भारत का सोलर एनर्जी सेक्टर आज देश की एनर्जी रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। 2010 में शुरू किए गए नेशनल सोलर मिशन और उसके बाद की नीतिगत पहल तथा टेक्नोलॉजी में निवेश ने सोलर एनर्जी को भारत की एनर्जी ट्रांजीशन के केंद्र में ला दिया है। सोलर एनर्जी अब सिर्फ एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह एनर्जी सुरक्षा, आर्थिक विकास और एनर्जी निर्यात क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है।
आइए समझते हैं कि भारत के सोलर एनर्जी सेक्टर की वर्तमान स्थिति क्या है, कितनी क्षमता स्थापित हो चुकी है, उत्पादन और नीतिगत सहयोग कैसे हैं, मुख्य ड्राइवर्स क्या हैं और भविष्य में इस सेक्टर से क्या अपेक्षाएँ रखी जा सकती हैं।
भारतीय सोलर एनर्जी मार्केट की वर्तमान स्थिति
भारत ने FY25 में अपनी ग्लोबल मजबूती को बरकरार रखते हुए विंड पावर, सोलर पावर और कुल रिन्यूएबल एनर्जी इंस्टॉल्ड कैपेसिटी में दुनिया भर में चौथा स्थान बनाए रखा है। वर्तमान में भारत रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी के क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ता मार्केट है और यह अनुमान लगाया गया है कि 2026 तक नई कैपेसिटी एडिशन की रफ्तार दोगुनी हो जाएगी।
भारत के बढ़ते प्रभाव का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि देश अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर एनर्जी प्रोड्यूसर बन गया है। इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) के डेटा के अनुसार भारत ने 1,08,494 GWh सोलर पावर का उत्पादन किया जो जापान के 96,459 GWh के मुकाबले काफी अधिक है।

भारत की कुल इंस्टॉल्ड रिन्यूएबल एनर्जी पावर कैपेसिटी में सोलर पावर की हिस्सेदारी अन्य सभी को मिलाकर आधे से भी ज्यादा है।
31 अक्टूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 39.66% तक पहुंच गई है। इस पूरे रिन्यूएबल पोर्टफोलियो में सोलर एनर्जी सबसे प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरी है जिसकी क्षमता 129.92 GW तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा कुल रिन्यूएबल कैपेसिटी का 64.87% हिस्सा कवर करता है जो भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजेक्शन और भविष्य की एनर्जी सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता को दर्शाता है।
सरकारी नीतियों और योजनाओं का सहयोग
भारतीय सोलर सेक्टर की सफलता के पीछे सरकार की मजबूत नीति है। सोलर पार्क्स और अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट के लिए सरकार ने विशेष योजनाएं लागू की हैं। वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों में 50 से अधिक सोलर पार्क्स को मंजूरी दी गई है जिनकी कुल क्षमता लगभग 40 गीगावाट के करीब है। ये पार्क डेवलपर्स को तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन और कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं जिससे प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की चुनौतियां कम हो जाती हैं।
इसके साथ ही, डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। हाई एफिशिएंसी सोलर PV मॉड्यूल्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए भारी निवेश किया जा रहा है ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटॉप प्रोग्राम और PM कुसुम (PM-KUSUM) जैसी योजनाएं किसानों और आम नागरिकों को सोलर एनर्जी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। यह नीतियां न केवल उत्पादन बढ़ा रही हैं बल्कि पूरे इकोसिस्टम को सस्टेनेबल बना रही हैं।
PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
डोमेस्टिक स्तर पर सोलर एनर्जी के उपयोग को क्रांतिकारी बनाने के लिए सरकार ने 13 फरवरी 2024 को PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत की। इस योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर सिस्टम से जोड़ना है। इस विशाल पहल के लिए 75,021 करोड़ रुपये का कुल ऑउटले आवंटित किया गया। यह योजना आम नागरिकों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई।
योजना के तहत 2 किलोवाट तक के सिस्टम के लिए 60% की सब्सिडी और अगले 1 किलोवाट के लिए 40% की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। 3 किलोवाट के सिस्टम के लिए कुल सब्सिडी 78,000 रुपये तक निर्धारित की गई है। इसके साथ ही, दिसंबर 2025 तक के आंकड़े इस मिशन की सफलता की पुष्टि करते हैं। अब तक 23.9 लाख घर इस क्रांति का हिस्सा बन चुके हैं, जिनसे 7 GW क्लीन एनर्जी का उत्पादन हो रहा है। सरकार द्वारा अब तक ₹13,464.6 करोड़ की सब्सिडी जारी की जा चुकी है, जो यह दर्शाता है कि भारत अपने 1 करोड़ सोलर घरों के लक्ष्य की ओर अत्यंत तीव्र गति से अग्रसर है।
स्टॉक्स जिन पर नजर रखनी चाहिए

भविष्य की संभावनाएं
भारत आगामी वर्षों में क्लीन एनर्जी के ग्लोबल हब के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल बिजली क्षमता, 50% बिजली क्षमता नॉन-फॉसिल स्रोतों से, और 1 बिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। साथ ही, अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी में 45% कमी और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प भारत की जलवायु प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एनर्जी दक्षता, लो-कार्बन तकनीक, और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पर बड़ा फोकस किया जा रहा है।
भारत इन लक्ष्यों की दिशा में पहले ही मजबूत शुरुआत कर चुका है। देश ने 100 GW सोलर, 47% नॉन-फॉसिल बिजली हिस्सेदारी, और 36% उत्सर्जन डेंसिटी में कमी हासिल कर ली है, जो तय गति से तेज प्रगति दर्शाता है। 2030 तक की 500 GW रिन्यूएबल क्षमता में से 280 GW सोलर से आने की उम्मीद है, जो लगभग US$ 221 बिलियन के निवेश अवसर खोलेगा। यह ट्रांजीशन न केवल भारत की एनर्जी संरचना को बदल रहा है, बल्कि देश को क्लीन एनर्जी में ग्लोबल लीडर बनने की ओर भी ले जा रहा है।
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