बाजार के उतार-चढ़ाव की दुनिया के बारे में जानें और एक विशेषज्ञ की तरह अस्थिरता को मापना सीखें।
यदि आप ट्रेडिंग के बारे में जानते हैं तो आपने लोगों को यह बात करते हुए सुना होगा कि किसी दिन शेयर बाजार ने कैसा प्रदर्शन किया। कभी-कभी वे कहते हैं कि यह बड़े लाभ या लॉस वाला दिन रहा। कभी-कभी वे कहते हैं कि यह ट्रेडिंग के लिए शांत या कन्फ्यूजिंग करने वाला दिन था।
यदि आप ध्यान देंगे तो आप देखेंगे कि ये उतार-चढ़ाव (अस्थिरता) ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट को संभव बनाते हैं। यदि बाजार हमेशा स्थिर रहता और ज्यादा हलचल नहीं करता तो सही समय पर स्टॉक चुनना कठिन होता।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बहुत ज्यादा अस्थिरता ट्रेडर्स को बड़े जोखिम में डाल सकती है। तो, क्या इस बाजार की अस्थिरता को मापने का कोई तरीका है? जी हां, है। और आज हम इसी के बारे में बात करेंगे।
इस गाइड में हम जानेंगे कि ‘अस्थिरता’ से हमारा क्या मतलब है? ऐसा क्यों होता है और हम एडवांस तरीकों का उपयोग करके इसे कैसे माप सकते हैं।
आइए शुरू करते हैं।
अस्थिरता क्या होती है?
अस्थिरता वित्तीय दुनिया की धड़कन की तरह है। यह मापता है कि शेयर की कीमतों में कितनी तेजी से उतार-चढ़ाव होता है। कई लोगों का मानना है कि बाजार केवल मंदी के ट्रेंड के दौरान ही अस्थिर होते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। आप देखेंगे कि अस्थिरता केवल कीमतों में गिरावट के बारे में नहीं है। यह बाजार में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के बारे में है।
इसका समीकरण काफी आसान है:
जब स्टॉक तेजी से नई ऊंचाई या निचले स्तर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें अक्सर उच्च-अस्थिरता वाले स्टॉक (high-volatility stocks) कहा जाता है।
इसके विपरीत, यदि स्टॉक की कीमतें धीरे-धीरे बदलती हैं या उम्मीद के अनुसार स्थिर रहती हैं, तो उन्हें कम-अस्थिरता वाले स्टॉक (low-volatility stocks) का लेबल दिया जाता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि अस्थिरता हमेशा एक जैसी नहीं होती है। जो स्टॉक आज बहुत ज्यादा अस्थिर है वह कल कम अस्थिर हो सकता है। अस्थिरता फाइनेंशियल बाजारों का एक गतिशील पहलू है जो समय के साथ बदल सकता है।
अस्थिरता का क्या कारण होते हैं?
अस्थिरता और कुछ नहीं बल्कि एक प्रतिक्रिया है जो इस बात से प्रभावित होती है कि लोग किसी बदलाव के प्रति किस प्रकार प्रतिक्रिया करते हैं।
हम किस बदलाव की बात कर रहे हैं? जवाब है हम नए सरकारी नियमों, आर्थिक आंकड़ों, किसी इंडस्ट्री में नए विकास या किसी विशेष कंपनी में होने वाली नई या नकारात्मक चीजों के रूप में होने वाले बदलाव के बारे में बात कर रहे हैं।
उदाहरण के लिए जब अर्थव्यवस्था ग्रोथ कर रही है, उद्योग फल-फूल रहे हैं, सरकार प्रोत्साहन दे रही है, बैंक किफायती ऋण दे रहे हैं और ओवरऑल रूप से आशावाद की भावना है। निवेशक अर्थव्यवस्था के बारे में आश्वस्त होते हैं। ऐसे समय में वे निवेश करना जारी रखते हैं और क्योंकि बिक्री का दबाव कम होता है। बाजार कम अस्थिरता के साथ उम्मीद के अनुसार स्थिर रहते हैं।
हालांकि, जब कोई इकोनॉमिक न्यूज निवेशकों की उम्मीद से ज्यादा निराशावादी होती हैं, तो निवेशकों का विश्वास कम हो सकता है और बाजार एक रोलरकोस्टर की तरह बन सकते हैं। जहां उच्च अस्थिरता (हाई वोलैटिलिटी) का अनुभव हो सकता है।
तो एक ट्रेडर या इन्वेस्टर के लिए क्या कोई ऐसा तरीका है जिसके जरिए बाजार की अस्थिरता का विश्लेषण किया जा सकता है? जैसा कि हमने पहले बताया था, जी हां। ऐसे दो तरीके हैं जिनसे आप अस्थिरता को माप सकते हैं। पहला वह है जहां आप पिछले डेटा को देखते हैं और दूसरा वह है जहां आप किसी स्टॉक या इंडेक्स की अस्थिरता के भविष्य के अनुमान को देखते हैं।
आइए इन दोनों मेथड को समझते हैं।
अस्थिरता मापने के तरीके
1. ऐतिहासिक अस्थिरता (हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी)
हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी (HV) हमें बताती है कि किसी शेयर की कीमत में पहले कितना उतार-चढ़ाव हुआ है। यहां, आप अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी डेटा ले सकते हैं। 30 दिन, छह महीने या एक साल। आदर्श रूप से HV का कैलकुलेशन एक साल की समय सीमा में की जाती है।
ऐतिहासिक अस्थिरता के कैलकुलेशन के बाद आपको क्या पता चलता है?
HV हमें बताता है कि किसी विशेष स्टॉक या मार्केट इंडेक्स से कितना जोखिम जुड़ा हुआ है। यदि HV के कैलकुलेशन को देखेंगे तो इसका कैलकुलेशन किसी विशेष अवधि में स्टॉक के पहले के रिटर्न के स्टैंडर्ड डेविएशन के रूप में किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह मापता है कि उस विशेष समय सीमा के दौरान स्टॉक का रिटर्न उनके औसत मूल्य से कितना डेविएट (बदलाव) हुआ है। एक हाई स्टैंडर्ड डेविएशन रिटर्न में ज्यादा वेरिएबिलिटी को दर्शाता है। यह हाई हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी और रिस्क की ओर इशारा करता है।
हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी के कैलकुलेशन का फार्मूला है:
HV = दैनिक रिटर्न का स्टैंडर्ड डेविएशन * √(ट्रेडिंग दिनों की संख्या)
HV के कैलकुलेशन के लिए आपको पिछले प्राइस डेटा की जरूरत होगी, जिसे आप NSE से किसी विशेष स्टॉक के लिए ‘हिस्टोरिकल डेटा सेक्शन’ पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं और यह भी नोट कर सकते हैं कि आपने कितने ट्रेडिंग दिनों के लिए डेटा लिया है।
एक साल की हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी के कैलकुलेशन के लिए इन आसान स्टेप को फॉलो करें:
1. किसी स्टॉक की पिछले साल के (NSE या BSE से) डेली क्लोजिंग प्राइस को इकठ्ठा करें।
2. प्रत्येक दिन के क्लोजिंग प्राइस को पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस के साथ तुलना करके डेली रिटर्न की गणना करें।
3. इन डेली रिटर्न का स्टैंडर्ड डेविएशन निकाले। यह आपको बताएगा कि स्टॉक के दैनिक प्रदर्शन में उसके औसत दैनिक बदलाव की तुलना में कितना उतार-चढ़ाव होता है।
4. यदि आपने एक साल के लिए डेटा लिया है तो स्टैंडर्ड डेविएशन को 252 के वर्गमूल से गुणा करें, जो लगभग एक साल में ट्रेडिंग दिनों की संख्या है।
यह आपको स्टॉक के लिए हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी की जानकारी प्रदान करेगा।
यह कैलकुलेशन आपको यह समझने में मदद करता है कि समय के साथ स्टॉक के रिटर्न में कितना उतार-चढ़ाव होता है और यह उसके ओवरऑल जोखिम से कैसे संबंधित हो सकता है।
02. निहित अस्थिरता (इंप्लाइड वोलैटिलिटी)
इंप्लाइड वोलैटिलिटी (IV), जिसे अक्सर अनुमानित अस्थिरता कहा जाता है। यह अनुमान लगाने का एक तरीका है कि भविष्य में किसी स्टॉक या इंडेक्स में कितनी अस्थिरता होने की संभावना है। यह ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए विशेष रूप से वैल्यूएबल है क्योंकि यह हमें प्राइस में संभावित उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने में मदद करता है।
जब निवेशक यह अनुमान लगाते हैं कि शेयर बाजार में मूल्य में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, तो इंप्लाइड वोलैटिलिटी (IV) बढ़ जाती है। इसके विपरीत, शांत समय में यह कम हो जाती है।
इंप्लाइड वोलैटिलिटी के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले उपायों में से एक VIX इंडेक्स है। यह इंडेक्स ‘फियर इंडेक्स’ के रूप में भी जाना जाता है। यह बाजारों में भय या विश्वास के स्तर का आकलन करता है। यह अनिवार्य रूप से यह मापने का काम करता है कि निवेशक शेयर बाजार को लेकर कितने चिंतित या आशावादी हैं। उदाहरण के लिए जब COVID-19 महामारी ने बाजार को प्रभावित किया, तो निफ्टी VIX 70.39 के ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया। यह 11-15 की सामान्य सीमा से एक बहुत बड़ी वृद्धि थी और यह उस समय बाजारों में व्याप्त बहुत ज्यादा भय और अनिश्चितता को दर्शाता था।
निष्कर्ष
हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी किसी सिक्योरिटीस की कीमत में हालिया उतार-चढ़ाव को दर्शाती है, जो बाजार में बदलाव का संकेत देती है। VIX इंडेक्स की तरह इंप्लाइड वोलैटिलिटी भविष्य में बाजार की अनिश्चितता को लेकर अनुमान लगाती है। दोनों ही एक उचित और मजबूत निवेश फैसलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह ध्यान रखें कि जरूरी नहीं है कि हाई हिस्टोरिकल वोलैटिलिटी का मतलब खराब निवेश ही होगा। यह रिस्क टॉलरेंस और लक्ष्यों के आधार पर ज्यादा संभावित रिटर्न भी ला सकता है।
*आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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नोट: यह आर्टिकल मूल रूप से तेजी मंदी द्वारा डेक्कन हेराल्ड के लिए लिखा गया था।
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