स्टॉक मार्केट एनालिसिस में इकोनॉमिक इंडीकेटर्स की भूमिका!

स्टॉक मार्केट एनालिसिस में इकोनॉमिक इंडीकेटर्स की भूमिका!
Share

ये सोचने वाली बात है कि स्टॉक प्राइस हर रोज ऊपर-नीचे क्यों होती रहती हैं, जबकि कंपनियां हर तिमाही में अपनी फाइनेंशियल रिपोर्ट जारी करती हैं। कंपनी की खबरों के अलावा, देश की आर्थिक स्थिति और इंडीकेटर्स भी शेयर मार्केट को काफी प्रभावित करते हैं। आइए, इनका क्या रोल होता है समझने का प्रयास करते है।

स्टॉक मार्केट को प्रभावित करने वाले प्रमुख इंडीकेटर्स कौन से हैं?

मॉनेटरी पॉलिसी

किसी देश का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को एडजस्ट करके आर्थिक ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाता है, इसे मॉनेटरी पॉलिसी कहते हैं। भारत में, भारतीय रिज़र्व बैंक मॉनेटरी पॉलिसी को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट को एडजस्ट करता है। कम ब्याज दरें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं, जबकि अधिक ब्याज दरें महंगाई को नियंत्रित करती हैं।

उदाहरण के लिए, कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत ने आर्थिक सुधार को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती की और ब्याज दरें कम होने से लोगों ने ज्यादा निवेश किया और शेयर मार्केट ऊपर गया।

फिस्कल पॉलिसी

सरकार आर्थिक विकास के लिए टैक्स और खर्चों का इस्तेमाल करती हैं। कम टैक्स से लोगो की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ती है, जिससे लोग खरीदारी ज्यादा करते हैं और अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। सरकार समझदारी से खर्च कर के रेलवे, सेना जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देती है, जिससे उनसे जुड़ी कंपनियों को फायदा होता है।

उदाहरण के लिए, सितंबर 2019 में, जब सरकार ने कंपनियों के टैक्स कम किए, तो शेयर मार्केट पर इसका पॉजिटिव इम्पैक्ट हुआ और सिर्फ एक दिन में निफ्टी 50 इंडेक्स 5% बढ़ गया। साथ ही, रेलवे, डिफेंस और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में सरकार के ज्यादा खर्च ने इन कंपनियों के भविष्य को बेहतर बनाया है, जिससे उनके शेयरधारकों को अच्छा मुनाफा हुआ।

महंगाई स्तर और बेरोजगारी

जब महंगाई और बेरोजगारी दोनों ज्यादा बढ़ जाएं, तो लोग कम सामान खरीद पाते हैं। इससे मार्केट में चीजों की डिमांड कम हो जाती है। महंगाई की वजह से लोग कम खरीद पाते हैं और बेरोजगारी निर्भरता रेश्यो को बढ़ाती है, जिससे खर्च करने के लिए कम पैसा बचता है।

उदाहरण के लिए, साल 2022 और 2023 में ज्यादातर समय भारत में महंगाई रिजर्व बैंक की सीमा से करीब 2-6% के आसपास रही। इसकी वजह से गाँवों में रहने वाले लोग, जो देश में कुल खरीदारी का 35% से भी ज्यादा योगदान करते हैं, कम सामान खरीद पाए। इसका असर दैनिक उपयोग की चीज़ें बनाने वाली कंपनियों (FMCG) पर भी पड़ा, जिनकी बिक्री में खास बढ़ोत्तरी नहीं देखी गई।

GDP डेटा

GDP बताता है कि एक देश में कितना सामान और सर्विसेज बनाई गईं, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था कितनी अच्छी चल रही है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। भारत की मजबूत बुनियाद और लगातार ख़र्च करने की आदत की वजह से ये देश दुनिया की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला एक अहम इंजन बन गया है, जिससे शेयर मार्केट को भी बढ़ावा मिला है।

उदाहरण के लिए, भारत की वर्तमान स्थिति काफी अच्छी है जिसकी वजह मजबूत फंडामेंटल्स और लगातार ख़र्च करने की आदत है। अगले कुछ सालों में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने वाला है, इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि स्टॉक मार्केट नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

क्रूड ऑइल प्राइस

भारत को ज़्यादातर तेल दूसरे देशों से आयत करना पड़ता है, इसलिए क्रूड ऑइल की प्राइस बहुत महत्वपूर्ण हैं। जब तेल महंगा होता है, तो उसे खरीदने में ज़्यादा पैसा लगता है, जिससे फिस्कल डेफिसिट बढ़ता है और महंगाई भी बढ़ जाती है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है।

उदाहरण के लिए, फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जब क्रूड ऑइल की प्राइस 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, तो भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट और साइडवेज़ का दौर देखा गया।

रिटेल सेल्स

जब किसी विशेष इंडस्ट्री में सेल्स बढ़ती है, तो उससे जुड़ी कंपनियों के शेयर भी ऊपर जाते हैं। उदाहरण के लिए, कारों की ज़्यादा सेल्स होने से कार बनाने वाली कंपनियों के स्टॉक्स में तेज़ी आती है, इसका मतलब है उस पूरे सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन होता है।

उदाहरण के लिए, 2023 में कार बनाने वाली कंपनियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, ज़्यादा कारें बिकीं और पिछले साल के मुकाबले बिक्री भी बढ़ी। इसलिए, 2023 इस सेक्टर के लिए बहुत अच्छा साल रहा।

याद रखें, युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं जैसे जिओपॉलिटिकल इवेंट्स भी मार्केट को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन, जैसे कि वॉरेन बफे ने कहा, “शॉर्टटर्म में मार्केट लोगों की भावनाओं पर चलता है, लेकिन लॉन्गटर्म में अच्छे प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को ही इनाम मिलता है”। इसलिए लॉन्गटर्म में पैसा बनाने के लिए थोड़े समय की उतार-चढ़ाव में न उलझें और कंपनियों के फंडामेंटल्स पर निवेश करें।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।

*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

यह आर्टिकल मुख्य रूप से द इकोनॉमिक टाइम्स के लिए लिखा गया है, जिसे आप लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते है।

आर्टिकल पढ़ें

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Edge Subscription Fee
Min. Investment

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top