जीवन में हम नियमों का पालन करते हैं, लेकिन पैसों के मामले में हम कभी-कभी बिना सोचे-समझे निवेश कर देते हैं। इससे निराशा हो सकती है क्योंकि बिना रिसर्च के उच्च रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती है। यह आर्टिकल निवेश को आसान बनाने और शेयर बाजार को सिर्फ एक जोखिम भरे गेम के रूप में देखने से बचने के लिए एक बेहतर तरीका यानि फैक्टर इन्वेस्टिंग को आसानी से समझने में मदद करेगा।
फैक्टर इन्वेस्टिंग क्या है?
फैक्टर इन्वेस्टिंग का मतलब यह पता लगाना है कि शेयरों में आपके निवेश से पैसा क्यों बनता है या क्यों नुकसान होता है। यह विशिष्ट चीजों को देखने जैसा है, जैसे वैल्यू, क्वॉलिटी, वोलैटिलिटी और मार्केट कैपिटलाइजेशन।
ये फैक्टर्स लगातार प्रभावित करते हैं कि विभिन्न प्रकार के निवेश कैसे प्रदर्शन करते हैं, जिससे निवेशकों को रिटर्न का अनुमान लगाने और जोखिमों को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलती है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) की वजह से हर कोई अब फैक्टर निवेश का उपयोग कर सकता है। यह अब सिर्फ अमीर लोगों के लिए नहीं है। यह दृष्टिकोण निवेश मैनेजमेंट के एक्टिव और पैसिव दोनों तरीकों को जोड़ता है।
अभी समझते है कि लॉन्गटर्म में स्टॉक रिटर्न क्या प्रेरित करता है।
वैल्यू फैक्टर
यह फैक्टर बताता है कि कम P/E रेश्यो या हाई अर्निंग्स यील्ड वाले स्टॉक अक्सर बेहतर रिटर्न प्रदान करते हैं, खासकर जब शेयर बाजार रिकवर कर रहा हो।
मोमेंटम फैक्टर
ग्लोबल स्तर पर विभिन्न प्रकार के निवेशों में स्ट्रांग प्राइस मोमेंट देखा गया है, जिससे पता चलता है कि पिछले बेहतर परफॉर्मिंग एसेट ने नॉट परफॉर्मिंग एसेट से बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है।
ग्रोथ फैक्टर
यह फैक्टर किसी कंपनी की ऐतिहासिक या अनुमानित ग्रोथ रेट के आधार पर उसकी क्षमता को मापता है, जो भविष्य में स्टॉक के मजबूत प्रदर्शन की संभावना को दर्शाता है।
क्वॉलिटी फैक्टर
क्वॉलिटी फैक्टर कॉम्प्लेक्स एकाउंटिंग जानकारी को देखता है और उन कंपनियों पर ध्यान फोकस करता है जहां संचय और नकद आय के बीच बहुत कम अंतर होता है।
साइज फैक्टर
माना जाता है कि छोटी कंपनियां, जैसे मिडकैप और स्मॉलकैप, ऐसा मार्केट जिसमें बहुत कम कंपनियां काम कर रही और विकास के अवसरों के कारण लंबे समय में बड़ी कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
बेहतर निवेश पोर्टफोलियो के लिए फैक्टर इन्वेस्टिंग का उपयोग
एक्सपोज़र को सटीक रूप से टाइमिंग करने का प्रयास करना कठिन है, यह मार्केट को टाइमिंग करने का प्रयास करने जैसा है। विभिन्न समय पर इंडिविजुअल फैक्टर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, मल्टी-फैक्टर एप्रोच अधिक प्रभावी हो सकता है। यह समस्त पोर्टफोलियो रिटर्न को रिस्क में डाले बिना फैक्टर स्पेसिफिक से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद करता है। निवेशक इस रणनीति का उपयोग तब भी कर सकते हैं जब उनका किसी विशेष फैक्टर पर पॉजिटिव दृष्टिकोण हो। इसके साथ, वह आवश्यकतानुसार अपने जोखिम को एडजस्ट कर सकते हैं।
फैक्टर इन्वेस्टिंग के फायदे
- एक्टिव और पैसिव दोनों दृष्टिकोणों के पहलुओं को जोड़ता है और दोनों तरफ से निवेशकों को आकर्षित करता है।
- डिफाइंड कॉस्ट और रिस्क विशेषताओं के साथ पैसिव निवेशकों के लिए रिटर्न बढ़ाता है।
- लंबी अवधि में बैकटेस्टिंग फैक्टर्स ऐतिहासिक इनसाइट्स प्रदान करते हैं।
फैक्टर इन्वेस्टिंग के नुकसान
- फैक्टर अच्छा करने और अच्छा नहीं करने के चक्र से गुजरते हैं, जिससे अनुमान लगाना कठिन हो जाता हैं।
- कोई भी एक फैक्टर सभी मार्केट स्थितियों में काम नहीं करता है, जिसके लिए प्रोएक्टिव एडजस्टमेंट की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष
फैक्टर इन्वेस्टिंग उन प्रमुख फैक्टर्स को देखकर निवेश को सरल बनाता है जो प्रभावित करते हैं कि कोई निवेश कितना जोखिम भरा या फायदेमंद है। मल्टी-फैक्टर्स रणनीति अपनाने से पक्ष से बाहर होने वाले किसी भी एक फैक्टर के खिलाफ फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। इसलिए अगर बुद्धिमानी से उपयोग किया जाता है, तो फैक्टर इन्वेस्टिंग औसत निवेशकों के लिए एक्टिव और पैसिव निवेश एप्रोच के बीच का रास्ता खोजने का एक पावरफुल टूल हो सकता है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल मुख्य रूप से द इकोनॉमिक टाइम्स के लिए लिखा गया है, जिसे आप लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते है।
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