क्या गिरता मार्केट SIP रोकने का सही समय है? जानिए असली सच

क्या गिरता मार्केट SIP रोकने का सही समय है? जानिए असली सच
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शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव निवेशकों की धैर्य और अनुशासन की असली परीक्षा लेते हैं। जब मार्केट गिरता है तो लोग अपने SIP को रोकने का सोचते हैं, लेकिन ज्यादातर निवेशक एक अहम सच्चाई को नजरअंदाज कर देते हैं। गिरते मार्केट में निरंतर निवेश करना लंबे समय में फायदेमंद साबित होता है।

आइए गिरते मार्केट में SIP को रोकने का फैसला सही है या नहीं, इस मामले को विस्तारपूर्वक समझें और जानें कि ज्यादातर निवेशक इसमें क्या गलती करते हैं।

क्या है मामला?

मार्केट में गिरावट के समय SIP रोकने का विचार स्वाभाविक लगता है, लेकिन यही सबसे बड़ी गलतफहमी है। SIP का असली फायदा ऐसे ही दौर में मिलता है। संकट के समय SIP कमजोर नहीं होती, बल्कि लंबी अवधि में यह निवेशकों के लिए सबसे बेहतर अवसर बन जाता है।

जब मार्केट गिरता है, तो तय राशि से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं यही ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा है। उदाहरण के लिए, NAV 100 से घटकर 80 होने पर 10,000 रुपये में 100 की जगह 125 यूनिट्स मिलती हैं। यही अतिरिक्त यूनिट्स रिकवरी के समय रिटर्न को बढ़ाती हैं। समस्या स्ट्रेटेजी में नहीं, बल्कि गिरावट के बीच उसे जज करने में होती है।

2008 और 2020 की गिरावट में भी जिन निवेशकों ने SIP जारी रखी, उन्होंने बेहतर रिटर्न कमाए, जबकि SIP रोकने वालों ने सस्ते निवेश का मौका खो दिया। इसलिए गिरते बाजार में SIP बंद करना नहीं, बल्कि जारी रखना ही लंबी अवधि में समझदारी भरा कदम होता है।

गिरते मार्केट में SIP रोकने की असली कीमत

SIP की खासियत यही है कि यह अच्छे और खराब दोनों तरह के मार्केट में काम करता है, बल्कि गिरावट के समय इसका फायदा और बढ़ जाता है। क्योकि गिरावट में अधिक यूनिट्स खरीदने का मौका मिलता है और यह अतिरिक्त यूनिट्स ही आगे चलकर रिटर्न को तेज़ी से बढ़ाती हैं।

अगर आप ऐसे समय में SIP रोक देते हैं, तो असली नुकसान यहीं से शुरू होता है। उदाहरण के तौर पर, सिर्फ 3 महीने SIP रोकने पर 75 यूनिट्स का नुकसान हो सकता है, जो 10 साल में लगभग 18,500 रुपये की वैल्यू बना सकती थीं। वहीं अगर SIP एक साल के लिए रोक दी जाए, तो यह नुकसान 74,000 रुपये से भी ज्यादा हो सकता है। यानी जो “सुरक्षित” कदम लगता है, वही लंबी अवधि में रिटर्न को कमजोर कर देता है।

सबसे बड़ी गलती ‘टाइमिंग’ की होती है। ज्यादातर निवेशक SIP तब दोबारा शुरू करते हैं जब मार्केट पहले ही रिकवर हो चुका होता है, जैसे NAV 110 पर। ऐसे में 3-6 महीने की देरी से 30,000 से 60,000 रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है, और एक साल की देरी से यह 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। सच यह है कि जब मार्केट सुरक्षित लगता है, तब तक बड़ा मौका निकल चुका होता है इसलिए लगातार निवेश ही बेहतर रणनीति रहती है।

मार्केट वोलेटिलिटी निवेशक की अनुशासन की परीक्षा लेती है

मार्केट वोलेटिलिटी कोई समस्या नहीं बल्कि मार्केट का स्वाभाविक हिस्सा है। यह निवेशक की प्रतिक्रिया की परीक्षा लेती है। हो सकता है कुछ लोग हर सप्ताह अपने पोर्टफोलियो को देखकर घबरा जाते हों और SIP रोक देते हैं। लेकिन स्टडी से पता चलता है कि 30 साल के लंबे पीरियड में पीक पर SIP शुरू करने और बॉटम पर शुरू करने वाले निवेशकों के XIRR में ज्यादा अंतर नहीं आता।

वोलेटिलिटी के दौरान निरंतर निवेश करने से अलग-अलग प्राइस पर यूनिट्स जमा होती हैं जो कंपाउंडिंग का फायदा बढ़ाती हैं। जो लोग वोलेटिलिटी से डरकर बाहर निकलते हैं या SIP रोकते हैं, वे रिकवरी के सबसे अच्छे दिनों को मिस कर देते हैं।

गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स में भी 10 साल के रोलिंग SIP ने ज्यादातर मामलों में पॉजिटिव रिटर्न दिए। वोलेटिलिटी में इंतजार करने की कोशिश अक्सर असफल होती है क्योंकि मार्केट बिना स्पष्ट बॉटम के रिकवर कर जाता है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

गिरते मार्केट में SIP रोकना ज्यादातर मामलों में गलत फैसला साबित होता है। यह डर पर आधारित भावनात्मक प्रतिक्रिया है, न कि वित्तीय तर्क पर। SIP का पूरा फायदा तभी मिलता है जब इसे लंबे समय तक बिना रुके चलाया जाए।

निवेशकों को चाहिए कि SIP को ऑटोमेटिक रखें, रोजाना पोर्टफोलियो चेक न करें और अगर वित्तीय स्थिति मजबूत हो तो गिरावट के समय SIP अमाउंट बढ़ा भी सकते हैं। केवल तब SIP रोकें जब आय प्रभावित हो, इमरजेंसी हो या निवेश का लक्ष्य बदल गया हो। मार्केट के डर से SIP रोकना लंबे समय में लाखों रुपये का नुकसान करा सकता है।

भविष्य की बातें

मार्केट में गिरावट और रिकवरी का चक्र हमेशा चलता रहेगा। इतिहास बताता है कि हर क्रैश के बाद रिकवरी आई है। जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और समय में बने रहते हैं, वे लंबे समय में बेहतर परिणाम पाते हैं।

‘टाइम इन द मार्केट’ हमेशा ‘टाइमिंग द मार्केट’ से बेहतर साबित होता है। भविष्य में भी वोलेटिलिटी आएगी लेकिन जो निवेशक भावनाओं पर काबू रखकर SIP जारी रखेंगे, वे रिकवरी का सबसे बड़ा फायदा उठा सकेंगे।

निवेशकों को सलाह है कि SIP को लंबी अवधि की सोच के साथ देखें, ऑटोमेशन का इस्तेमाल करें और छोटी-छोटी गिरावटों पर घबराकर अपना प्लान न बदलें। अनुशासन और धैर्य ही लंबे समय में वास्तविक धन सृजन का राज है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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