कुछ साल पहले तक भारत के पब्लिक सेक्टर के बैंक (PSBs) बढ़ते NPAs, कमजोर बैलेंस शीट और कम मुनाफे के कारण निवेशकों के लिए चिंता का विषय थे। लेकिन इसी मुश्किल दौर से एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। रिफॉर्म्स, पूंजी समर्थन, बैंक मर्जर और डिजिटल बदलाव के जरिए PSBs ने खुद को दोबारा मजबूत किया। आज ये बैंक सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि बेहतर एसेट क्वालिटी, मजबूत पूंजी और स्थिर मुनाफे के साथ भारत की आर्थिक ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं जिससे निवेशकों का भरोसा भी वापस लौटा है।
आइए इस इन्फोग्राफिक में भारतीय पब्लिक सेक्टर बैंक्स के संकट से निकलने के सफर को समझें।

निष्कर्ष
PSBs की मौजूदा तस्वीर पहले से बिल्कुल अलग है। कम NPAs, मजबूत कैपिटल बफर, बेहतर प्रोफिटेबिलिटी और क्लीन बैलेंस शीट यह दिखाते हैं कि सेक्टर अब अधिक स्थिर और अनुशासित हो चुका है। निवेशकों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि मजबूत बैंकिंग सिस्टम का मतलब है सस्टेनेबल ग्रोथ और कम जोखिम। आगे चलकर, क्रेडिट ग्रोथ, डिजिटल विस्तार और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट PSBs को भारत की आर्थिक कहानी का अहम हिस्सा बनाए रख सकते हैं।
*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर