भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बदल रही है, भारत सबसे बड़ी इमर्जिंग मार्केट अर्थव्यवस्था है। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में प्रमुख भारतीय राज्यों के रेवेन्यू में मामूली लेकिन आशाजनक ग्रोथ होने की संभावना है। यह देश की इकोनॉमिक हेल्थ का एक सकारात्मक इंडिकेटर है।
आइए अब उन फैक्टर्स पर गहराई से विचार करें जो राज्य के रेवेन्यू को बढ़ावा देने की संभावना रखते हैं और यह भी समझते हैं कि आर्थिक अनिश्चितताओं के आलोक में राज्य अधिक रेवेन्यू के साथ क्या कर सकते हैं।
क्या है मामला?
क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शीर्ष 18 भारतीय राज्य, जो भारत की GDP में 90% का योगदान करते हैं, को इस वित्तीय वर्ष में अपने रेवेन्यू में 8-10% की ग्रोथ देखने की उम्मीद है। इन राज्यों का कुल रेवेन्यू इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 38 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि यह वृद्धि दर मामूली है, लेकिन इसे पिछले वित्तीय वर्ष की 7.5% वृद्धि से अधिक होने की उम्मीद है। राजस्व में वृद्धि मुख्य रूप से उच्च GST संग्रह और केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदान द्वारा समर्थित होगी, जो मिलकर कुल राज्य राजस्व का लगभग 50% हिस्सा बनाते हैं।
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर बिक्री कर से राजस्व इस वित्तीय वर्ष में पिछले वित्तीय वर्ष की स्थिरता के बाद 3-4% की मामूली वृद्धि देखने को मिलेगी। यह वृद्धि वाहन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण ईंधन की उच्च खपत से होगी, जबकि कर ढांचा अधिकांशतः अपरिवर्तित रहेगा। हालांकि खपत में ~5-6% की वृद्धि की उम्मीद है, इस मार्च में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई कटौती बिक्री कर संग्रह पर ~200 bps का प्रभाव डालेगी।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
क्रिसिल रेटिंग्स द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में राज्य के रेवेन्यू के अन्य स्रोतों की भविष्यवाणी भी की गई है, जिसका जानकारी नीचे दी गयी है:
- शराब से प्राप्त टैक्स रेवेन्यू, जो कुल कमाई का लगभग 10% हिस्सा है, स्थिर रहेगा और कंजम्पशन में वृद्धि के कारण इसमें 5-7% की वृद्धि हो सकती है।
- पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से सेल्स टैक्स और VAT कलेक्शन में 7-8% की ग्रोथ देखी जाएगी।
- 15वें वित्त आयोग द्वारा सेंट्रल डीवैल्यूएशन रीकमेंडेड में 12-13% की ड्यूल डिजिट की ग्रोथ देखी जाएगी।
भविष्य की बातें
क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, FY2025 में रियल GDP 6.8% की दर से बढ़ेगा। आर्थिक उतार-चढ़ाव राजस्व पूर्वानुमानों को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि अपेक्षा से अधिक कर राजस्व या अतिरिक्त केंद्रीय अनुदान राज्य वित्त को बढ़ावा दे सकते हैं। सतत वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों को अपने स्वयं के राजस्व को बढ़ाने और संग्रहण की दक्षता को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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