भारत के ये 6 सेक्टर्स से आएगा नया इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन?

The 6 Sectors Powering India’s Next Growth Phase
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भारत की आर्थिक ग्रोथ अब केवल पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है। अब डीप टेक, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और डोमेस्टिक मार्केट के साथ भारत एक नए इंडस्ट्रियल फेज में आगे बढ़ रहा है। पिछले दस वर्षों में भारत ने मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसमें टेलीकॉम पेनिट्रेशन, स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल, रियल टाइम पेमेंट्स और डिजिटल आइडेंटिटीज शामिल हैं। इसी आधार पर अब ग्रोथ की अगली लहर तैयार हो रही है।

आइए भारत के इस नए इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन को समझते हैं।

क्या है मामला?

जेफरीज ने अपनी इंडिया इक्विटी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में भारत की अगली ग्रोथ को 6 सेक्टर्स से जोड़ा है। इनमें सेमीकंडक्टर्स, स्पेस, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और डेटा सेंटर्स शामिल हैं। जेफरीज इसे भारत का न्यू इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन मान रही है।

इस ग्रोथ को बड़े डोमेस्टिक मार्केट, बढ़ती प्राइवेट सेक्टर पार्टिसिपेशन और पॉलिसी सपोर्ट से मदद मिल रही है। भारत पहले से स्टील, सीमेंट, ऑटोमोबाइल्स और रिफाइनिंग का बड़ा मैन्युफैक्चरर है। इसके अलावा, भारत मोबाइल फोन्स और सोलर मॉड्यूल्स का भी महत्वपूर्ण प्रोड्यूसर है।

अब चुनौती इन क्षमताओं को कॉम्प्लेक्स मैन्युफैक्चरिंग तक ले जाने की है। सरकार ने 2020 में स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला। डेटा सेंटर्स के लिए टैक्स हॉलिडेज और सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर के लिए इंसेंटिव स्कीम्स भी दी गई हैं।

सेमीकंडक्टर्स और स्पेस सेक्टर

सेमीकंडक्टर्स में भारत अब अनाउंसमेंट से एग्जीक्यूशन की ओर बढ़ रहा है। करीब $20 बिलियन के इन्वेस्टमेंट्स ट्रिगर हो चुके हैं। इसमें एक चिप फैब्रिकेशन प्लांट अंडर कंस्ट्रक्शन है और कई आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) प्रोजेक्ट्स प्रोडक्शन में जा रहे हैं। सरकार ने सेकंड फेज सेमीकंडक्टर प्रोग्राम भी लॉन्च किया है। इसका आउटले करीब $13 बिलियन है।

स्पेस सेक्टर में भी प्राइवेट पार्टिसिपेशन बढ़ रहा है। स्पेस इकोनॉमी को 2030 तक $40 से $45 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जबकि 2023 में यह $8.4 बिलियन थी। यानी इसमें पांच गुना विस्तार का लक्ष्य है।

2026 तक भारत में 400 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स हैं। स्कायरूट एयरोस्पेस, पिक्सल, अग्निकुल कॉसमॉस और दिगंतरा जैसे प्लेयर्स इनोवेशन से कमर्शियल एग्जीक्यूशन की ओर बढ़ रहे हैं। भारत उन चुनिंदा स्पेसफेयरिंग नेशन्स में शामिल है जिनके पास कॉम्पिटिटिव कैपेबिलिटीज हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और एयरोस्पेस सेक्टर

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब केवल असेंबली तक सीमित नहीं है और इसमें वैल्यू एडिशन बढ़ रहा है। मोबाइल कंपोनेंट बिल ऑफ मटेरियल्स में लोकल वैल्यू एडिशन अगले छह साल में 20% से कम से बढ़कर 50% तक हो सकता है। PCB का करीब $5 बिलियन का मार्केट अभी आयात पर निर्भर है। इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) और MPMS (मोबाइल 2.0) जैसी स्कीम्स सप्लाई चेन को मजबूत कर रही हैं।

सोलर सेक्टर में भारत दूसरा सबसे बड़ा सोलर फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरर है। यहां 35 गीगावॉट ऑपरेशनल सेल कैपेसिटी है, जबकि 100 गीगावॉट कैपेसिटी अंडर कंस्ट्रक्शन है। 2030 तक वैल्यू चेन के 90% के लोकलाइज होने की उम्मीद है।

एयरोस्पेस में ग्लोबल सप्लाई कंस्ट्रेंट्स भारत के लिए अवसर बना रहे हैं। बोइंग और एयरबस सालाना $1.4 से $1.6 बिलियन भारत से सोर्स करते हैं। एक्वस, आजाद इंजीनियरिंग, भारत फोर्ज, डायनामैटिक, मदरसन और संसैरा ग्लोबल टियर-1 सप्लायर बन चुके हैं।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

डेटा सेंटर्स सबसे बड़ा कैपिटल इंटेंसिव अवसर है। कोलोकेशन कैपेसिटी पिछले पांच साल में पांच गुना बढ़कर 2 गीगावॉट हो गई है। अगले पांच साल में इसके फिर पांच गुना बढ़कर 10 गीगावॉट होने की उम्मीद है। इसके लिए $45 बिलियन का फैसिलिटी कैपिटल एक्सपेंडिचर और $9 बिलियन की रेवेन्यू अपॉर्चुनिटी बन सकती है। यह निवेश कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, पावर इक्विपमेंट, कूलिंग सॉल्यूशन और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर तक जाएगा।

स्पेस सेक्टर का $8.4 बिलियन से बढ़कर $40-45 बिलियन तक पहुंचना, सेमीकंडक्टर्स में $20 बिलियन के इन्वेस्टमेंट्स और $13 बिलियन का आउटले, और इलेक्ट्रॉनिक्स में $5 बिलियन के PCB मार्केट का लोकलाइजेशन इस थीम को मल्टी-ईयर विजिबिलिटी देता है। पॉलिसी बैकिंग और डोमेस्टिक मार्केट से प्राइवेट कैपिटल भी बढ़ रहा है।

भविष्य की बातें

आगे इन सेक्टर्स की ग्रोथ से पावर जनरेशन, ग्रिड कनेक्टिविटी, कूलिंग और एडवांस्ड मटेरियल्स में भी अवसर बनेंगे। इन सभी सेक्टर्स के कॉमन ड्राइवर्स लोकल सप्लाई चेन, डोमेस्टिक डिमांड, पॉलिसी बैकिंग और प्राइवेट पार्टिसिपेशन हैं।

हालांकि, सप्लाई चेन डेप्थ, स्किल्ड वर्कर्स और ग्लोबल कॉम्पिटिशन जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। इसके बावजूद भारत असेंबली और इम्पोर्ट्स से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग, लोकलाइजेशन और ग्लोबल सप्लाई चेन इंटीग्रेशन की ओर बढ़ रहा है। यह एक मल्टी-डिकेड अपॉर्चुनिटी है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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