क्या है चांदी की कीमतों में वृद्धि का राज?

क्या है चांदी की कीमतों में वृद्धि का राज?
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पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में काफी उछाल देखा जा रहा है, जो कि डोमेस्टिक के साथ ही और ग्लोबल स्तर पर भी देखा जा रहा है। डोमेस्टिक मार्केट में चांदी ने ₹1 लाख प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में यह 12 साल के उच्चतम स्तर $34 प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गई है।

आइए देखे, कि भविष्य में चांदी में निवेश के लिए कैसा हो सकता है और वर्तमान में चांदी की कीमत बढ़ने के पीछे क्या वजह है।

क्या है मामला?

साल 2024 की शुरुआत से ही चांदी की कीमतों में लगभग $10 प्रति औंस की बढ़त हुई है। इसके कई कारण रहे है जैसे कि वेस्ट एशिया में बढ़ते जिओपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती। ये सभी फैक्टर्स चांदी की कीमत को मजबूती दे रहे हैं। इसके साथ ही चांदी ने भी सोने की तरह ही अपने सुरक्षित निवेश का गुण भी सिद्ध किया है, जो निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है।

हालांकि, त्योहारों के खर्चों के चलते यह उछाल देखने को मिल रहा है, और एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। उम्मीद की जा रही है कि यह साल के अंत तक COMEX पर $40 प्रति औंस तक पहुंच सकती है और पुराने रिकॉर्ड के करीब, $50 प्रति औंस तक भी जा सकता है जो आखिरी बार अप्रैल 2011 में देखा गया था।

भारत में चांदी के ऐतिहासिक दाम और उन पर असर डालने वाली घटनाएं

भारत में चांदी की प्राइस समय के साथ कई आर्थिक और ग्लोबल इवेंट्स के कारण उतार-चढ़ाव का सामना करते रहे हैं। 2008 के आर्थिक संकट के दौरान चांदी की प्राइस में बड़ी गिरावट देखी गई थी, लेकिन इसके बाद प्राइस में तेजी से वृद्धि हुई। 2011 में ग्लोबल आर्थिक अस्थिरता के चलते चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया, जिससे निवेशकों ने इसे एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखा।

इसी तरह, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी चांदी की प्राइस तेजी से बढ़ी क्योंकि निवेशकों ने इसे सुरक्षित निवेश का माध्यम माना। अगर हम इतिहास की बात करें तो भारत में चांदी की प्राइस सन 1981 के समय ₹2715 प्रति किलो से बढ़कर 2010 में ₹27,255 प्रति किलो और 2020 में ₹63,435 प्रति किलो तक पहुंच गया। इन प्रमुख घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक अस्थिरता के दौर में चांदी के दामों में उछाल आ देखने को मिलता है।

चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सितंबर 2023 में, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने चार साल में पहली बार ब्याज दरों में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की, जिससे सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की कीमतें बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही, 2025 तक और भी कटौती की संभावना जताई गई है। वहीं, चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए प्रोत्साहन उपाय किए हैं, जिससे चांदी जैसे इंडस्ट्रियल धातुओं की मांग बढ़ रही है। चीन विश्व का सबसे बड़ा चांदी आयातक है, और इसके आर्थिक सुधार से चांदी की इंडस्ट्रियल मांग में इजाफा होने की संभावना है।

हालांकि, सप्लाई में कमी और माइनिंग इंडस्ट्री की चुनौतियों के चलते वर्ल्ड सिल्वर सर्वे 2024 के अनुसार, 2023 में ग्लोबल चांदी की कमी 184.3 मिलियन औंस थी, जो 2024 में 215 मिलियन औंस तक बढ़ सकती है। इंडस्ट्रियल डिमांड भी बढ़ रही है, खासकर फोटोवोल्टिक और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर्स में, जहां इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

वर्तमान परिदृश्य में चांदी निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन कर उभर रही है। इस वर्ष, जहां सोने ने लगभग 32% की वृद्धि दर्ज की है, वहीं चांदी ने 42% तक का उछाल दिखाया है। इसके साथ ही, मार्केट जिओपॉलिटिकल तनाव के चलते आए करेक्शन के कारण शेयर बाजार की तुलना में चांदी ने बेहतर रिटर्न दिए हैं।

भविष्य की बातें

चांदी की कीमतों में तेजी आने वाले समय में भी जारी रह सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड, चीनी प्रोत्साहन पैकेज, और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से चांदी की कीमतों को समर्थन मिलता रहेगा। अगले कुछ महीनों में अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और कटौती करता है, तो यह चांदी के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं जैसे चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा कारण इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहना है। चांदी की कीमतें अक्सर डिमांड और सप्लाई, सरकार की पॉलिसी, ग्लोबल आर्थिक स्थिति, डॉलर के प्राइस और इंडस्ट्रियल डिमांड के आधार पर बदलती रहती हैं, जिससे यह निवेश अस्थिर हो सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के अनुसार, मध्यम से लॉन्गटर्म अवधि में चांदी सोने की बराबरी कर सकती है या उससे भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और चांदी की कीमतें अगले 12-15 महीनों में MCX पर ₹1,25,000 प्रति किलोग्राम और COMEX पर $40 प्रति औंस तक पहुंचने की उम्मीद है।

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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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