अगर आपने 20 साल पहले इस कंपनी में 10 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो आज उसकी वैल्यू करोड़ों में होती। ये बात आपने सोशल मीडिया पर कई बार सुनी होगी और जब आपके आस-पास सब लोग स्टॉक मार्केट से पैसा कमा रहे होते हैं, तब फोमो क्रिएट होता है और सब लोग उसके पीछे भागते हैं क्योंकि बहुत से लोग चलती ट्रेन में सवार होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें अंत में पता चलता है कि वो फाइनेंशियल परेशानी में फंस गए हैं।

एक ग़लतफ़हमी जो बहुत से निवेशकों में होती है, वो है कि IPO या इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (Initial Public Offerings) से हमेशा लाभ होता है। लोग समझते हैं कि जब IPO में पैसा लगता है तो नुकसान नहीं होता। और अब तो नई फिनटेक कंपनियां भी स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट हो रही हैं, जिनमें से कुछ तो अभी तक प्रॉफिट भी नहीं कमा रही है। इसलिए अब जरूरी है कि हम समझें कि कौनसा IPO सही है और कौनसा नहीं। तो चलिए जान लेते हैं कि एक निवेशक को IPO का मूल्यांकन कैसे करना चाहिए।

जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट में जाना चाहती है और पब्लिक से पैसे जुटाने चाहती है, तो उसको IPO के लिए सेबी के साथ एक डॉक्यूमेंट बनाना पड़ता है, जिसे हम IPO प्रॉस्पेक्टस कहते हैं। ये एक विस्तृत डॉक्यूमेंट होता है जिसमें कंपनी के बारे में बहुत सारी महत्वपूर्ण बातें लिखी होती हैं। जो भी निवेशक किसी IPO में पैसा लगाने का सोच रहा है, उसके लिए ये डॉक्यूमेंट गोल्डमाइन है, और इसको समझना पहला कदम होना चाहिए। दोस्तो या रिश्तों की सलाह पर भरोसा करने की बजाय, निवेशक को खुद इस दस्तावेज पर ध्यान देना चाहिए। इस डॉक्यूमेंट में कुछ खास सेक्शन होते हैं, जो कि इस प्रकार हैं:

IPO में निवेश

इंडस्ट्री और कंपनी का विवरण

IPO प्रॉस्पेक्टस, जिसे ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) भी कहा जाता है, यह उस इंडस्ट्री के बारे में भी जानकारी देता है जिसमें कंपनी अपना व्यापार करती है। इसके साथ ही यह मैक्रो-इकोनॉमिक दृष्टि से शुरू होकर, इंडस्ट्री की ग्रोथ और प्रतिस्पर्धा कंपनियों की जानकारी, कंपनी की वर्तमान स्थिति और भविष्य की वृद्धि के बारे में भी बताता है इसके साथ ही इसमें कंपनी के सप्लाई चैन, लागत मेट्रिक्स, और बहुत कुछ शामिल होता है। 

इसके बाद आता है कंपनी के बारे में। इसमें ये बताया जाता है कि कंपनी क्या काम करती हैं, कौन-कौन से बिजनेस सेगमेंट और क्षेत्र में मौजूद हैं, उसके पास कौन-कौन से ब्रांड और प्रोडक्ट हैं, क्या-क्या जॉइंट वेंचर या सहायक कंपनियां हैं, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट कहां स्थित हैं, प्रमोटर और मैनेजमेंट के बारे में विवरण। इस सेक्शन को पढ़कर, आप समझ सकते हैं कि कंपनी का काम क्या है। 

ऑफर कितने तरह के होते है?

IPO के दो भाग होते है। पहला होता है ‘ऑफर फॉर सेल’ और दूसरा है ‘फ्रेश इश्यू’। 

IPO में निवेश

 

ऑफर फॉर सेल: ऑफर फॉर सेल में कंपनी के मौजूदा शेयरधारक पब्लिक निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल जाते हैं। इसमें जो भी पैसा IPO से आता है वह इन शेयरधारकों को मिलता है न कि कंपनी को। 

फ्रेश इश्यू: इसमें कंपनी नए शेयर पब्लिक निवेशकों को देती है और इसके माध्यम से जो पैसा मिलता है, वह सीधी कंपनी में इस्तेमाल किया जाता है, जिसे अलग-अलग काम में शामिल किया जा सकता है। 

इसलिए, अब तक आप समझ गए होंगे कि अगर कंपनी का IPO पूरा ‘ऑफर फॉर सेल’ है तो ये एक माइनस प्वाइंट है, क्योंकि मौजूदा शेयरधारक हैं, जो कंपनी के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं, वह बहार जाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके विपरीत दोनों भागों का मिला-जुला या पूरा फ्रेश इश्यू होना अच्छा होता है, क्योंकि कुछ पैसा कंपनी को भी मिलता है।

हालंकि, ये गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि जो IPO सिर्फ ‘ऑफर फॉर सेल’ होते हैं, उनमें निवेश करना अच्छा नहीं होता है!

इश्यू का उदेश्य

फ्रेश इश्यू IPO के लिए, निवेशकों को ये जानना चाहिए कि वो पैसा किस तरह इस्तेमाल होगा। ये सब जानकारी प्रॉस्पेक्टस में होती हैं। जहां कंपनी विस्तार से बताती है कि कितना पैसा, किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होगा। क्योंकि ये राशि कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग में या कंपनी के बिजनेस ऑपरेशंस को बढ़ाने में इस्तेमाल होती है। इस सेक्शन को पढ़कर निवेशकों को ये पता चल जाता है कि उनका पैसा कहाँ जा रहा है!

संभावित जोखिमों की जांच करना

रिस्क यानि जोखिम वो है जो सब कुछ हिसाब करने के बाद भी बाकी रह जाता है और इससे बचा नहीं जा सकता, लेकिन इसे कम किया जा सकता है!

प्रॉस्पेक्टस का एक और बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है जिस पर बहुत कम निवेशक ध्यान देते है। यह हिस्सा कंपनी के सामने आने वाले खतरों के बारे में बताता है। ये ख़तरे दो तरह के होते हैं: कंपनी-विशिष्ट जोखिम और व्यापक-आर्थिक जोखिम। इस सेक्शन को पढ़ने से निवेशकों को ये समझ आता है कि सब कुछ उतना अच्छा नहीं होता जितना दिख रहा है, क्योंकि हर कंपनी को कुछ न कुछ रिस्क होता ही है।

कंपनी-विशिष्ट जोखिमों में ग्राहक और स्थान जैसे जोखिम शामिल हो सकते हैं, जैसे कि ग्राहक या स्थान का बड़ा हिस्सा कंपनी के कमाई का भाग हो या वैश्विक कमोडिटी बाजारों के कारण बदलते हुए कच्चे माल के खर्चे का खतरा। जबकी व्यापक आर्थिक जोखिमों में ये खतरा हो सकता है कि विदेशी बाजार में ब्याज दरें बढ़ने के कारण कर्ज की लागत बढ़ जाए या फिर किसी युद्ध के कारण कंपनी के व्यवसाय पर असर।

मैनेजमेंट गुणवत्ता का आकलन करना

अगले कदम में, आपको ये ध्यान रखना चाहिए कि आप एक निवेशक के रूप में कंपनी के मैनेजमेंट को काबिल समझ रहे हैं, जो बिजनेस चलाने के लिए काफी है। ये भी देखा जा सकता है कि वो कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति खराब नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ कोई अपराध या कानूनी मामला नहीं है, और जो भी उन्होंने कंपनी को लेकर प्रॉमिस किए है वह समय से पूरे किए है या नहीं हैं। इसका पता लगाने के लिए आप पिछले मैनेजमेंट इंटरव्यू को पढ़ सकते हैं। मैनेजमेंट की गुणवत्ता का मूल्यांकन करने के बाद, प्रॉस्पेक्टस में कोई भी ऑडिटर की राय को भी देखना चाहिए (अगर हो)। कंपनी के ऑडिटर कंपनी के वित्तीय मामलों में कुछ गड़बड़ महसूस करते हैं या कुछ शक हो, तो वो अपनी राय देते हैं।

फाइनेंशियल को समझना

फाइनेंशियल कंपनी की पूरी कहानी को दर्शाते है और ये देखने के लिए कि क्या ये फाइनेंशियल स्ट्रॉन्ग हैं, एक निवेशक को कंपनी के फाइनेंशियल को ध्यान से देखना चाहिए। यह फाइनेंशियल दिखायेंगे कि बिक्री कितनी है, ऑपरेशन से आई रकम, और टैक्स के बाद लाभ कितने वर्षों से बढ़ रहा है, ये कंपनी कितनी मजबूत है और बहुत कुछ। 

जहां तक कंपनी का मार्जिन है, ये बताएगा कि एक प्रोडक्ट बेचने पर सभी खर्चे काट कर कितना बचता है। इसके साथ ही, प्रॉफिट रेश्यो (ROCE/ROE) से ये मालूम होगा कि कंपनी की कैपिटल एलोकेशन पॉलिसी कैसी है। एक और फाइनेंशियल जिसे देखा जा सकता है, वो है कंपनी के कर्ज का उसके इक्विटी कैपिटल के साथ संबंध। ये अनुपत अनुचित रूप से अधिक नहीं होना चाहिए। 

अंत में, कैश फ्लो स्टेटमेंट बताएगा कि जो प्रॉफिट स्टेटमेंट में लिखा जा रहा है, वो असल में नकदी में बदल रहा है या नहीं! इसलिए, अगर IPO प्रॉस्पेक्टस को निवेश से पहले ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। 

समान कंपनियों के साथ तुलना

समान कंपनियों के साथ तुलना करने से निवेशक को ये आइडिया मिल जाता है कि कंपनी किस वैल्यूएशन पर ट्रेड करेगी। अगर कंपनी अपनी प्रतियोगियों कंपनियों से अधिक कीमत पर IPO ला रही है, तो ऐसा सिर्फ इस बजह से होना चाहिए कि वह प्रतियोगियों कंपनियों से बेहतर काम कर रही हो। जबकी अगर किसी कंपनी के IPO का प्राइस प्रतियोगियों कंपनियों से कम है, तो ये निवेशकों के लिए आकर्षण हो सकता है, बशर्ते कंपनी को अपने प्रतियोगियों कंपनियों से किसी भी प्रकार का नुकसान न हो। 

IPO प्रॉस्पेक्टस में प्रतियोगियों कंपनियों के नाम एवं जानकारी शामिल होती है जिनकी मदद से सही वैल्यूएशन का अनुमान लगा सकते है। इसके साथ ही इंडस्ट्री एवरेज वैल्यूएशन के साथ भी तुलना की जा सकती है। 

निष्कर्ष

अंत में, ये पता लगाने के लिए कि लिस्टिंग के दिन कंपनी के शेयर का क्या मूल्य होगा, आप ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) देख सकते है। GMP एक ऐसा प्रीमियम है जिसके आधार पर कंपनी का शेयर अनऑफिशियल (ग्रे) मार्केट में लिस्टिंग के लिए कुछ हफ़्ते पहले ट्रेड होता है। 100 रुपये के IPO मूल्य के साथ अगर GMP 30 रुपये है, तो इसका मतलब है कि वो लिस्टिंग के दिन 130 रुपये पर लिस्ट होगा, जिससे निवेशकों को 30% लाभ होगा।

हालंकि, यह ध्यान रखे कि IPO में निवेश करने के लिए GMP एक मात्र फैक्टर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अगर मार्केट सेंटीमेंट सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग की तिथि के बीच अनुकूल नहीं होते हैं, तो यह प्रीमियम ख़त्म हो सकता है और अंत में डिस्काउंट प्राइस पर IPO खुल सकता है। इसलिए, ध्यान से IPO प्रॉस्पेक्टस को समझना, और फिर GMP से इशारा लेने का एक अच्छा तरीका है!

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।

*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर