सोना, जिसे हमेशा से संपत्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है, ने 2025 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इसने यूरो को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिज़र्व एसेट बनने का गौरव प्राप्त किया है। लेकिन यह बदलाव क्यों हुआ, और इसका निवेशकों के लिए क्या मतलब है? आइए, इस आर्टिकल में सोने की इस नई भूमिका और भविष्य की संभावनाओं को समझते हैं।
क्या है मामला?
सोने ने यूरो को पीछे छोड़कर ग्लोबल रिज़र्व एसेट के रूप में दूसरा स्थान हासिल किया, जो केवल US डॉलर से पीछे है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में सोने का ग्लोबल आधिकारिक रिज़र्व में हिस्सा 20% तक पहुंच गया, जो 2023 में 16.5% था, जबकि यूरो का हिस्सा घटकर 16% रह गया। US डॉलर 46% हिस्से के साथ शीर्ष पर बना हुआ है।
सेंट्रल बैंक्स ने 2024 में 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा है। कुल मिलाकर, सेंट्रल बैंक्स के पास 2024 में 36,000 टन सोने का रिज़र्व था, जो 1960 के दशक के 38,000 टन के ऐतिहासिक स्तर के करीब है। सोने की कीमत 2024 में 26% और 2025 की दूसरी तिमाही तक 25% बढ़ी, जिससे यह $3,500 प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
क्यों बढ़ रही है सेंट्रल बैंक्स में सोने की भूख?
सेंट्रल बैंक्स की सोने की खरीदारी में वृद्धि के पीछे जिओपॉलिटिकल और आर्थिक फैक्टर्स दोनों हैं। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद, सेंट्रल बैंक्स ने सोने को “सुरक्षित आश्रय” के रूप में अपनाया। विश्व गोल्ड काउंसिल के 2024 सर्वेक्षण में, 60 सेंट्रल बैंक्स ने सोने को लॉन्गटर्म वैल्यू रिज़र्व और इन्फ्लेशन हेज, संकट के समय अच्छा प्रदर्शन, और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के लिए प्रभावी माना।
इमर्जिंग और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के एक-चौथाई सेंट्रल बैंक्स ने ‘प्रतिबंधों की चिंता’ या ‘अंतरराष्ट्रीय मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव’ को कारण बताया। चीन, भारत, और तुर्की ने 2021 के अंत से 600 टन से अधिक सोना जोड़ा। 2024 में सेंट्रल बैंक्स ने ग्लोबल सोने की डिमांड का 20% से अधिक हिस्सा लिया, जो 2010 के दशक में औसतन 10% था। US डॉलर की सुरक्षित स्थिति पर संदेह और US व्यापार नीतियों में बदलाव ने भी सोने की डिमांड बढ़ाई है।
मार्केट में गोल्ड की प्राइस क्यों चढ़ रही हैं?
फेड की दर कटौती की उम्मीदें: US इन्फ्लेशन के आँकड़े नरम पड़ने से फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरें कम करने की संभावना बढ़ी है। इससे रियल यील्ड्स घट रही हैं, जिससे बिना ब्याज वाली एसेट (सोना) आकर्षक बन रहा है।
जियोपॉलिटिकल तनाव: युद्ध जैसी अनिश्चित परिस्थितियों में सोना एक सुरक्षित एसेट माना जाता है और जब भी संघर्ष जैसी स्थिति आती है तो क्रूड ऑइल और ग्लोबल व्यापार पर भी असर पड़ सकता है, जो सोने को और ऊपर ले जाने के लिए प्रेरित करते हैं।
केंद्रीय बैंक्स की डिमांड: चीन और भारत जैसे देश लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसकी प्राइस को सपोर्ट मिल रहा है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
निवेशकों के लिए, सोने की यह स्थिति अवसर और सावधानी दोनों का संकेत है। सोने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड मजबूत रिटर्न का रहा है, और 2024 में प्राइस में 26% की वृद्धि इसे आकर्षक बनाती है। हालांकि, प्राइस में अस्थिरता और सेंट्रल बैंक्स की खरीदारी में कमी जोखिम पैदा कर सकती है।
विश्व गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 की पहली तिमाही में QoQ आधार पर सेंट्रल बैंक्स की सोने की खरीदारी में 33% की कमी आई, खासकर चीन में। फिर भी, सोना इन्फ्लेशन और जिओपॉलिटिकल जोखिमों के खिलाफ प्रभावी हेज माना जाता है। UBS ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट के मार्क हेफेले ने निवेशकों को सोने में हिस्सेदारी रखने की सलाह दी है और उनका मानना है कि ग्लोबल मार्केट में $3,800 तक जा सकता है।
भविष्य की बातें
सोने की स्थिति भविष्य में मजबूत रहने की संभावना है, लेकिन इसकी वृद्धि धीमी हो सकती है। ECB की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की प्राइस सप्लाई की उपलब्धता पर निर्भर करेंगी, जो डिमांड के साथ लचीली रही है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि सेंट्रल बैंक्स की खरीदारी तीन साल की आक्रामक खरीद के बाद सीमा पर पहुंच सकती है, जब तक नई जिओपॉलिटिकल उथल-पुथल डिमांड न बढ़ाए।
जब तक दुनिया में अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम बने रहेंगे, सोने का महत्व बना रहेगा और सोना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिज़र्व एसेट बन गया है जिससे इसका महत्त्व और भी बढ़ गया है। निवेशकों के लिए यह न सिर्फ एक सुरक्षित विकल्प है, बल्कि लंबी अवधि में पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड करने का भी एक जरिया है।
*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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