जानें फाइनेंशियल सक्सेस की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मॉडर्न निवेश चुनौतियों का सामना कैसे करें?
शेयर बाजार में निवेशकों के लिए ‘अस्थिरता’ नाम का एक स्थायी दोस्त होता है। और यह पसंद हो या न हो आपको इस दोस्ती को स्वीकार करना होगा। कोविड-19 महामारी से लेकर इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष तक। कम ब्याज दर के माहौल से लेकर मौद्रिक सख्ती के दौर तक। शेयर बाजार में अस्थिरता कभी भी अनुपस्थित नहीं थी। किसी घटना की गंभीरता यह तय करती है कि बाजार में कितनी अस्थिरता आएगी। सच तो यह है कि कोई इससे बच नहीं सकता, बल्कि इसे स्वीकार करता है।
नतीजतन, लगातार बदलते मार्केट डायनेमिक्स निवेशकों के लिए कई निवेश चुनौतियां खड़ी करते हैं और किसी को भी शांत नहीं रहने देते हैं। हालांकि, विभिन्न निवेश मार्ग और रणनीतियों के माध्यम से शेयर बाजार के इन बदलते डायनेमिक्स को अस्थायी रूप से एडजस्ट किया जा सकता है और इस कॉम्प्लेक्स निवेश की दुनिया में सफलतापूर्वक आगे बढ़ा जा सकता है।
आइए कुछ टैक्टिकल रणनीतियों पर चर्चा करते हैं जिनका उपयोग निवेशक मॉडर्न इन्वेस्टमेंट चुनौतियों से निपटने और मार्केट डायनेमिक्स में महारत हासिल करने के लिए कर सकते हैं।
भविष्य का अनुमान: वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX)
आसान शब्दों में कहें तो वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) अगले 12 महीनों के लिए शेयर बाजार इंडेक्स के रिटर्न के डिस्पर्श़न का एक स्टैटिस्टिकल माप है। हायर इंडेक्स संख्या का मतलब जोखिमपूर्ण सिक्योरिटी होता है और यह दर्शाता है कि शेयर बाजार सहभागियों के बीच बहुत ज्यादा भय है। उदाहरण के लिए मार्च 2020 के दौरान (जब महामारी फैली थी) VIX संख्या 85 के स्तर के आसपास थी, जो अत्यधिक निराशावाद को दर्शाता है। एक सामान्य नियम के रूप में 15 से नीचे का VIX लेवल इंगित करता है कि अस्थिरता नहीं के बराबर है और स्थिर से सकारात्मक रिटर्न अर्जित किया जा सकता है। जबकि 15 से ऊपर का VIX लेवल इन्वेस्टर कम्यूनिटी के बीच बढ़ती अस्थिरता और भय का संकेत देता है।
इसलिए, नियमित आधार पर इस इंडेक्स पर नजर डालकर निवेशक नजदीकी भविष्य के लिए इक्विटी बाजारों के मूड का अनुमान लगा सकते हैं और उसके अनुसार निवेश निर्णय ले सकते हैं। गूगल पर ‘इंडिया VIX’ शब्द सर्च करने पर ही इंडेक्स नंबर सामने आ जाएगा।
एसेट क्लास के रूप में डेब्ट/गोल्ड
ज्यादातर युवा निवेशक सिंगल एसेट क्लास में अपने सभी निवेशों के साथ इक्विटी में बने रहने के लिए दृढ़ हैं। यह सही भी है क्योंकि वे काफी युवा हैं, उनमें जोखिम सहन करने की क्षमता ज्यादा होती है और शेयरों में भारी गिरावट होने पर उनके पास अपना पैसा वापस पाने के लिए पर्याप्त समय होता है।
हालांकि, शॉर्ट-टर्म अवसरों का लाभ उठाने के लिए निवेश पोर्टफोलियो में डेब्ट को एसेट क्लास के रूप में शामिल करना कोई बुरा विचार नहीं है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में ब्याज दरें अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं और इक्विटी रिटर्न सामान्य से कम है। निवेशक डेब्ट/बॉन्ड में कुछ एलोकेशन कर सकते हैं। चूंकि बॉन्ड की कीमतों और ब्याज दरों में विपरीत संबंध होता है। नजदीकी भविष्य में ब्याज दरें कम होने लगेंगी तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ेंगी और इस प्रकार निवेशकों को महंगाई को मात देने वाला रिटर्न मिलेगा।
और जब भी कोई संकट आता है तो गोल्ड ही चमकता है। इस प्रकार इस सेफ-हेवन एसेट क्लास में कुछ एक्सपोजर होने से आर्थिक मंदी के दौरान सुरक्षा का एक मार्जिन मिलता है।
इंडस्ट्री पर टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के प्रभाव से निपटना
टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट ने इस दुनिया को परिवर्तनशील बना दिया है। इस वजह से विभिन्न इंडस्ट्री में निवेशकों को उन कंपनियों पर इन टेक्नोलॉजी के प्रभाव के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है, जिनमें उन्होंने निवेश किया है। अन्यथा, संबंधित कंपनी/इंडस्ट्री अप्रचलित (obsolete) हो जाएगी और इसका नतीजा एक असफल निवेश और कैपिटल लॉस होगा। इसे दूर करने के लिए निवेशकों को एक्टिव रूप से कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति और मैनेजमेंट इंटरव्यू पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान मैनेजमेंट से उस संबंध में सवाल पूछने चाहिए।
इसका एक अन्य समाधान टेक्नोलॉजी फोकस्ड म्यूचुअल फंड हो सकता है, जो टेक स्टॉक्स में निवेश करते हैं। यह ऐसे स्टॉक होते हैं जो फ्यूचर में महत्वपूर्ण चीज बनने जा रहे होते हैं और मानव जाति की भलाई के लिए काम करने जा रहे होते हैं। इस तरह के सेक्टर फोकस्ड स्टॉक में निवेश करके निवेशक यह आश्वासन हासिल कर सकते हैं कि वे टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चल रहे लेटेस्ट ट्रेंड के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।
जियोपॉलिटिकल फैक्टर्स का लाभ उठाना
यदि किसी विशेष क्षेत्र में युद्ध छिड़ जाता है और किसी विशेष कमोडिटी की सप्लाई चेन बाधित हो जाती है, तो उस कमोडिटी की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। एक निवेशक के रूप में आपका तत्काल काम उन घरेलू कंपनियों पर नजर रखना होगा जो उन वस्तुओं/उत्पादों की सप्लाई करती हैं। क्योंकि ये अस्थायी रूप से असाधारण लाभ कमाने में सक्षम हो सकती है।
जब कोई विशेष जियोग्राफी उनके पक्ष में हो तो एक अन्य तरीका जिससे निवेशक लाभ उठा सकतें हैं, वह है म्यूचुअल फंड योजनाओं के माध्यम से उस देश/भौगोलिक क्षेत्र में अस्थायी निवेश करना। कुछ म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं जिनका एक्सपोजर केवल एक निश्चित देश/भौगोलिक कंपनियों में होता है। हालांकि, जोखिम और रिटर्न विशेषताओं का भी अध्ययन करने की आवश्यकता होती है।
फैक्टर इन्वेस्टिंग
निवेश की दुनिया इतनी व्यापक हो गई है कि निवेशकों के पास चुनने के लिए बहुत सारे निवेश विकल्प हैं। निवेशक अपने फैक्टर एक्सपोजर के आधार पर अपने निवेश को अलग कर सकते हैं।
फैक्टर इन्वेस्टिंग एक इन्वेस्टमेंट अप्रोच को संदर्भित करता है जिसमें एसेट क्लास में रिटर्न के स्पेसिफिक ड्राइवर्स को टारगेट करना शामिल है। साइज, वैल्यू, मोमेंटम और क्वालिटी जैसे कई फैक्टर हैं जिन्हें निवेशक टारगेट कर सकते हैं। ऐसे निवेशक जो मानते हैं कि स्टॉक में तेजी बनी रहेगी, मोमेंटम फंड/निवेश वह शैली है जिसे वे अपना सकते हैं। कई म्यूचुअल फंड हाउस पैसिव फैक्टर इन्वेस्टिंग स्टाइल के साथ आ रहे हैं। इस प्रकार निवेशकों को चुनने के लिए ढेर सारे विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं।
लगातार बदलते मार्केट डायनेमिक्स से निपटना पहले से कहीं ज्यादा कॉम्प्लेक्स हो गया है। ऐसे परिदृश्य में निवेशक नियर-टर्म के बाजार अवसरों का लाभ उठाने के लिए टैक्टिकल रणनीतियों को अपना सकते हैं। इन रणनीतियों में एसेट क्लास के रूप में डेब्ट और गोल्ड में निवेश करना, उन स्पेसिफिक सेक्टर या जियोग्राफी को टारगेट करना शामिल है जो फेवर में हैं। साथ ही इसमें टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट कर्व से आगे रहना और फैक्टर इन्वेस्टिंग रणनीतियों का बेस्ट उपयोग करना शामिल है। इन्हें अप्लाई करके निवेशक मार्केट डायनेमिक्स पर बेहतर तरीके से महारत हासिल कर सकते हैं।
*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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