एक F&O ट्रेड से बदल सकती है आपकी ITR फाइलिंग डेडलाइन

एक F&O ट्रेड से बदल सकती है आपकी ITR फाइलिंग डेडलाइन
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सैलरीड टैक्सपेयर्स मानते हैं कि उनकी इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई होती है। लेकिन पिछले वित्त वर्ष में केवल एक इंट्राडे या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेड करने पर भी यह नियम बदल सकता है।

इनकम टैक्स नियमों के अनुसार इंट्राडे और F&O ट्रेडिंग से होने वाले प्रॉफिट या लॉस को बिजनेस इनकम माना जाता है। इसलिए सही ITR फॉर्म, टर्नओवर कैलकुलेशन और फाइलिंग डेडलाइन समझना जरूरी है। गलत रिपोर्टिंग से रिटर्न प्रोसेसिंग में देरी या टैक्स नोटिस का जोखिम बढ़ सकता है।

एक ट्रेड से क्यों बदल जाती है ITR डेडलाइन?

इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयर्स को एक ही दिन खरीदा और बेचा जाता है। इससे होने वाले प्रॉफिट या लॉस को स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। यह आय सामान्य टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है। इंट्राडे का स्पेक्युलेटिव लॉस केवल स्पेक्युलेटिव प्रॉफिट के विरुद्ध ही सेट-ऑफ किया जा सकता है।

दूसरी ओर, F&O ट्रेडिंग से होने वाली आय या नुकसान को नॉन-स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। भले ही डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन में शेयर्स की वास्तविक डिलीवरी न हुई हो, इसे ‘प्रॉफिट्स एंड गेन्स फ्रॉम बिजनेस ऑर प्रोफेशन’ के अंतर्गत रिपोर्ट किया जाता है।

इसलिए केवल सैलरी प्राप्त करने वाला व्यक्ति भी यदि एक F&O या इंट्राडे ट्रांजैक्शन करता है, तो टैक्स नियमों के अनुसार उसके पास बिजनेस इनकम हो जाती है। यही कारण है कि उसकी फाइलिंग डेडलाइन केवल सैलरी और सामान्य निवेश आय वाले टैक्सपेयर से अलग हो सकती है।

आपकी सही ITR डेडलाइन क्या होगी?

फाइनेंस एक्ट, 2026, के अनुसार ऐसे टैक्सपेयर्स की ITR फाइलिंग डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई है, जिनके पास बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है लेकिन टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

इसलिए यदि किसी सैलरीड व्यक्ति ने इंट्राडे या F&O ट्रेड किया है और उसका टैक्स ऑडिट नहीं बनता, तो असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए उसकी ITR डेडलाइन 31 अगस्त 2026 होगी।

यदि टर्नओवर और अन्य शर्तों के कारण टैक्स ऑडिट जरूरी है, तो रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर 2026 होगी। उदाहरण के लिए, ₹80 लाख टर्नओवर वाले सोल प्रोप्राइटर पर ऑडिट लागू नहीं है, तो उसकी डेडलाइन 31 अगस्त 2026 होगी।

F&O टर्नओवर की गणना कैसे होती है?

टैक्स ऑडिट की जरूरत तय करने के लिए F&O टर्नओवर की सही गणना जरूरी है। ICAI की गाइडेंस के अनुसार सभी फेवरेबल और अनफेवरेबल डिफरेंसेज का कुल योग टर्नओवर माना जाता है।

ऑप्शंस बेचने पर मिला प्रीमियम भी टर्नओवर में शामिल होता है। हालांकि यदि यह प्रीमियम पहले ही नेट प्रॉफिट या लॉस में शामिल है, तो इसे दोबारा नहीं जोड़ा जाता।

रिवर्स ट्रेड का डिफरेंस भी टर्नओवर में शामिल होता है। वित्त वर्ष के अंत में खुली पोजीशन का टर्नओवर उस वर्ष माना जाता है, जिसमें उसे स्क्वायर-ऑफ या सेटल किया गया हो।

सही ITR फॉर्म और रिपोर्टिंग

इंट्राडे या F&O इनकम वाले टैक्सपेयर्स को सामान्य रूप से ITR-3 फाइल करना होता है। ITR-2 मुख्य रूप से कैपिटल गेन्स जैसी निवेश आय के लिए है, जबकि ITR-1 सीमित शर्तों वाले टैक्सपेयर्स के लिए होता है।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के ITR-3 में बिजनेस एक्टिविटी का सही कोड दर्ज करना जरूरी है। इंट्राडे यानी स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग के लिए कोड 21009, F&O के लिए 21010 और बिजनेस के रूप में शेयर ट्रेडिंग के लिए 21011 तय किया गया है।

ट्रेडिंग अकाउंट सेक्शन में इंट्राडे और F&O टर्नओवर अलग-अलग दिखाना होगा। दोनों से हुई इनकम या लॉस भी अलग रिपोर्ट करना जरूरी है।

लॉस, रिकॉर्ड और टैक्स ऑडिट

ट्रेडर्स को ब्रोकर स्टेटमेंट्स, कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, बैंक रिकॉर्ड्स और प्रॉफिट-लॉस कैलकुलेशन सुरक्षित रखने चाहिए। पिछले तीन वित्त वर्षों में किसी वर्ष बिजनेस टर्नओवर ₹25 लाख से अधिक या नेट प्रॉफिट ₹2.5 लाख से ज्यादा होने पर बुक्स ऑफ अकाउंट रखने की जरूरत हो सकती है।

यदि F&O में लॉस हुआ है और कुल आय बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है, तो हर स्थिति में ITR फाइल करना जरूरी नहीं हो सकता। लेकिन इस लॉस को भविष्य के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने के लिए ड्यू डेट के भीतर रिटर्न फाइल करना आवश्यक है। इसलिए नुकसान होने पर भी समय पर ITR फाइल करना भविष्य में टैक्स बचत के लिए उपयोगी हो सकता है।

निष्कर्ष

इंट्राडे या F&O में केवल एक ट्रेड भी आपकी ITR कैटेगरी, फॉर्म और डेडलाइन बदल सकता है। ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई को स्वतः अंतिम तारीख मानना सही नहीं है।

पहले ट्रेडिंग इनकम की कैटेगरी, टर्नओवर, टैक्स ऑडिट की जरूरत और सही ITR फॉर्म की जांच करनी चाहिए। ऑडिट लागू नहीं होने पर डेडलाइन 31 अगस्त 2026 और ऑडिट लागू होने पर 31 अक्टूबर 2026 हो सकती है।

सही और समय पर रिपोर्टिंग न केवल टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाती है, बल्कि ट्रेडिंग लॉस को भविष्य में सेट-ऑफ और कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी सुरक्षित रखती है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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