क्या स्मॉल-कैप शेयर वाकई लॉन्ग-टर्म में ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं?

क्या स्मॉल-कैप शेयर वाकई लॉन्ग-टर्म में ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं?
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भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में स्मॉल-कैप फंड्स अक्सर निवेशकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इन फंड्स की हाई ग्रोथ क्षमता है। निवेशक मानते हैं कि छोटी कंपनियां भविष्य में बड़ी कंपनियों में बदल सकती हैं, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

हालांकि, हाई रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी बढ़ जाता है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि स्मॉल-कैप फंड्स ने लॉन्गटर्म में लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में बहुत ज्यादा अतिरिक्त रिटर्न नहीं दिया है, जबकि इनमें उतार-चढ़ाव काफी अधिक रहा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या अतिरिक्त जोखिम वास्तव में अतिरिक्त रिटर्न के लायक है।

आइए स्मॉल-कैप के प्रदर्शन, जोखिम और लॉन्ग-टर्म निवेश में उनकी भूमिका को विस्तार से समझें और जानें कि क्या ये निवेशकों के लिए सही विकल्प साबित हो सकते हैं।

क्या है मामला?

स्मॉल-कैप फंड्स मुख्य रूप से उन कंपनियों में निवेश करते हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन अपेक्षाकृत कम होता है। इन कंपनियों में तेजी से बढ़ने की क्षमता होती है, लेकिन इनके कारोबार में अनिश्चितता भी ज्यादा होती है।

CRISIL म्यूचुअल फंड स्कोरकार्ड के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में निफ्टी स्मॉलकैप 250 टोटल रिटर्न इंडेक्स ने 12.54% का वार्षिक रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी 100 टोटल रिटर्न इंडेक्स का रिटर्न 11.72% रहा। यानी दो दशकों में अतिरिक्त रिटर्न केवल 0.82% पॉइंट्स का रहा।

दूसरी तरफ जोखिम काफी अधिक रहा। स्मॉल-कैप इंडेक्स की वार्षिक वोलेटिलिटी 28.81% रही, जबकि लार्ज-कैप इंडेक्स की 21.06% रही। इसका मतलब है कि निवेशकों को बेहतर रिटर्न की उम्मीद में कहीं अधिक उतार-चढ़ाव झेलना पड़ा।

मार्केट साइकल्स का भी स्मॉल-कैप प्रदर्शन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। 2014 से 2017 के बुल मार्केट में स्मॉल-कैप्स ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन 2018 से 2020 के दौरान इनका प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। यही कारण है कि स्मॉल-कैप निवेश को केवल पिछले कुछ वर्षों के रिटर्न देखकर नहीं आंका जा सकता।

स्मॉल-कैप निवेश का रिस्क-रिवॉर्ड विरोधाभास

रिपोर्ट के अनुसार, स्मॉल-कैप निवेश का प्रदर्शन काफी हद तक बाजार चक्र पर निर्भर करता है। 2014-17 के बुल रन में स्मॉल-कैप्स ने तीन-वर्षीय रोलिंग आधार पर लार्ज-कैप्स की तुलना में 20.52% तक बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं, 2018-20 के बाजार सुधार के दौरान इनका प्रदर्शन 17.16% तक कमजोर रहा।

इसके अलावा, स्मॉल-कैप्स की वार्षिक वोलेटिलिटी 28.81% रही, जबकि लार्ज-कैप्स की 21.06% थी। यानी निवेशकों को अपेक्षाकृत सीमित अतिरिक्त रिटर्न के लिए काफी अधिक उतार-चढ़ाव और जोखिम झेलना पड़ा। यही वजह है कि रिपोर्ट इसे ‘रिस्क-रिवॉर्ड विरोधाभास’ बताती है, जहां अतिरिक्त रिटर्न हमेशा अतिरिक्त जोखिम की भरपाई नहीं कर पाता।

लॉन्ग-टर्म SIP में स्मॉल-कैप्स की भूमिका

ET वेल्थ-क्रिसिल SIP स्टडी 2026 के अनुसार, लॉन्गटर्म के SIP निवेशकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाता है। स्टडी में पाया गया कि 10 वर्षों के SIP निवेश में घाटे की संभावना लगभग शून्य रही।

स्मॉल-कैप फंड्स ने 20% से अधिक रिटर्न देने की सबसे ज्यादा संभावना दिखाई। हालांकि, छोटी अवधि में परिणाम काफी अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, दो साल की SIP अवधि में लगभग 26% डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न नहीं दे सके।

जैसे-जैसे निवेश अवधि बढ़ती है, बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बढ़ती जाती है। चार वर्षों के बाद 10% से अधिक रिटर्न मिलने की संभावना 80% से ऊपर पहुंच जाती है, जबकि 10 वर्षों में यह लगभग 99% हो जाती है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

स्मॉल-कैप फंड्स निवेशकों को लॉन्गटर्म में बेहतर रिटर्न का अवसर दे सकते हैं, लेकिन इनके साथ धैर्य और अनुशासन भी जरूरी है।

निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश नहीं करना चाहिए। फंड की गुणवत्ता, वैल्यूएशन, पोर्टफोलियो स्ट्रक्चर और फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड पर भी ध्यान देना चाहिए।

SIP के जरिए नियमित निवेश करना स्मॉल-कैप्स में निवेश का अपेक्षाकृत बेहतर तरीका माना जाता है, क्योंकि अध्ययन के अनुसार, 4 साल के बाद 10% से अधिक रिटर्न मिलने की संभावना 80% से ऊपर पहुंच जाती है, जबकि 10 साल की अवधि में लगभग 99% SIP निवेशकों को 10% से अधिक रिटर्न मिला। यह दिखाता है कि इक्विटी निवेश में समय ही सबसे बड़ा साथी होता है।

भविष्य की बातें

रिपोर्ट के अनुसार, स्मॉल-कैप निवेश में केवल लॉन्गटर्म तक बने रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैल्यूएशन और बाजार चक्रों को समझना भी जरूरी है। अध्ययन एक ‘टैक्टिकल अप्रोच’ की वकालत करता है, जहां निवेश निर्णय सापेक्ष वैल्यूएशन के आधार पर लिए जाएं।

हालिया करेक्शन के बाद कई स्मॉल-कैप शेयर्स के वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक संतुलित हुए हैं। ऐसे में मौजूदा माहौल चुनिंदा निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, आगे भी स्मॉल-कैप्स का प्रदर्शन बाजार की दिशा और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेगा। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय अनुशासित और सोच-समझकर निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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