त्यौहारों का सीजन चल रहा है, और शॉपिंग एक्टिविटी में तेजी देखी जा रही है। इस खुशी में इजाफा करते हुए, सरकार ने मौजूदा 12% और 28% कैटेगरी की GST दरों को घटाकर जल्द ही 5% और 18% करने की घोषणा की है। इसी समय, शॉपिंग वेबसाइट्स प्रोडक्ट्स पर नो-कॉस्ट EMI ऑप्शन दे रही हैं, जो न सिर्फ ग्राहकों को शॉपिंग के लिए आकर्षित करती हैं क्योंकि इसमें कोई अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं होता, बल्कि इसका मतलब यह भी है कि खरीदारी पर आपको ब्याज नहीं देना होगा। ये ऑफर आकर्षक लगते हैं, लेकिन खरीदारी का फैसला लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि ये वास्तव में कैसे काम करते हैं।
आइए समझते हैं कि नो-कॉस्ट EMI कैसे काम करता है, इससे पहले कि आप शॉपिंग के दौरान इसे चुनें।
नो-कॉस्ट EMI स्कीम कैसे काम करती है?
नो-कॉस्ट EMI एक पेमेंट प्लान है जिसमें आप किसी प्रोडक्ट या सर्विस की कीमत को बिना कोई ब्याज चुकाए मासिक किस्तों में बाँट सकते हैं। आप केवल प्रोडक्ट की असली कीमत ही चुकाते हैं, अतिरिक्त चार्ज नहीं। नो-कॉस्ट EMI दो तरीकों से काम कर सकती है:
डिस्काउंट ब्याज दर के बराबर: इसमें, रिटेलर प्रोडक्ट पर उतना डिस्काउंट देता है, जितना ब्याज एक रेगुलर EMI (ब्याज के साथ) पर आमतौर पर लगता है। इस तरह, आप कुल मिलाकर वही कीमत चुकाते हैं लेकिन उसे कई महीनों में कर सकते हैं।
उदाहरण: एक स्मार्टफोन जिसकी कीमत ₹24,000 है, उसका नो-कॉस्ट EMI ₹4,000 प्रति माह 6 महीने के लिए हो सकता है। कुल पेमेंट ₹24,000 ही रहेगा क्योंकि रिटेलर ने कीमत को एडजस्ट कर दिया है ताकि सामान्य ब्याज कवर हो जाए।
प्रोडक्ट प्राइस में ब्याज शामिल करना: इस तरीके में रिटेलर प्रोडक्ट की शुरुआती कीमत में ही ब्याज जोड़ देता है। आप थोड़ी अधिक कीमत चुकाते हैं, लेकिन EMI पर अलग से कोई ब्याज नहीं लगता।
उदाहरण: एक लैपटॉप जिसकी कीमत ₹50,000 है, वह नो-कॉस्ट EMI पर ₹52,000 में बेचा जा सकता है। आप 6 महीने के लिए ₹8,666 प्रति माह देंगे और कोई अलग ब्याज चार्ज नहीं होगा।
सके अलावा, प्रोडक्ट्स को नो कॉस्ट EMI पर खरीदने की कुछ एलिजिबिलिटी की शर्तें होती हैं, जिनमें आमतौर पर अच्छा क्रेडिट स्कोर, पर्याप्त कार्ड लिमिट और कभी-कभी कम से कम डॉक्यूमेंटेशन शामिल होता है।
क्या नो-कॉस्ट EMI ऑप्शन फायदेमंद है?
नो-कॉस्ट EMI शुरुआत में आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसे चुनने से पहले फायदे और जोखिम तौलना जरूरी है। जो स्मार्ट डील लगती है, उसमें कभी-कभी छुपे खर्च होते हैं या यह आर्थिक दबाव ला सकती है। ध्यान रखने योग्य कुछ बिंदु:
छिपे हुए चार्जेस: कुछ बैंक या रिटेलर प्रोसेसिंग फीस या जल्दी क्लोजर पर पेनल्टी जोड़ सकते हैं।
उदाहरण: अगर आपने वॉशिंग मशीन नो-कॉस्ट EMI पर खरीदी और ₹1,000 की प्रोसेसिंग फीस देनी पड़ी, तो डील वास्तव में फ्री नहीं रही।
बढ़ी हुई प्रोडक्ट कीमतें: यह ऑप्शन अक्सर उन्हीं प्रोडक्ट्स पर मिलता है जिनमें मार्जिन ज्यादा हो। कीमत कभी-कभी बढ़ा दी जाती है ताकि ब्याज कवर हो सके।
उदाहरण: एक फोन जो कैश पर ₹20,000 में बिकता है, वह नो-कॉस्ट EMI पर ₹21,000 में लिस्ट हो सकता है।
अत्यधिक खर्च का जोखिम: आसान किस्तें आपको ऐसी चीजें खरीदने के लिए लुभा सकती हैं जिनकी जरूरत नहीं या जिन्हें लंबे समय तक वहन करना मुश्किल हो।
उदाहरण: आप हाई-एंड टेलीविजन EMI पर खरीद सकते हैं, भले ही वह आपके मासिक बजट पर दबाव डाल दे।
क्रेडिट स्कोर पर असर: अगर कोई EMI मिस हो जाती है तो आपका क्रेडिट स्कोर गिर सकता है, जिससे आगे अच्छे रेट पर लोन पाना मुश्किल हो जाएगा।
उदाहरण: फ्रिज की खरीद पर एक EMI मिस करने से बाद में कार लोन के लिए क्वालिफाई करना कठिन हो सकता है।
सबसे अच्छा नो-कॉस्ट EMI प्लान कैसे चुनें?
अगर आपको किसी प्रोडक्ट की सच में जरूरत है और आप समय पर इंस्टॉलमेंट्स चुकाने के बारे में आश्वस्त हैं, तो नो-कॉस्ट EMI उसे खरीदने का एक स्मार्ट तरीका हो सकता है। यह आपको बिना अपफ्रंट चुकाए वह चीज़ पाने की सुविधा देता है, जो तब मददगार होता है जब आप तंग बजट पर हों या कोई महंगा सामान खरीद रहे हों। सबसे अच्छा विकल्प चुनने के लिए, इन बातों का ध्यान रखें।
- एलिजिबिलिटी जांचें: हर ऑफर के अपने नियम होते हैं। सुनिश्चित करें कि आप प्रोडक्ट और लेंडर के लिए पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।
- नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें: इसमें हिडन कॉस्ट हो सकती हैं। प्रोसेसिंग फीस, पेनल्टी, या अन्य शुल्क को समझने के लिए नियमों को अच्छी तरह से पढ़ें।
- ऑफर्स की तुलना करें: अलग-अलग बैंक और रिटेलर अलग-अलग EMI डील्स देते हैं। निर्णय लेने से पहले हमेशा तुलना करें।
- बजट बनाएं: EMI चुनने से पहले अपनी मासिक क्षमता जान लें। यह देखने के लिए गणना करें कि कुल लागत आपके बजट में फिट होती है या नहीं।
- समय पर भुगतान करें: नियमित EMI भुगतान आपको लेट फीस से बचाते हैं और आपके क्रेडिट स्कोर को भी सुरक्षित रखते हैं।
- कॅन्सलेशन नियम पढ़ें: हर प्लान में कॅन्सलेशन की एक अवधि होती है। जीरो-कॉस्ट EMI लेने के बाद इसे कॅन्सल करने पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
- प्रोसेसिंग फीस: कुछ रिटेलर्स या बैंक यदि आप बीच में EMI प्लान कॅन्सल करते हैं तो फीस मांग सकते हैं, इसके बारे में ठीक से जानकारी न होने से अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
नो-कॉस्ट EMI बनाम रेगुलर EMI: क्या अंतर है?

क्या आपको नो-कॉस्ट EMI लेना चाहिए या फुल पेमेंट करना चाहिए?
अगर आपके पास पूरी राशि हाथ में या बैंक खाते में है, तो जहां तक संभव हो जीरो-कॉस्ट EMI से बचना और इसके बजाय पूरी राशि अपफ्रंट चुकाना बेहतर है। फुल पेमेंट करने से आप सीधे छूट या कैशबैक ऑफर्स का लाभ उठा सकते हैं जो कई रिटेलर्स और बैंक देते हैं। मर्चेंट बैंकर भी प्रसिद्ध ब्रांड्स के साथ टाई-अप करके चुनिंदा क्रेडिट कार्ड्स पर अतिरिक्त बचत ऑफर करते हैं, जिससे आपका कुल खर्च और कम हो जाता है।
यदि फिर भी आप जीरो-कॉस्ट EMI लेना चाहते हैं, तो EMI के माध्यम से भुगतान करने और पूर्ण भुगतान करने के बीच नेट कॉस्ट के अंतर की जांच करना ज़रूरी है। हमेशा अपनी चुकौती क्षमता की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि आप बिना तनाव के किश्तों का भुगतान कर सकते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जीरो परसेंट इंटरेस्ट का विचार वास्तव में मौजूद नहीं है। ज्यादातर मामलों में, हिडन कॉस्ट या तो प्रोडक्ट की कीमत में शामिल होती है या प्रोसेसिंग फीस और टैक्स के जरिए एडजस्ट की जाती है। एक कैश खरीदार को किसी प्रोडक्ट पर 8 से 10% की छूट मिल सकती है, जबकि एक नो-कॉस्ट EMI खरीदार पूरी कीमत के साथ-साथ प्रोसेसिंग फीस और GST जैसे अतिरिक्त खर्च भी चुकाता है।
इसके अलावा, ये ऑफर्स अक्सर चुनिंदा प्रोडक्ट्स और अवधि तक सीमित होते हैं, और फोरक्लोजर चार्जेस की वजह से जल्दी चुकौती महंगी हो जाती है। एक भी EMI मिस करने पर जुर्माना लग सकता है और आपके क्रेडिट हिस्ट्री को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, नो-कॉस्ट EMI शायद ही कभी फ्री होती है। इसे चुनने से पहले, कुल लागत की तुलना अपफ्रंट पेमेंट से सावधानीपूर्वक करें और सुनिश्चित करें कि यह वास्तव में आपके बजट में फिट बैठता है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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