सेबी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस प्रस्ताव के तहत निवेशकों को ₹250 की न्यूनतम राशि से SIP शुरू करने की सुविधा मिलेगी। यह पहल उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं या छोटी राशि के साथ निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं। सेबी का मानना है कि यह कदम म्यूचुअल फंड मार्केट की पहुंच को और व्यापक बनाएगा और अधिक से अधिक लोगों को इस निवेश करने के लिए प्रेरित करेगा।
आइए समझते है कि सेबी की यह पहल क्या है और यह निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है।
क्यों आई यह जरूरत?
AMFI के अनुसार, FY 2016-17 में निवेशकों का म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में SIP के जरिये योगदान सिर्फ 43,921 करोड़ रुपये था, जो FY 2024-25 (दिसंबर तक) में बढ़कर 2,11,027 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा, मई 2014 में पहली बार म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹10 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया था। समय के साथ यह इंडस्ट्री तेजी से बढ़ती गयी और 31 दिसंबर 2024 तक इसका AUM ₹66.93 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय निवेशकों का भरोसा म्यूचुअल फंड में लगातार बढ़ रहा है।

पिछले चार वर्ष से भी कम समय में निवेशकों का SIP योगदान लगभग दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
सेबी का मानना है कि ₹250 जैसी छोटी राशि से SIP शुरू करने की सुविधा उन निवेशकों के लिए फायदेमंद होगी जो कम आय वर्ग में आते हैं या पहली बार निवेश करने की योजना बना रहे हैं।
सेबी के प्रस्ताव की मुख्य विशेषताएँ
सेबी ने 22 जनवरी 2025 को कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसके अनुसार, निवेशक न्यूनतम ₹250 प्रति माह से SIP शुरू कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा अधिकतम तीन अलग-अलग एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) तक ही सीमित होगी। वर्तमान में कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियाँ छोटी राशि की SIP प्रदान करती हैं, लेकिन सेबी के इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह सुविधा पूरे इंडस्ट्री में उपलब्ध हो सकेगी।
इस नई SIP को केवल ग्रोथ ऑप्शन के तहत पेश किया जाएगा और इसे इक्विटी तथा हाइब्रिड फंड्स में निवेश के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, डेब्ट फंड, स्मॉल-कैप, मिड-कैप, सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स के लिए यह सुविधा नहीं दी जाएगी। SIP के भुगतान के लिए केवल NACH (नेशनल ऑटोमेटेड क्लीयरिंग हाउस) और UPI ऑटोपे मोड ही उपलब्ध होंगे, जिससे निवेश प्रक्रिया को आसान और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
नए निवेशकों के लिए आसान KYC प्रक्रिया
सेबी ने नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए KYC प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। प्रस्ताव के अनुसार, ₹50,000 तक के कुल निवेश के लिए PAN की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे निवेशकों के लिए आधार कार्ड के माध्यम से PAN एक्सेम्पटेड KYC रिफरेंस नंबर (PEKRN) जारी किया जाएगा, जिससे उन्हें बिना अतिरिक्त दस्तावेज़ी प्रक्रिया के निवेश करने की सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा, AMCs को यह निर्देश दिया गया है कि वह निवेशकों के लिए KYC शुल्क को अपने इन्वेस्टर एजुकेशन फंड से वहन करें, ताकि छोटे निवेशकों के लिए इस प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बनाया जा सके।
डिस्ट्रीब्यूटर्स और प्लेटफॉर्म्स को प्रोत्साहन
छोटी SIP को लोकप्रिय बनाने के लिए सेबी ने डिस्ट्रीब्यूटर्स और एक्सीक्यूशन ओनली प्लेटफॉर्म्स (EOPs) को प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई है। इसके तहत, यदि कोई डिस्ट्रीब्यूटर किसी नए निवेशक को इस योजना में शामिल कराता है और वह निवेशक कम से कम 24 महीने तक SIP जारी रखता है, तो डिस्ट्रीब्यूटर्स को ₹500 का प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह प्रोत्साहन केवल पहले SIP के लिए लागू होगा और यह राशि निवेशक शिक्षा और जागरूकता प्रोग्राम्स के लिए बनाए गए फंड से दी जाएगी।
भविष्य की बातें
SEBI के अनुसार, छोटी राशि की SIP मुख्य रूप से मासिक निवेश के लिए होगी, लेकिन ट्रांजेक्शन की लागत कम करने और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के लिए ब्रेक-ईवन समय घटाने के उद्देश्य से SIP हर 15 दिन में निवेश का विकल्प भी जोड़ा जा सकता है।
कंसल्टेशन पेपर में निवेशकों के लिए 5 साल या 60 किस्तों तक निवेश जारी रखने की सिफारिश की गई है, लेकिन यदि कोई निवेशक समय से पहले SIP बंद करना चाहता है या पैसा निकालना चाहता है, तो उस पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। निवेशक इस प्रस्ताव पर अपने सुझाव 6 फरवरी 2025 तक SEBI को भेज सकते हैं।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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