तेजी से बढ़ रहा आयुर्वेद का मार्केट: क्या है वजह?

आयुर्वेद प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है! आगामी 5 वर्षों में भारतीय आयुर्वेद मार्केट 1.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। क्या है वजह?
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आयुर्वेद, हजारों साल पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति, आज के समय में फिर से सुर्खियों में है। जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक उपचारों पर आधारित यह चिकित्सा पद्धति अब तेजी से लोकप्रिय हो रही है, न केवल भारत में बल्कि ग्लोबल स्तर पर भी बढ़ रही है। इस बढ़ती लोकप्रियता का नतीजा आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के मार्केट में भी देखने को मिल रहा है। आइए देखें आयुर्वेद प्रोडक्ट्स के मार्केट में आने वाले समय में क्या उछाल आने की संभावना है।

क्या है मामला?

द इकॉनोमिक टाइम्स के अनुसार, आयुर्वेदा टेक स्टार्टअप निरोग स्ट्रीट ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि भारत के आयुर्वेद प्रोडक्ट का मार्केट में अगले पांच वर्षों में तेजी से वृद्धि होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि FY27-28 तक यह मार्केट 1.2 लाख करोड़ रुपये यानि 16.27 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह मौजूदा मार्केट वैल्यू 57,450 करोड़ रुपये से दोगुना से भी अधिक है।

क्यों हो रहा है आयुर्वेद इतना लोकप्रिय?

इस ग्रोथ के पीछे कई कारण हैं:

प्राकृतिक उपचार: लोग रासायनिक दवाओं के दुष्परिणामों से बचने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों की ओर रुख कर रहे हैं।

ग्लोबल डिमांड: भारत के साथ-साथ विदेशों में भी आयुर्वेद की डिमांड बढ़ रही है।

सरकारी पहल: सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जिससे इंडस्ट्री को बल मिल रहा है।

नए उद्यमी: इस बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए आयुर्वेद क्षेत्र में नए उद्यमी भी आ रहे हैं, जो इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।

यह आयुर्वेद का स्वर्णिम काल हो सकता है। यह न केवल लोगों को स्वस्थ रहने में मदद करेगा बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

भारत में विभिन्न कंपनियां एंव स्टार्टअप आयुर्वेदा के क्षेत्र में काम करते है, जैसे कि बैद्यनाथ आयुर्वेद, डाबर इंडिया लिमिटेड, हमदर्द इंडिया, झंडू केयर, केरल आयुर्वेद लिमिटेड आदि। लेकिन कुछ ही कंपनियां भारतीय स्टॉक एक्सचेंज जैसे कि NSE और BSE पर लिस्टेड है जिनमें डाबर इंडिया, पतंजली, केरला आयुर्वेद लिमिटेड आदि शामिल है।

आयुर्वेदा सेक्टर में निवेश के इच्छुक निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों की तुलना ग्रोथ, आकर्षक वैल्यूएशन, P/E रेश्यो आदि के आधार पर करके बेहतर निवेश की ओर बढ़ सकते है।

भविष्य की बातें

इन्वेस्ट इंडिया के अनुसार, भारत ग्लोबल स्तर पर आयुर्वेद और अल्टरनेटिव मेडिसिन का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक माना जाता है। साथ ही, बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार, निरोग स्ट्रीट के एक सर्वे का कहना है कि आयुर्वेद प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का मार्केट तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2021 से 2026 तक, पूरे आयुर्वेद मार्केट में 15% की CAGR से ग्रोथ होने की संभावना है।

भारत मे आयुर्वेदिक इंडस्ट्री की मार्केट वैल्यू

जबकि, स्टैटिस्टा के अनुसार, 2019 में जहां भारत का आयुर्वेद मार्केट 335 अरब रुपये का था, वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक ये आंकड़ा एक ट्रिलियन रुपये के पार चला जाएगा। ये आंकड़े बताते हैं कि आयुर्वेद किस रफ्तार से तरक्की कर रहा है।

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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
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