अपनी वेल्थ-बिल्डिंग यात्रा को सुपरचार्ज करने के लिए टैक्स एफिशिएंसी के बारे में जानें।
आइए आज के आर्टिकल की शुरुआत एक सच्चाई से करते हैं। हम सभी पैसा कमाने के लिए काम करते हैं, लेकिन असली विसडम उस पैसे को बचाने की कला में है। हालांकि, बचत करना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है। खासकर जब आप उन महत्वपूर्ण टैक्स पर विचार करते हैं जिन्हें हमें चुकाना पड़ता है। टैक्स हमारी फाइनेंशियल यात्रा में अनचाहे बिलों की तरह हैं, लेकिन यहां एक इनसाइट है – टैक्स एफिशिएंसी में महारत हासिल करने से आपको ज्यादा से ज्यादा सेविंग करने में मदद मिल सकती है।
आज हम यह जानेंगे कि टैक्स एफिशिएंसी क्यों महत्वपूर्ण है। अपने टैक्स के बोझ को कम करने के लिए स्मार्ट निवेश रणनीतियों को एक्सप्लोर करें और समझें कि अपने टैक्स के लिए चतुराई के साथ प्लान कैसे बनाएं।
आइए शुरू करते हैं।
टैक्स एफिशिएंसी के बारे में पता होना क्यों जरूरी है?
टैक्स एफिशिएंसी में महारत हासिल करना आपकी फाइनेंशियल यात्रा में ‘समय रहते संभलने से बड़ी आफत टल जाती है’ जैसी पुरानी कहावत को लागू करने जैसा है। अपनी धन सृजन यात्रा की योजना बनाते समय आप जो भी टैक्स एफिशिएंसी हासिल करते हैं, वह आपकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बचाता है।
टैक्स एफिशिएंसी की खूबसूरती यह है कि यह न केवल आपके वर्तमान टैक्स बिल को कम करती है बल्कि यह आपके धन सृजन को भी चार्ज करता है। यह आपके पैसे को आपके लिए ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करता है, जिससे आपको अपने फाइनेंशियल गोल्स को तेजी से हासिल करने में मदद मिलती है। संक्षेप में कहें तो यह आपके फाइनेंस के लिए एक फायदेमंद रणनीति है।
टैक्स एफिशिएंसी कैसे प्राप्त करें?
लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग
जब टैक्स बचाने की बात आती है तो इस कहावत ‘धीमी और स्थिर दौड़ वाले अक्सर जीतते हैं’ से ज्यादा कुछ सही नहीं हो सकता।
लॉन्ग टर्म के निवेश आम तौर पर कम टैक्स प्रभाव के साथ आते हैं, जो एक बड़ा फायदा है। एक साल से ज्यादा समय तक रखे गए निवेश पर आपको जो कैपिटल गेन देना पड़ता है उसे लॉन्ग टर्म माना जाता है और इन पर टैक्स रेट कम होती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह मुख्य रूप से स्टॉक पर लागू होता है। बॉन्ड के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन केवल तभी लागू होता है जब बॉन्ड तीन साल से ज्यादा समय तक रखा जाता है।
नीचे बताया गया है कि लॉन्ग टर्म के लिए शेयर रखने से आपको टैक्स बचाने में कैसे मदद मिल सकती है:
A) लॉन्ग टर्म कैपिटल लाभ (LTCG)
यदि आपके पास एक साल से ज्यादा समय तक शेयर या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड हैं और एक वित्तीय वर्ष के अंदर आपका लाभ 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको 10% टैक्स देना होगा। उदाहरण के लिए यदि आपने पांच साल पहले शेयरों के एक सेट में 2 लाख रुपये का निवेश किया था और अब उनकी कीमत 4 लाख रुपये है तो उन्हें बेचने पर 2 लाख रुपये का कैपिटल लाभ होगा। चूंकि आपने इन एसेट को एक साल से ज्यादा समय तक अपने पास रखा है, इसलिए आपका लाभ LTCG के रूप में योग्य है। इस मामले में 1 लाख रुपये की सीमा से ज्यादा होने पर आपकी टैक्स देनदारी 1 लाख रुपये पर 10% होगी। आपको अपने लाभ पर टैक्स के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
B) शॉर्ट टर्म कैपिटल लाभ (STCG)
यदि आप अपने शेयर या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड को खरीदने के एक साल के अंदर बेचते हैं, तो आप पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स लगता है। इस पर 15% की दर से टैक्स लगाया जाता है। साथ ही यदि एप्लीकेबल हो तो सरचार्ज और सेस टैक्स भी लगाया जाता है।
उदाहरण के लिए यदि आपने शेयरों में 2 लाख रुपये का निवेश किया और उन्हें छह महीने के भीतर 2.2 लाख रुपये में बेच दिया तो इसे STCG माना जाएगा। आपको 20,000 रुपये के लाभ पर 15% टैक्स देना होगा, जो कि 3,000 रुपये होगा।
जैसा कि आप देख सकते हैं कि लॉन्ग टर्म लाभ की तुलना में शॉर्ट टर्म लाभ पर ज्यादा टैक्स लगाया जाता है।
यही कारण है कि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग का ‘धीमा और स्थिर’ अप्रोच केवल पोटेंशियल वेल्थ बनाने के बारे में नहीं है। यह आपकी टैक्स स्थिति को अनुकूल करने के बारे में भी है। ज्यादा समय के लिए अपने निवेश को होल्ड करने से आप न केवल अपने निवेश को बढ़ने के लिए ज्यादा समय देते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि जब आपको अपने प्रॉफिट को निकालना चाहे तो उन पर काफी कम दर से टैक्स लगाया जाए। यह आपको ज्यादा पैसे बचाने में मदद करता है।
2. टैक्स-एफिशिएंट एसेट में निवेश करना
टैक्स-एफिशिएंट एसेट में निवेश करना आपके टैक्स के बोझ को कम करने की एक बेहतरीन रणनीति हो सकती है। पब्लिक प्रोविडेंड फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), सुकन्या समृद्धि योजना (यदि आपकी बेटी है) और पोस्ट ऑफिस स्कीम जैसे टैक्स-सेविंग उपकरणों पर विचार करें। ये सभी सेक्शन 80C के तहत प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स कटौती की पेशकश करते हैं।
यदि आप अपने पैसे को सालों तक लॉक नहीं करना चाहते हैं लेकिन फिर भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, तो इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) पर विचार करें।
3. टैक्स हार्वेस्टिंग स्ट्रेटेजी
टैक्स हार्वेस्टिंग रणनीतियां पुरानी कहावत के समान हैं, ‘कल करे सो आज, आज करें सो अब’। जिसका अर्थ है कि आप अनुकूल स्थिति का ज्यादा से ज्यादा लाभ तब तक उठा सकते हैं जब तक वह बनी रहती है।
टैक्स प्रॉफिट हार्वेस्टिंग
इस रणनीति में टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए रणनीतिक रूप से लॉन्ग टर्म कैपिटल लाभ की बुकिंग करना शामिल है।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
कल्पना कीजिए कि आपने कंपनी ABC के शेयरों में 8,00,000 रुपये की शुरुआती राशि के साथ निवेश किया है। आपका लक्ष्य दो साल बाद इन शेयरों को 10,00,000 रुपये में बेचने का है। पहले साल में आपकी वित्तीय अनुमान सही साबित होता है और आप 80,000 रुपये के प्रॉफिट हैं।
इस परिदृश्य में आप 80,000 रुपये का प्रॉफिट बुक करने का फैसला लेते हैं। 80,000 रुपये के इस लाभ के साथ आप लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर छूट के लिए पात्र हैं। तो आपको इस लाभ पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। कुछ दिनों के बाद आप एक बार फिर उसी कंपनी के शेयर खरीदकर अपनी कैपिटल को रिइन्वेस्ट कर सकते हैं।
टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग
अब आइए दूसरे पहलू पर विचार करते हैं। मान लीजिए आपने दो अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया है:
ABC लिमिटेड में आपने 50,000 रुपये का प्रॉफिट कमाया।
XYZ लिमिटेड में दुर्भाग्य से आपको 30,000 रुपये का नुकसान हुआ।
XYZ लिमिटेड में घाटे के बावजूद आपका कंपनी पर दृढ़ विश्वास है। हालांकि, टैक्स परपज के लिए आप एक आसान ट्रिक अपनाते हैं।
आपने ABC लिमिटेड (50,000 रुपये) में प्रॉफिट कमाया है, जहां आपको 15% की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल लाभ (STCG) टैक्स का भुगतान करना होगा, जो कि 7,500 रुपये होगा।
XYZ लिमिटेड (30,000 रुपये) में आपके नुकसान के लिए आपके पास एक विकल्प है। आप अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के लिए लॉस बुक करना चुन सकते हैं या शेयरों को इस उम्मीद के साथ अपने पास रख सकते हैं कि लॉन्ग टर्म में वे अच्छा करेंगे।
यदि आप लॉस बुक करने का फैसला लेते हैं, तो आप इसे ABC लिमिटेड में उनके प्रॉफिट के खिलाफ ऑफसेट कर सकते हैं। इसका मतलब है कि ABC लिमिटेड (50,000 रुपये) से आपका टैक्स योग्य लाभ अब XYZ लिमिटेड (30,000 रुपये) से होने वाले नुकसान से कम हो जाएगा। इससे आपको 20,000 रुपये का टैक्सेबल लाभ प्राप्त होगा।
3. डिडक्शन
जब आपके टैक्स मैनेजमेंट की बात आती है तो डिडक्शन और छूट को हमेशा गंभीरता से लें। वे आपके टैक्स के बोझ को काफी हद तक कम कर सकते हैं। नीचे विचार करने योग्य कुछ महत्वपूर्ण प्वाइंट दिए गए हैं:
सेक्शन 10 छूट
स्पेसिफिक इनकम जैसे हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) सेक्शन 10 के तहत छूट के लिए पात्र हैं। इन छूट का लाभ उठाने से आपकी टैक्स देनदारी काफी हद तक कम हो सकती है।
होम लोन इंटरेस्ट
यदि आपने होम लोन लिया है, तो याद रखें कि होम लोन पर चुकाया गया ब्याज सेक्शन 24 (B) के तहत कटौती के लिए पात्र है। इससे न केवल घर खरीदना किफायती हो जाता है बल्कि आपकी टैक्स योग्य आय भी कम हो जाती है।
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम
आपका स्वास्थ्य आपकी सबसे मूल्यवान संपत्ति है। सेक्शन 80D के तहत आप अपने परिवार और माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती का दावा कर सकते हैं। अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली यह कटौती न केवल आपके पैसे बचाती है बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि आपकी भलाई सुरक्षित रहे।
चैरिटी डोनेशन
अप्रूव्ड चैरिटी संगठनों को दिया गया डोनेशन सेक्शन 80G के तहत कटौती के लिए पात्र है। जिस उद्देश्य की आप परवाह करते हैं उसमें योगदान देकर आप दुनिया पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सकते हैं।
निष्कर्ष
अंत में जैसा कि कहा जाता है ‘बूंद-बूंद से सागर बनता है’ टैक्स एफिशिएंसी में महारत हासिल करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने की जरूरत होती है। इससे समय के साथ आप पर्याप्त पैसा बचा सकते हैं। टैक्स एफिशिएंसी के महत्व को पहचानना, टैक्स-एफिशिएंट इन्वेस्टमेंट प्रैक्टिस को अपनाना और स्मार्ट टैक्स प्लानिंग के फैसले लेना फाइनेंशियल समृद्धि की आधारशिला हैं।
इसलिए अपने फाइनेंशियल भविष्य की जिम्मेदारी लें और अपने पैसे को खुद के लिए बेहतर तरीके से काम करने में लगाएं।
*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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