अक्टूबर 2024 का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है, क्योंकि 2024 के दौरान इस महीने में अब तक की सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली है। यह बिकवाली कई ग्लोबल और डोमेस्टिक फैक्टर्स से प्रेरित है, जिसने निवेशकों को चिंतित कर दिया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि FPI भारतीय शेयर मार्केट में बिकवाली क्यों कर रहे हैं, और इसका भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब है? आइए, इस बिकवाली के पीछे के कारणों और भविष्य के दृष्टिकोण पर चर्चा करें।
क्या है मामला?
अक्टूबर 2024 में भारतीय शेयर मार्केट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा की गई बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। NSDL के अनुसार, इस महीने 22 अक्टूबर 2024 तक इक्विटी में ₹72,136 करोड़ की बिकवाली हुई है, जो मासिक आधार पर अब तक की सबसे बड़ी बिकवाली है। 2024 की शुरुआत से ही मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था और जनवरी में ₹25,744 करोड़ की बिकवाली हुई, जिसके बाद फरवरी और मार्च में कुछ राहत मिली, जहां क्रमशः ₹1,539 करोड़ और ₹35,098 करोड़ का निवेश हुआ।

2024 के दौरान सिर्फ अक्टूबर में ही इक्विटी सेगमेंट में ₹72,136 करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली हुई।
इसके बाद अप्रैल और मई में फिर बिकवाली शुरू हुई, जहां ₹8,671 करोड़ और ₹25,586 करोड़ की निकासी हुई। जून, जुलाई और सितंबर में बाजार में निवेश देखने को मिला, और सितंबर में ₹57,724 करोड़ का सबसे बड़ा निवेश देखा गया। हालांकि, अक्टूबर में जबरदस्त बिकवाली ने मार्केट की स्थिति को एक बार फिर बिगाड़ दिया, जिससे भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स जैसे निफ़्टी और सेंसेक्स अक्टूबर माह में 4% से भी ज्यादा गिर चुके है।
FPIs भारतीय स्टॉक्स में बिकवाली क्यों कर रहे हैं?
US फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में मामूली कटौती की उम्मीद ने निवेशकों को US मार्केट की ओर आकर्षित किया है। इसके साथ ही, दूसरी तिमाही के कमजोर नतीजों ने भी भारतीय स्टॉक मार्केट ने निवेशकों की भावनाओं को प्रभावित किया है। हालांकि DIIs ने अक्टूबर माह में अब तक 77,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिसने मार्केट को संभाल रखा है।
साथ ही, हायर वैल्यूएशन, पश्चिम एशिया में तनाव और ‘चीन खरीदो, भारत बेचो’ की रणनीति ने इस महीने FPIs की बिकवाली को बड़े पैमाने पर प्रेरित किया है। मिंट के अनुसार, कई एनालिस्ट का मानना है कि भारतीय शेयर अभी भी हायर वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जो उनकी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते है। इसके अलावा, कंपनियों के सितंबर तिमाही के फाइनेंशियल रिजल्ट भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे है जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
FPI की रिकॉर्ड बिकवाली ने भारतीय शेयर मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ा दी है, जिससे निवेशकों के लिए यह समय चिंताजनक बन गया है। लेकिन अगर आप एक लॉन्गटर्म निवेशक हैं, तो यह गिरावट आपके लिए एक अवसर भी हो सकती है। क्योंकि इस समय आप बेहतर फंडामेंटल कंपनियों में अच्छे वैल्यूएशन पर एंट्री ले सकते है।
मंगलवार यानि 22 अक्टूबर 2024 के मार्केट प्रदर्शन की बात करें तो, निफ्टी मिडकैप 150 में 2.6%, निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 3.7%, और माइक्रोकैप 250 में 4.1% की गिरावट हुई है। इसके अलावा, पिछले सप्ताह मिडकैप इंडेक्स में 5.65% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 6.45% की गिरावट दर्ज की गई।
भविष्य की बातें
RBI के अक्टूबर बुलेटिन में भारत की FY25 के लिए 7.2% की GDP दर को बरकरार रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि दूसरी तिमाही में आई मंदी अस्थायी है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि त्योहारों के सीज़न में बढ़ी हुई खपत से अर्थव्यवस्था में तेजी लौटेगी और इससे कंपनियों की अर्निंग्स में सुधार हो सकता है।
हालांकि, मिंट के अनुसार, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार का कहना है कि बाजार की नकारात्मक भावनाओं के कारण किसी तेज और स्थायी सुधार की उम्मीद कम है, हालांकि कभी भी एक रिवर्सल संभव है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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