शेयर बाजार में निवेश करना मुश्किल स्थिति में होने जैसा महसूस हो सकता है। कभी बाजार ऊपर जाता है तो कभी नीचे। झूले की तरह आपकी फाइनेंशियल स्थिति कभी-कभी अस्थिर महसूस हो सकती है और जब चीजें नीचे जाने लगती हैं, तो आप उससे बाहर निकलना चाहते हैं।

लेकिन याद रखें, जैसे अचानक झूले से कूदने से आपका बैलेंस बिगड़ सकता है और आपको पछताना पड़ सकता है वैसे ही अपने स्टॉक को जल्दबाजी में बेचने से आपकी निवेश रणनीति अस्थिर हो सकती है। इससे आप संभावित लाभ से चूक सकते हैं।

लेकिन चिंता ना करें। आप अकेले नहीं हैं जो निवेश करते समय इन उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं। यहां तक कि दिग्गज निवेशक भी इससे गुजर चुके हैं। अंतर यह है कि वे जानते हैं कि जोखिमों को कैसे मैनेज और कम करना है। इस तकनीक को ‘हेजिंग’ कहा जाता है।

इस आर्टिकल में हम हेजिंग स्ट्रैटेजी की दुनिया का पता लगाएंगे। साथ ही जानेंगे कि आप जोखिम को कम करते हुए ज्यादा शांतिपूर्ण निवेश यात्रा कैसे तय कर सकते हैं।

हेजिंग क्या होता है?

नुकसान को सीमित करने के लिए हेजिंग (बचाव) एक बहुत ही उपयोगी रणनीति है। जब बाजार बहुत ज्यादा अस्थिर होते हैं और आप अपने निवेश के लिए संभावित जोखिमों का अनुमान लगाते हैं तो आप बचाव की स्थिति चुनते हैं।

लेकिन ये कैसे काम करता है? जवाब है, जब आप हेज करते हैं तो आप विपरीत निवेश स्थिति (अपोजिट इन्वेस्टमेंट पोजीशन) लेकर एक रणनीतिक कदम उठा रहे होते हैं। यह काउंटर पोजीशन संभावित नुकसान के तूफान से बचने के लिए आपके लिए ढाल के रूप में काम करती है। यहां तक कि यदि आपके प्राइमरी इन्वेस्टमेंट को नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और नुकसान होता है तो आपकी हेज पोजीशन निवेश के तराजू को बैलेंस करने और जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती है।

निवेशक हेज पोजीशन क्यों लेते हैं?

1. रिस्क मैनेजमेंट और नुकसान को सीमित करना

निवेशक अपने पोर्टफोलियो को बाजार की अस्थिरता और अचानक मूल्य में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए हेजिंग रणनीतियों का उपयोग करते हैं। जिससे संभावित नुकसान कम हो जाता है। यह निवेशकों को विपरीत दिशा में चलने वाली पोजीशन लेकर अपने मौजूदा निवेश में नुकसान की भरपाई करने में सक्षम बनाता है। इससे नकारात्मक जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

लेकिन याद रखें, हेजिंग कोई ऐसी चीज नहीं है जो अनिवार्य रूप से की जाती है। यह तभी किया जाता है जब चीजें अनिश्चित दिखती हों और रिस्क लेवल बहुत ज्यादा हो।

2. कैपिटल प्रिजर्वेशन और स्टेबिलिटी

जिन निवेशकों ने एक ही इन्वेस्टमेंट में बहुत सारा पैसा निवेश किया है वे बड़ा जोखिम उठाते हैं क्योंकि उनकी सारी पूंजी दांव पर लगी होती है। अपने निवेश की सुरक्षा के लिए वे हेज पोजीशन का उपयोग करते हैं। ये हेज पोजीशन निवेशकों को उनके पोर्टफोलियो के ओवरऑल उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करती है। जिससे उनका रिटर्न ज्यादा स्थिर और अनुमानित हो जाता है।

3. डायवर्सिफिकेशन और जोखिम कम करना

हेजिंग एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है जहां निवेशक अपने निवेश को डायवर्सिफाई करते हैं। इसका मतलब है कि वे ऐसे एसेट का उपयोग करते हैं जो एक ही दिशा में नहीं चलते हैं। यह उनके निवेश पोर्टफोलियो में ओवरऑल जोखिम को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, लीवरेज (उधार ली गई धनराशि) का उपयोग करने वाले ट्रेडर और इन्वेस्टर्स के लिए हेजिंग लीवरेज से जुड़े बढ़ते जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। इससे महत्वपूर्ण नुकसान की संभावना कम हो सकती है।

जोखिम कम करने के लिए निवेशक हेजिंग रणनीतियां अपनाते हैं:

01.गोल्ड

आइए एक सामान्य हेजिंग रणनीति के बारे में बात करते हैं जिसका उपयोग भारतीय अक्सर करते हैं। आप देखेंगे कि भारत में हेजिंग के लिए गोल्ड एक लोकप्रिय विकल्प है। जब शेयर बाजार चुनौतियों का सामना करता है तो यह अच्छा प्रदर्शन करता है। इसके अलावा, यह महंगाई के खिलाफ बचाव के रूप में भी काम करता है।

सोना एक सुरक्षित आश्रय की तरह है जो बाजार के मुश्किल समय से गुजरने के दौरान आपके निवेश को संभावित नुकसान से बचाता है।

आर्थिक अनिश्चितता के दौरान सोने की कीमतें अक्सर बढ़ती हैं, जो आपके अन्य निवेशों में होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकती है। उदाहरण के लिए आपको बहुत दूर देखने की जरूरत नहीं है- इजराइल-हमास संघर्ष के दौरान सोने की कीमतें रातोंरात लगभग 3% बढ़ गई और पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा साप्ताहिक लाभ दर्ज किया गया। इसी तरह, हमने रूस-यूक्रेन संघर्ष या अमेरिकी ऋण सीमा समस्या जैसे मुश्किल समय के दौरान सोने में तेजी देखी है। चुनौतीपूर्ण दौर में गोल्ड लगातार सुपरस्टार साबित हुआ है।

अपने पोर्टफोलियो को सोने से सुरक्षित रखने के लिए आप गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। SGBs विशेष रूप से इंटरेस्ट इनकम और कैपिटल एप्रिसिएशन का एडिशनल लाभ प्रदान करते हैं। जिससे वे हेजिंग के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं।

02.पुट ऑप्शन

पुट ऑप्शन आपके स्टॉक निवेश के लिए एक सुरक्षा जाल की तरह है। जब आप अपने किसी स्टॉक के लिए पुट ऑप्शन खरीदते हैं तो यह आपको इसे एक विशेष मूल्य पर बेचने का अधिकार देता है। भले ही बाजार में स्टॉक का मूल्य कितना भी गिर जाए।

हम जानते हैं कि इसे समझना मुश्किल हो सकता है तो आइए इसे समझते हैं। कल्पना कीजिए कि आपके पास किसी कंपनी के शेयर हैं और आपका अनुमान है कि स्टॉक की कीमत में गिरावट आएगी। हालांकि, आप स्टॉक बेचना नहीं चाहते हैं और आप आगे नुकसान भी नहीं देखना चाहते हैं। यहीं पर पुट ऑप्शन उपयोगी हो जाता है।

उस स्टॉक के लिए पुट ऑप्शन प्राप्त करने पर यदि आपके शेयरों की कीमत कम हो जाती है, तो आपको पुट ऑप्शन से प्रॉफिट होगा। इसका मतलब है कि यह या तो आपके नुकसान की पूरी तरह से भरपाई कर सकता है या कम से कम उन नुकसानों को काफी हद तक कम कर सकता है।

03.इनवर्स ETF

हम सभी जानते हैं कि ETF कैसे काम करते हैं – वे आम तौर पर बेंचमार्क इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक या मिरर करते हैं। उदाहरण के लिए निफ्टी ETF निफ्टी 50 इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराएगा। यदि निफ्टी 50 1% ऊपर जाता है, तो आपके ETF में भी 1% की वृद्धि देखी जाएगी।

हालांकि, जब आप अनुमान लगाते हैं कि बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट आएगी तो आप अपने निवेश को कम होता हुआ हुए देखने के बजाय इनवर्स ETF में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

जब बाजार नीचे की ओर जाता है, तो आपके इनवर्स ETF का मूल्य बढ़ जाता है।

इनवर्स ETF को ऐसे रिटर्न प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है जो किसी स्पेसिफिक इंडेक्स या एसेट की विपरीत दिशा में चलते हैं। इनका उपयोग आपके मौजूदा निवेश को सुरक्षित रखने के लिए किया जा सकता है। लेकिन याद रखें, वर्तमान में भारत में इनवर्स ETF का कारोबार नहीं होता है। इन्हें दुनिया भर में बाजार में गिरावट से बचाव के लिए रिस्क-मिटिगेशन टूल के रूप में उपयोग किया जाता है।

तो भारत में इनवर्स ETF के स्थान पर क्या उपयोग किया जाता है? यह हमें हमारे अगले प्वाइंट पर लाता है – शॉर्टिंग या इंडेक्स फ्यूचर्स को बेचना।

04.फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट बेचना

फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट सेलिंग भारत में आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली प्रैक्टिस है। यहां, निवेशक किसी विशेष एसेट जैसे कि इंडेक्स को फ्यूचर डेट पर पहले से तय की गई कीमत पर बेचने के लिए कमिटेड होते हैं। निवेशक फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में शॉर्ट पोजीशन लेकर गिरते बाजार से प्रॉफिट कमा सकते हैं।

आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं। कल्पना कीजिए कि आपके पास एक पोर्टफोलियो है जिसमें मुख्य रूप से निफ्टी 50 स्टॉक शामिल हैं। हाल ही में आपने ऐसे संकेत देखे हैं जो दर्शाते हैं कि बाजार ज्यादा अस्थिर हो सकता है और आप चिंतित हैं कि आपके निवेश का मूल्य कम हो रहा है।

आप अपने निवेश की सुरक्षा के लिए ‘सेलिंग फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स’ नाम की रणनीति अपना सकते हैं। यह रणनीति पुट ऑप्शन का उपयोग करने के समान है।

निफ्टी 50 फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स को एक स्पेसिफाइड प्राइस पर बेचकर आप मुनाफा कमा सकते हैं, यदि बाजार उस मूल्य से गिरावट का अनुभव करता है जिस पर आपने कॉन्ट्रैक्ट बेचा है।

हालांकि, यह जानना महत्वपूर्ण है कि फ्यूचर और ऑप्शन में ट्रेड करना बहुत ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है। यदि आप इस रणनीति में नए हैं तो आपको किसी फाइनेंशियल एडवाइजर से गाइडेंस लेना चाहिए जो आपको फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के मैकेनिक्स और जोखिमों को समझने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

हेजिंग निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो को संभावित नुकसान से बचाने के लिए एक वैल्यूएबल टूल है। लेकिन याद रखें, हेजिंग रणनीति से जुड़े हर एक जोखिमों और लागतों को स्पष्ट रूप से समझना भी महत्वपूर्ण है।

नोट: यह आर्टिकल मूल रूप से तेजी मंदी द्वारा ET मार्केट के लिए लिखा गया था।

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*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।

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