कैसे भारत ने समय से पहले पूरा किया 300 GW क्लीन पावर लक्ष्य?

कैसे भारत ने समय से पहले पूरा किया 300 GW क्लीन पावर लक्ष्य?
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भारत ने 31 जुलाई तक 300 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। यह 2030 के 500 GW टारगेट का 60 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है। देश की कुल इंस्टॉल्ड क्षमता करीब 552 GW है, जिसमें नॉन-फॉसिल सोर्सेज की हिस्सेदारी अब 54 फीसदी से ज्यादा है।

आइए भारत की 300 GW नॉन-फॉसिल क्षमता की उपलब्धि को विस्तारपूर्वक समझें और जानें क्या यह रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर निवेशकों के लिए एक बड़ा निवेश अवसर बन सकता है।

क्या है मामला?

न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी मिनिस्ट्री के मुताबिक, 31 जुलाई तक भारत की नॉन-फॉसिल क्षमता 300.50 GW पर पहुंच गई है। सोलर पावर सबसे बड़ा कंपोनेंट है जिसकी क्षमता 164.59 GW है, उसके बाद विंड पावर 58.14 GW और हाइड्रो पावर 57.24 GW है। बाकी क्षमता में 11.75 GW बायो-पावर और 8.78 GW न्यूक्लियर पावर शामिल है।

सोलर क्षमता 2014 में 2.8 GW से बढ़कर अब करीब 165 GW हो गई है, जबकि विंड क्षमता 21 GW से बढ़कर 58.14 GW पर पहुंची है। सरकार ने 2025-26 में रिकॉर्ड 55.29 GW नॉन-फॉसिल क्षमता जोड़ी, जिसमें सोलर का योगदान 44.6 GW और विंड का 6 GW रहा है।

Q2 2026: राजस्थान, UP और गुजरात की बढ़त

अप्रैल-जून 2026 में भारत ने करीब 16.12 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी, जो सालाना आधार पर 67.8 फीसदी की ग्रोथ है। IEEFA के डेटा के मुताबिक, इस दौरान गुजरात ने सबसे ज्यादा 4.43 GW क्षमता जोड़ी, उसके बाद राजस्थान 2.51 GW और उत्तर प्रदेश 1.69 GW के साथ रहा। इन तीनों राज्यों का योगदान कुल एडिशन का 53 फीसदी से ज्यादा रहा।

यूपी ने Q2 2026 में सबसे बड़ी Q-o-Q वृद्धि दर्ज की, Q1 2026 की तुलना में इंस्टॉलेशन 1.32 GW बढ़ा। मध्य प्रदेश इकलौता दूसरा बड़ा राज्य रहा जहां एडिशन 38.4 मेगावॉट बढ़े, जबकि राजस्थान और तमिलनाडु में Q1 2026 के मुकाबले गिरावट आई। सोलर ने कुल नेट एडिशन का 73.8 फीसदी योगदान दिया, जबकि लार्ज हाइड्रो ही इकलौता सोर्स रहा जिसमें नेट क्षमता करीब 30 फीसदी बढ़ी।

विंड क्षमता एडिशन Q2 2025 से हर तिमाही करीब 1.48 GW पर स्थिर बना हुआ है, जबकि कोल क्षमता एडिशन Q-o-Q आधार पर 4.8 फीसदी घटा। गुजरात और महाराष्ट्र ने सबसे अधिक विंड क्षमता जोड़ी और रिन्यूएबल क्षमता को और मजबूत किया।

H1 2026 और बिजली डिमांड का जोश

H1 2026 में भारत ने 35.13 GW नई पावर क्षमता जोड़ी, जो H1 2025 के 22.82 GW से 54 फीसदी ज्यादा है। इसमें रिन्यूएबल्स की हिस्सेदारी 87.1 फीसदी यानी 30.58 GW रही और अकेले सोलर ने 26.34 GW क्षमता जोड़कर कुल इंस्टॉलेशन का तीन-चौथाई हिस्सा संभाला।

डिमांड साइड पर भी तेजी दिख रही है। जुलाई में देश की बिजली खपत सालाना आधार पर 10.93 फीसदी बढ़कर 170.70 बिलियन यूनिट्स पर पहुंच गई, जो जुलाई 2025 में 153.88 BU थी। पीक पावर डिमांड भी बढ़कर 270.20 GW हो गई, जो मई में बने ऑल-टाइम रिकॉर्ड 270.82 GW के करीब है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

300.50 GW से 500 GW के टारगेट तक पहुंचने के लिए भारत को 2030 तक करीब 199.5 GW और जोड़ना है। यानी आने वाले सालों में सोलर, विंड, स्टोरेज और ट्रांसमिशन सेगमेंट में कैपेक्स का जोर बना रहेगा। सोलर मैन्युफैक्चरिंग में भी तेजी है ALMM लिस्ट में सोलर PV मॉड्यूल्स की डोमेस्टिक क्षमता 2014 के 2.3 GW से बढ़कर 200 GW पार कर चुकी है, जिसमें PLI स्कीम का अहम रोल है।

रिन्यूएबल जनरेशन 2014-15 के 190.96 BU से बढ़कर 2025-26 में 477.79 BU हो गई है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन, उपयोग और एक्सपोर्ट के लिए भारत को हब बनाने की कोशिश चल रही है। हालांकि, IEEFA की चेतावनी है कि पावर सेक्टर ट्रांजिशन के साथ सिस्टम रिलायबिलिटी और फाइनेंशियल वायबिलिटी के लिए पॉलिसी और प्लानिंग फ्रेमवर्क की जरूरत है।

भविष्य की बातें

पावर मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत की इंस्टॉल्ड पावर क्षमता 2031-32 तक 874 GW पहुंच सकती है। राज्यसभा में दिए गए जवाब में मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर पावर श्रीपद नाइक ने कहा कि सरकार थर्मल, हाइड्रो, न्यूक्लियर और रिन्यूएबल सोर्सेज के साथ-साथ एनर्जी स्टोरेज और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी फोकस कर रही है। 30 जून 2026 तक कुल क्षमता 5,48,858 MW थी, जिसमें नॉन-फॉसिल का हिस्सा 54.18 फीसदी और हाइड्रो सहित रिन्यूएबल का हिस्सा 52.58 फीसदी था।

कोल सबसे बड़ा इंडिविजुअल सोर्स बना हुआ है जिसकी क्षमता 2,24,158 MW है, जबकि सोलर 1,62,152 MW पर है। अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच 21,080 MW थर्मल क्षमता कमीशन हुई है, 47,545 MW निर्माणाधीन है और 16,000 MW के कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके हैं। वहीं 2035-36 तक थर्मल क्षमता की जरूरत करीब 3,15,000 MW आंकी गई है।

स्टोरेज पर जोर साफ दिखता है, 1,47,720 MW रिन्यूएबल क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 1,19,580 MW सोलर और 27,720 MW विंड शामिल है। इसके अलावा 15,870 MW/95,220 MWh के पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स और 15,754 MW/42,530 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स भी निर्माणाधीन हैं। ट्रांसमिशन के लिए 2022-23 से 2031-32 के बीच करीब 1,91,474 ckm ट्रांसमिशन लाइन्स और 1,274 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जोड़ने का प्लान है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

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