भारतीय IT सेक्टर में दूसरी तिमाही क्यों रह सकती है कमजोर

भारतीय IT सेक्टर में दूसरी तिमाही क्यों रह सकती है कमजोर
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भारत का IT सर्विसेज सेक्टर फिलहाल ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां मजबूत डील पाइपलाइन के बावजूद रेवेन्यू ग्रोथ में तेज सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। ग्लोबल कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च तो कर रही हैं, लेकिन उनका फोकस कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन, AI, क्लाउड और सीधे बिजनेस आउटकम देने वाले प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा है। इसके कारण पारंपरिक डिस्क्रेशनरी टेक्नोलॉजी खर्च पर दबाव बना हुआ है।

इसके साथ प्राइसिंग प्रेशर, लंबी डील कन्वर्जन साइकिल और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता भी सेक्टर की रफ्तार को प्रभावित कर रही है।

आइए समझें कि Q2FY27 में भारतीय IT कंपनियों की ग्रोथ क्यों म्यूटेड रह सकती है और आगे किन फैक्टर्स पर सेक्टर की दिशा निर्भर करेगी।

क्या है मामला?

Q2FY27 में भारत की बड़ी IT कंपनियों के लिए ग्रोथ की रफ्तार सुस्त रहने की उम्मीद है। टॉप 5 IT कंपनियों की QoQ रेवेन्यू ग्रोथ करीब 0.5-1% रह सकती है, जबकि Tier-I कंपनियों की ऑर्गेनिक CC रेवेन्यू ग्रोथ -1.5% से 2% के बीच रहने का अनुमान है।

सीजनली मजबूत तिमाही होने के बावजूद क्लाइंट्स का सतर्क रुख, कम डिस्क्रेशनरी खर्च और कमजोर डील विन्स ग्रोथ पर दबाव बनाए हुए हैं। इसके अलावा प्राइसिंग प्रेशर, कॉम्पिटिटिव बिडिंग, ऊंची ब्याज दरें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता भी सेक्टर के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि, मार्जिन के स्थिर रहने की उम्मीद है।

कमजोर डिमांड और लंबी डील कन्वर्जन की चुनौती

ग्रोथ पर सबसे बड़ा दबाव क्लाइंट्स के सतर्क खर्च से आ रहा है। कंपनियां उन प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं जिनसे कॉस्ट कम हो, रिस्क घटे या सीधे बिजनेस आउटकम मिले। बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर अप्रूवल अधिक समय ले रहा है और यह स्थिति अगले 12-18 महीनों तक बनी रह सकती है।

US ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च का करीब 55-60% हिस्सा रखता है, इसलिए वहां की कमजोर डिमांड भारतीय IT कंपनियों पर बड़ा असर डालती है। BFSI, मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थकेयर में कुछ सुधार दिख सकता है, लेकिन दूसरे वर्टिकल्स की कमजोरी इसे सीमित कर सकती है।

क्रॉस-करेंसी मूवमेंट भी रिपोर्टेड ग्रोथ पर असर डाल सकता है। टियर-1 कंपनियों पर लगभग 10-20 बेसिस पॉइंट्स और टियर-2 कंपनियों पर 0-30 बेसिस पॉइंट्स तक का असर अनुमानित है।

AI: अवसर भी और प्राइसिंग प्रेशर भी

AI भारतीय IT कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार कर रहा है, लेकिन फिलहाल इससे मिलने वाला रेवेन्यू पूरे सेक्टर के रेवेन्यू का 5% से कम है। Infosys ने जून तिमाही में अपने कुल रेवेन्यू का 8.2% AI से जुड़ा बताया था, जबकि TCS का वार्षिक AI रेवेन्यू $2.6 बिलियन था।

दूसरी तरफ AI ऑटोमेशन पारंपरिक लेबर-बेस्ड सर्विसेज की जरूरत घटा रहा है। AI से मिलने वाली प्रोडक्टिविटी का फायदा क्लाइंट्स कम प्राइस के रूप में डिमांड रहे हैं, जिससे करीब 6-7% तक डिफ्लेशन इम्पैक्ट का अनुमान है।

हालांकि, डील बुकिंग पूरी तरह कमजोर नहीं है। FY27 में अब तक 14 M&A डील्स के जरिए करीब $3.6 बिलियन की गतिविधि दर्ज हुई है। लेकिन चुनौती यह है कि मजबूत डील विन्स तेजी से रेवेन्यू में कन्वर्ट नहीं हो रहे हैं।

मार्जिन पर भी मिश्रित तस्वीर है। ऑटोमेशन, बेहतर यूटिलाइजेशन और करेंसी टेलविंड कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन वेज हाइक, AI प्लेटफॉर्म और पार्टनरशिप में निवेश तथा क्लाइंट्स को दिए जा रहे प्राइसिंग कन्सेशन लाभ को सीमित कर सकते हैं। कुछ बड़ी कंपनियों के मार्जिन में हल्का सुधार संभव है, लेकिन व्यापक स्तर पर मार्जिन स्थिर रहने का अनुमान है।

निवेशकों के लिए इसमें क्या है?

IT सेक्टर में फिलहाल ग्रोथ और वैल्यूएशन दोनों को साथ देखने की जरूरत है। निफ्टी IT इंडेक्स पिछले एक साल में करीब 30% गिर चुका है, जो कमजोर डिमांड और AI से जुड़े बदलावों को लेकर मार्केट की चिंता को दर्शाता है।

हालांकि मिड-कैप कंपनियों में बड़ी कंपनियों की तुलना में बेहतर ग्रोथ की संभावना है, लेकिन हर कंपनी की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए डील विन्स की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका रेवेन्यू में कन्वर्जन, प्राइसिंग, मार्जिन और AI से वास्तविक कमाई का स्तर होगा।

भविष्य की बातें

FY27 में बड़ी IT कंपनियों की ग्रोथ करीब 3-4% रहने का अनुमान है, जबकि मनी कंट्रोल के अनुसार, Gartner का अनुमान है कि 2030 तक पारंपरिक मैनेज्ड सर्विसेज के करीब 50% अवसर मौजूदा सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए हासिल करना कठिन हो सकते हैं। इसलिए AI केवल नई रेवेन्यू स्ट्रीम नहीं, बल्कि मौजूदा बिजनेस मॉडल में बदलाव का कारण भी बन रहा है।

इसलिए, तेज रिकवरी अभी दूर दिखाई देती है, लेकिन FY28 में सेक्टर ग्रोथ करीब 6% तक पहुंचने का अनुमान है। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मजबूत डील बुकिंग कितनी जल्दी रेवेन्यू में बदलती है और कंपनियां AI से होने वाले प्राइसिंग दबाव को नए प्लेटफॉर्म, एप्लिकेशन और हाई-वैल्यू सर्विसेज के जरिए कितनी प्रभावी तरह से संतुलित कर पाती हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल एजुकेशनल और इंफॉर्मेशनल उद्देश्य के लिए है और यह इन्वेस्टमेंट एडवाइस या किसी भी सिक्योरिटीज को खरीदने या बेचने की रिकमेंडेशन नहीं है। यहाँ जिन कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें मार्केट डेवलपमेंट्स के संदर्भ में केवल उदाहरण के रूप में बताया गया है। इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श करें।

सिक्योरिटीज मार्केट में किए गए इन्वेस्टमेंट मार्केट जोखिम के अधीन होते हैं। इन्वेस्ट करने से पहले सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स को ध्यानपूर्वक से पढ़ें।

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