ट मार्केट एक्सेस (DMA) को सभी प्रकार के निवेशकों के लिए खोला जाए। DMA ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए निवेशक ब्रोकर के इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए सीधे स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम में खरीद-बिक्री के ऑर्डर भेज सकते हैं। इसमें ब्रोकर डीलर की मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती, जिससे ऑर्डर एक्सेक्यूशन अधिक तेज और कुशल हो जाता है।

वर्तमान में यह सुविधा केवल संस्थागत निवेशकों के लिए उपलब्ध है। हालांकि, SEBI का मानना है कि तकनीक में हुई प्रगति के कारण उचित रिस्क मैनेजमेंट और सुरक्षा उपायों के साथ इसके लाभ अन्य निवेशक वर्गों तक भी पहुंचाए जा सकते हैं। इसी वजह से एक्सचेंज को विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए DMA उपलब्ध कराने की अधिक स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव रखा गया है।

तकनीकी नियमों में बड़ा बदलाव

SEBI के प्रस्ताव केवल इक्विटी बाजार तक सीमित नहीं हैं। मई 2023 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) में DMA के जरिए भागीदारी की अनुमति दी गई थी और अब इस सुविधा को सभी पात्र निवेशकों तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है। साथ ही, एक्सचेंजों को यह अधिकार देने की योजना है कि वे समय-समय पर तय कर सकें कि किन निवेशक श्रेणियों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।

इसके अलावा, SEBI सिक्योरिटीज और कमोडिटी मार्केटस से जुड़े तकनीकी नियमों को एक समान स्ट्रक्चर में लाने की तैयारी कर रही है। साइबर सुरक्षा, डिजास्टर रिकवरी और सिस्टम ऑडिट जैसी सामान्य IT आवश्यकताओं के लिए अलग सर्कुलर जारी किए जाएंगे। वहीं, इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के लिए SEBI पंजीकरण की अनिवार्यता हटाने का भी सुझाव दिया गया है, जबकि उनके कार्यों की जिम्मेदारी संबंधित ग्राहकों की ही रहेगी।

साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर

प्रस्ताव में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। निश्चित एन्क्रिप्शन मानकों की जगह आधुनिक और मजबूत क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों को अपनाने की बात कही गई है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, बेहतर फायरवॉल नियंत्रण और नेटवर्क सेगमेंटेशन जैसे सुरक्षा उपायों को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, पुरानी और अप्रासंगिक तकनीकी व्यवस्थाओं, जैसे वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (WAP) से जुड़े प्रावधानों को हटाने का सुझाव दिया गया है। सिस्टम ऑडिटर्स की अवधि तीन वर्ष करने और डिजास्टर रिकवरी अभ्यासों के नियमों में कुछ राहत देने का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे अनुपालन प्रक्रिया अधिक आसान और प्रभावी बन सके।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो रिटेल निवेशकों को एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक अधिक सीधी और तेज पहुंच मिलेगी। इससे ऑर्डर एक्सेक्यूशन की गति बढ़ेगी और ट्रेडिंग अनुभव बेहतर हो सकता है। हालांकि, रिस्क मैनेजमेंट और निगरानी की जिम्मेदारी ब्रोकर्स के पास ही रहेगी, जिससे मार्केट की सुरक्षा बनी रहे।

NSE के कैश मार्केट में DMA की हिस्सेदारी मई में बढ़कर 4.7% पर पहुंच गई, जो पिछले नौ महीनों का उच्चतम स्तर है। वहीं, मोबाइल ट्रेडिंग का हिस्सा मई FY27 तक 22.9% तक पहुंच चुका है, जो पांच वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे साफ है कि तकनीक आधारित ट्रेडिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है और DMA का विस्तार रिटेल निवेशकों की भागीदारी को और मजबूत कर सकता है।

भविष्य की बातें

SEBI ने इस प्रस्ताव पर 13 जुलाई 2026 तक पब्लिक कमेंट मांगे हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तय किए जाएंगे। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो रिटेल निवेशकों के लिए मार्केट तक पहुंच बढ़ सकती है और भारतीय फाइनेंशियल मार्केट्स के तकनीकी नियम अधिक सरल और आधुनिक बन सकते हैं। साथ ही, कॉन्ट्रैक्ट नोट, ब्रोकर-क्लाइंट एग्रीमेंट और निवेशक शिकायत निवारण से जुड़े उन प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है, जो पहले से ही स्टॉक ब्रोकर्स के मास्टर सर्कुलर में शामिल हैं। इससे नियमों में दोहराव कम होगा और अनुपालन प्रक्रिया अधिक आसान बन सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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