JP मॉर्गन इंडेक्स में भारतीय बॉन्ड शामिल: कैसा होगा असर?

JP मॉर्गन इंडेक्स में भारतीय बॉन्ड शामिल: कैसा होगा असर?
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भारतीय सरकारी बॉन्ड को प्रसिद्ध JP मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट्स बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किया गया है। ये भारतीय फाइनेंशियल मार्केट के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे ना सिर्फ ये पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है बल्कि विदेशी निवेशकों को भी ये भरोसा दिलाता है कि भारत का डेब्ट मार्केट मजबूत और भरोसेमंद है।

आइए अब इस बात पर चर्चा करें कि इस इंडेक्स में शामिल होने का क्या मतलब है और ये भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगा।

क्या है मामला?

28 जून 2024 को, सरकारी बॉन्ड आधिकारिक तौर पर JP मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट बॉन्ड इंडेक्स का हिस्सा बन गया, जो भारत के डेब्ट मार्केट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। समावेशन की घोषणा सितंबर 2023 में हुई थी। लेकिन ये सिर्फ घोषणा भर नहीं रही। इस समावेशन का असर तत्काल देखने को मिला। पिछले नौ महीनों में, यानी सितंबर 2023 से ही, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड मार्केट में लगभग 10 अरब डॉलर का निवेश किया है।

JP मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट बॉन्ड इंडेक्स में भारतीय बॉन्ड्स का समावेशन 10 महीनों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जून 2024 में इसकी शुरुआत 1% वेटेज के साथ होगी और हर महीने 1% पॉइंट बढ़ाते हुए 31 मार्च 2025 तक अधिकतम 10% वेटेज तक पहुंच जाएगा।

कॉर्पोरेट बॉन्ड और रुपया पर असर

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेब्ट मार्केट में अब तक कुल 9 अरब डॉलर का निवेश किया है। वहीं, इक्विटी मार्केट से पूंजी निकालने का रुझान रहा है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, निखिल अग्रवाल का कहना है कि विदेशी निवेशकों का ये रुझान कुछ हद तक JP मॉर्गन बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की वजह से आया है। उनका यह भी कहना है कि “ये निवेश भारतीय रुपये को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा”।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

JP मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट बॉन्ड इंडेक्स $213 बिलियन के एसेट्स को मैनेज करता है और अनुमान लगाया जा रहा है कि भारतीय बॉन्ड्स को इस इंडेक्स में 10% वेटेज मिलने से मार्च 2025 तक भारतीय मार्केट में 21 अरब डॉलर (लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आ सकता है, यह मानते हुए कि निवेशकों के पास शुरू में भारत के सॉवरेन बॉन्ड के लिए शून्य वेटेज था। निरंतर इनफ्लो से भारतीय बॉन्ड की प्राइस में मजबूती बने रहने की उम्मीद है।

इसके अलावा, JP मॉर्गन इंडेक्स में शामिल होने के बाद ब्लूमबर्ग और FTSE जैसे दूसरे ग्लोबल इंडेक्स भी अपने पोर्टफोलियो में भारतीय बॉन्ड को शामिल करने पर विचार कर सकते हैं। इससे भारत में और भी ज्यादा विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।

भविष्य की बातें

द फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम से लॉन्गटर्म अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था को कम उधारी लागत से लाभ होगा। सरकारी बॉन्ड यील्ड्स में 15-20 बेसिस पॉइंट्स तक की कमी आ सकती है, जिससे सरकार सस्ती शर्तों पर धन जुटा सकेगी। इससे सरकार को महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्टर प्रोजेक्ट्स और डेवलपमेंट पर अपने खर्च को बनाए रखने या बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह देश के विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में भी मदद करेगा।

आज के लिए सिर्फ इतना ही है। उम्मीद करते है यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले।

*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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