अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध ने कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित किया है, खासकर सोलर एनर्जी सेक्टर में। अमेरिका द्वारा चीनी सोलर पैनल पर लगाए गए भारी टैक्स ने भारतीय कंपनियों को एक सुनहरा मौका दिया है। इस नीति परिवर्तन का सीधा भारतीय कंपनियों को मिला है।
इस आर्टिकल में हम इस व्यापारिक नीति के प्रभाव को समझेंगे, खासकर कैसे भारतीय कंपनियों ने इस मौके का फायदा उठाकर खुद को स्थापित कर रही है।
क्या है मामला?
अमेरिका ने चीन में बने सोलर सेल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों पर उच्च टैक्स लगाने का निर्णय लिया है, जो 27 सितंबर 2024 से लागू हो गया है। इस निर्णय के तहत, चीन में बने EV पर 100% टैक्स, सोलर सेल्स पर 50%, और EV बैटरियों व अन्य खनिजों पर 25% टैक्स लागू है। इसके अतिरिक्त, 2025 से सोलर पैनल में इस्तेमाल होने वाले पॉलीसिलिकॉन पर भी 50% का इम्पोर्ट टैक्स लगाया जाएगा।
हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सोलर सेल और वेफर बनाने वाली मशीनरी पर कुछ छूट भी दी है, जो 1 जनवरी 2024 से 31 मई 2025 तक लागू रहेगी। इस प्रकार, भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में संभावनाओं का विस्तार हो रहा है, जिससे भारतीय सोलर और EV क्षेत्र को ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है।
अमेरिका ने क्यों लगाया चीनी प्रोडक्ट्स पर टैक्स?
अमेरिका का यह कदम डोमेस्टिक कंपनियों को बढ़ावा देने और चीन के सस्ते आयात पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से लिया गया। साथ ही, हाल ही में पेश किए गए मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम (Inflation Reduction Act) या IRA के तहत अमेरिका ने क्लीन एनर्जी में $370 बिलियन निवेश की योजना बनाई है, क्योंकि दुनिया में सोलर मॉड्यूल, वेफर और पॉलीसिलिकॉन के 90% से अधिक उत्पादन पर चीन का प्रभुत्व है, और EV का 70% उत्पादन भी चीन ही करता है।
अमेरिका ने चीनी प्रोडक्ट्स के ग्लोबल मार्केट में सस्ते दामों पर हावी होने के चलते कुछ वर्षों से इन आयातों पर पाबंदियां लगानी शुरू कर दीं। जून 2022 में, अमेरिका ने कम्बोडिया, मलेशिया, थाईलैंड, और वियतनाम जैसे देशों से आयात पर एंटी-डंपिंग और एंटी-सर्कम्वेंशन टैक्स लगाया, लेकिन सप्लाई बनाए रखने के लिए इन देशों से सोलर प्रोडक्ट्स को जून 2024 तक टैक्स-फ्री रखा गया।
भारतीय कंपनियों का उदय
अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए टैरिफ का फायदा भारतीय कंपनियों को भी मिल रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, मिनेसोटा में सोलर पैनल फैक्ट्री चलाने वाली कंपनी Heliene ने भारत की दूसरी सबसे बड़ी सोलर सेल निर्माता प्रीमियर एनर्जीज़ के साथ $150 मिलियन का जॉइंट वेंचर किया है, जिससे अमेरिका में एक नई फैक्ट्री स्थापित होगी।
इसके साथ ही, Heliene, जो पहले वियतनाम और मलेशिया से सेल आयात करती थी, अब मुख्य रूप से भारत से सेल खरीद रही है। वारी एनर्जीज लिमिटेड, जो भारत के सबसे बड़े सोलर मॉड्यूल निर्माताओं में से एक है, ने भी अमेरिका को किए गए निर्यात से अपनी अधिकतर आय अर्जित की है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
भारत के सोलर प्रोडक्ट्स का निर्यात 2023 में 227% बढ़कर $1.8 बिलियन तक पहुँच गया, जिसमें से 97% निर्यात अमेरिका को हुआ। भारत की सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2023 में 64.5 गीगावॉट और सेल निर्माण क्षमता 5.8 गीगावॉट हो चुकी है, जो 2026 तक क्रमशः 150 गीगावॉट और 75 गीगावॉट से अधिक हो सकती है।
इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2024-25 में सोलर पावर (ग्रिड) के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना को 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा, फरवरी 2024 में शुरू की गई पीएम-सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना, जिसका ऑउटले 75,000 करोड़ रुपये है, को 6,250 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है।
सरकार की यह पहल यह उन निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है, जो सोलर सेक्टर में निवेश करना चाहते है क्योंकि इससे भारतीय सोलर कंपनियों का उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ेगी।
भविष्य की दिशा
भारत का सोलर एनर्जी सेक्टर तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। अभी की बात करें तो सितम्बर 2024 तक भारत की सोलर एनर्जी उत्पादन क्षमता 90.76 GW है, जबकि सभी रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज की इंस्टॉल्ड क्षमता 201.45 GW है और भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट का है।
अमेरिकी टैक्स नीतियों के चलते भारतीय कंपनियों को एक स्थायी लाभ मिला है। साथ ही, सोलर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत की यह यात्रा जारी है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर