क्या वे दिन याद हैं जब आपको ट्रेन टिकट बुक करने के लिए रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर जाना पड़ता था या अपने SIP निवेश के लिए चेक जमा करने के लिए बैंक जाना पड़ता था? UPI और नेट बैंकिंग जैसी तकनीकों की बदौलत ये काम अब आपके घर बैठे कुछ ही क्लिक में पूरे हो जाते हैं। हालांकि, ये तकनीकी एडवांसमेंट जोखिम भी साथ लाती है। वह है धोखाधड़ी का जोखिम। इस जोखिम पर ध्यान देना जरूरी है क्योंकि आपकी मेहनत की कमाई दांव पर है। 

आइए आज के डिजिटल दौर में अपने फाइनेंशियल वेल-बीइंग और संपत्ति की सुरक्षा के तरीकों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

1. अपने डिजिटल एसेट्स व्यवस्थित करें

अपनी सभी डिजिटल एसेट्स को एक जगह व्यवस्थित करें। इसमें एसेट ओनरशिप, होल्डिंग के तरीके, ऑथराइज्ड एक्सेस और निवेश के लिए उपयोग किए जाने वाले प्लेटफार्म की पहचान करना शामिल है। यह बेसिक काम आपके डिजिटल एसेट लैंडस्कैप का एक मजबूत ओवरव्यू प्रदान करता। इससे पता चलता है कि आपके परिवार में किसके पास उन एसेट तक पहुंच और नॉलेज है।

2. अपने पासवर्ड को मजबूत करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें

एक सामान्य लेकिन अक्सर कम आंका जाने वाला सुरक्षा उपाय आपके पासवर्ड को मजबूत कर सकता है। ब्रोकरेज ऐप के माध्यम से नया इन्वेस्टमेंट करते समय हम अक्सर जल्दबाजी में आसान और दोहराव वाले लॉग-इन क्रेडेंशियल बनाते हैं। यहां समस्या यह है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति या हैकर के पास आपका कोई पासवर्ड भी पहुंच जाता है तो वे संभावित रूप से कई प्लेटफार्म तक पहुंच सकते हैं। इससे बचने के लिए हर एक प्लेटफॉर्म के लिए मजबूत और यूनिक पासवर्ड बनाएं।

इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें जो किसी भी ट्रांजैक्शन को आगे बढ़ाने से पहले आपके मोबाइल नंबर या ईमेल एड्रेस पर भेजे गए OTP की जरूरत के द्वारा सुरक्षा की एक एक्स्ट्रा परत जोड़ता है।

3. जानकारी शेयर करते समय सावधानी बरतें

आज के डिजिटल दौर में जालसाजों ने धोखाधड़ी की कला में महारत हासिल कर ली है। जालसाज इतनी चालाकी से बैंक रिप्रेजेंटेटिव का रूप धारण करते हैं कि लोग बिना सोचे-समझे अपनी पर्सनल फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन शेयर कर देते हैं। सेंसिटिव डेटा शेयर करते समय सावधानी बरतें। किसी भी फाइनेंशियल जानकारी को ऑनलाइन शेयर करने से पहले हमेशा दूसरे पक्ष के व्यक्ति या संस्था के ऑथेंटिसिटी को वेरीफाई करें।

4. सूचित रहें और अपने परिवार को एजुकेट करें

बुद्धि न केवल अपनी गलतियों से आती है बल्कि दूसरों की गलतियों से भी आती है। डिजिटल दौर में लेटेस्ट स्कैम और धोखाधड़ी वाली स्कीम के बारे में जानकारी रखना महत्वपूर्ण है। इसके साथ अपने परिवार के सदस्यों और युवाओं को ऑनलाइन दुनिया में आने वाले जोखिमों के बारे में शिक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। संभावित खतरों को पहचानने और उनसे निपटने का तरीका जानना एक वैल्यूएबल स्किल है। 

5. साइबर सिक्योरिटी इंश्योरेंस पर विचार करें

यदि आप अक्सर बड़े फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन में इंगेज रहते हैं तो कुछ बीमाकर्ता आपको साइबर-अटैक के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए साइबर सिक्योरिटी इंश्योरेंस प्रदान करते हैं। आप इस कवरेज के लिए प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं। इससे आपको मानसिक शांति और वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है।

यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी डिजिटल ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी के महत्व को मानता है, जो उनके जागरूकता अभियानों से स्पष्ट है। ये उपाय सामान्य लग सकते हैं। इन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है और कम सराहा जाता है। लेकिन इन उपायों का उपयोग करने से इस डिजिटल दौर में फाइनेंशियल स्कैम का शिकार होने का जोखिम काफी कम हो सकता है।

ऐसी दुनिया जहां आपके डिजिटल एसेट्स अमूल्य हैं उन्हें सुरक्षित रखना सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि एक जरूरत है। इन कदमों को फॉलो करके आप इस डिजिटल एज में अपने परिवार की फाइनेंशियल वेल-बीइंग और एसेट की सुरक्षा कर सकते हैं।

*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।

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