SEBI ने भारतीय इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) मार्केट के नियमों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। जिसमें SEBI ने बड़े IPO में रिटेल निवेशकों के लिए रिज़र्व हिस्से को कम करने और योग्य QIBs के लिए आवंटन बढ़ाने का सुझाव दिया है। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य बड़े IPOs में अंडरसब्सक्राइब जैसी समस्याओं को दूर करना है।
आइए समझते है कि SEBI के इस प्रस्ताव का क्या मतलब है और अगर यह लागू होता है तो रिटेल निवेशकों को कैसे प्रभावित कर सकता है।
क्या है मामला?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 31 जुलाई 2025 को ₹5,000 करोड़ से अधिक के IPOs के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इनका उद्देश्य संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और रिटेल निवेशकों को न्यूनतम रिज़र्व सुनिश्चित करना है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय स्टॉक मार्केट में IPO का औसत साइज लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, यह देखा गया है कि बड़े साइज के IPO में रिटेल निवेशकों और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की भागीदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है।
उदाहरण के लिए, 5,000 करोड़ रुपये के IPO को पूरी तरह से सब्सक्राइब कराने के लिए लगभग 7-8 लाख रिटेल आवेदकों की आवश्यकता होती है, और 10,000 करोड़ रुपये के IPO के लिए यह संख्या 17.50 लाख तक पहुंच जाती है। कई बार पर्याप्त आवेदन न आने से रिटेल हिस्सा पूरी तरह भर नहीं पाता, जिससे IPO को लेकर मार्केट में नकारात्मक धारणा बनती है।
दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को भी एंकर निवेशक के तौर पर आवंटन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनके अलग-अलग फंड्स को अलग-अलग निवेशक माना जाता है, जिससे निवेशकों की संख्या की सीमा जल्द ही समाप्त हो जाती है। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए SEBI ने यह नए प्रस्ताव पेश किए हैं।
प्रमुख प्रस्तावित परिवर्तन
परामर्श पत्र का सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव बड़े IPO के लिए आवंटन संरचना में बदलाव से संबंधित है। यह प्रस्ताव 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के IPO पर लागू होगा। मौजूदा नियमों के अनुसार, ऐसे IPO में कम से कम 35% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए, 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए और अधिकतम 50% हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs) के लिए रिज़र्व होता है।
लेकिन, SEBI ने प्रस्ताव दिया है कि 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के IPO के लिए रिटेल हिस्से को मौजूदा 35% से घटाकर चरणबद्ध तरीके से न्यूनतम 25% तक लाया जाए।

नोट: अगर रिटेल या NII कोटा अंडरसब्सक्राइब होता है, तो उसे दूसरे निवेशक वर्गों को ट्रांसफर किया जायेगा। इसके साथ ही, ₹5,000 करोड़ से कम इश्यू के IPO के लिए यह नियम लागू नहीं होंगे।
एंकर निवेशकों के लिए प्रस्तावित नियम
SEBI ने एंकर निवेशकों के आवंटन नियमों में भी ढील देने का प्रस्ताव किया है ताकि बड़े ग्लोबल फंड्स की भागीदारी बढ़ाई जा सके। मौजूदा स्ट्रक्चर में, 250 करोड़ रुपये से अधिक के एंकर आवंटन पर प्रत्येक अतिरिक्त 250 करोड़ रुपये के लिए 10 अतिरिक्त निवेशकों की अनुमति है। SEBI ने इसे बढ़ाकर 15 अतिरिक्त निवेशक करने का प्रस्ताव दिया है। इस बदलाव से, उदाहरण के तौर पर, 10,000 करोड़ रुपये के IPO (₹3,000 करोड़ एंकर साइज) में अधिकतम एंकर निवेशकों की संख्या मौजूदा 125 से बढ़कर 180 हो जाएगी।
साथ ही, SEBI ने एंकर निवेशक हिस्से में डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड के साथ-साथ जीवन बीमा कंपनियों (IRDAI पंजीकृत) और पेंशन फंड (PFRDA पंजीकृत) के लिए वर्तमान में, एंकर हिस्से का एक-तिहाई (33%) सिर्फ म्यूचुअल फंड के लिए जो रिज़र्व है उसे बढ़ाकर 40% किया जाएगा। इस 40% में से, 33% हिस्सा डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड के लिए रिज़र्व रहेगा, जबकि अतिरिक्त 7% जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंड के लिए रिज़र्व किया जाएगा। यदि बीमा कंपनियों और पेंशन फंड का 7% हिस्सा पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं होता है, तो बचा हुआ हिस्सा म्यूचुअल फंड को आवंटित कर दिया जाएगा।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
इन प्रस्तावों का असर अलग-अलग निवेशक श्रेणियों पर पड़ेगा। रिटेल निवेशकों के लिए, बड़े IPO में सीधे आवंटन की संभावना कम हो सकती है क्योंकि उनके लिए रिज़र्व कोटा कम हो जाएगा। हालांकि, SEBI का तर्क है कि रिटेल निवेशक तेजी से म्यूचुअल फंड के जरिए मार्केट में निवेश कर रहे हैं। जून 2025 में SIP का मासिक योगदान रिकॉर्ड 27,269 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी को ध्यान में रखते हुए, QIB श्रेणी में नॉन-एंकर हिस्से में म्यूचुअल फंड के लिए रिज़र्व को मौजूदा 5% से बढ़ाकर 15% करने का भी प्रस्ताव है।
इससे रिटेल निवेशकों की इनडायरेक्ट भागीदारी संतुलित होगी। एक 8,000 करोड़ रुपये के IPO के उदाहरण से समझें तो, मौजूदा नियमों के तहत रिटेल निवेशकों की कुल प्रभावी भागीदारी (डायरेक्ट + म्यूचुअल फंड) 3,680 करोड़ रुपये (46%) है, जो प्रस्तावित बदलावों के बाद 3,475 करोड़ रुपये (44%) के आसपास रहेगी।
भविष्य की बातें
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी अभी केवल प्रस्ताव हैं और SEBI ने इस पर 21 अगस्त 2025 तक विभिन्न प्रतिक्रिया मांगी है। जनता से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम बनाए जाएंगे। ये प्रस्तावित बदलाव भारतीय कैपिटल मार्केट के बदलते लैंडस्केप को दर्शाते हैं, जहां IPO का साइज बढ़ रहा है और निवेशकों का व्यवहार भी विकसित हो रहा है। हालांकि, इसका अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि मार्केट सहभागी इन बदलावों को कैसे अपनाते हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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