हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर की खबरें आमने आ रही है क्योंकि अमेरिका ने चीन से आयात होने वाले सामानों पर शुल्क बढ़ा दिया है। यह कदम अमेरिकी कंपनियों को अनुचित ट्रेड प्रैक्टिसेज से बचाने के लिए उठाया गया है। वहीं चीन का कहना है कि ये शुल्क विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन करते हैं और यह निर्णय ग्लोबल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है।
चलिए समझते है कि आखिर अमेरिका और चीन के बीच क्या हो रहा है और यह ट्रेड वॉर भारत के लिए रखती है।
क्या है मामला?
14 मई 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीनी वस्तुओं, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर सेल, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड बैटरियों पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस का मानना है कि ये चीनी कंपनियां अनुचित तरीकों से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, जिससे अमेरिकी इंडस्ट्रीज को नुकसान हो रहा है। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी व्यवसायों को कॉम्पिटेटिव एज देना और उनके हितों की रक्षा करना है।
लेकिन क्या इस बदलाव का वाकई चीन पर असर होगा, तो इसे समझने के लिए हमें देखना होगा कि US चीन से कितना आयात और निर्यात करता है, जो कि इस प्रकार है:

अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए नए टैरिफ
आइए देखें, अमेरिका ने किन-किन चीनी सामानों पर नए शुल्क लगाए हैं:
इलेक्ट्रिक गाड़ियां: इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगने वाला टैरिफ 25% से सीधे 100% तक बढ़ गया है।
सौर पैनल: सौर ऊर्जा पैनलों पर लगने वाला शुल्क भी दोगुना होकर 50% हो गया है।
लिथियम बैटरी: इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम बैटरी पर लगने वाला शुल्क 7.5% से बढ़ाकर 25% हो गया है। 2026 तक तो सभी तरह की लिथियम बैटरी पर यह 25% शुल्क लगने लगेगा।
चिकित्सा उपकरण, धातु और खनिज: 2024 में चिकित्सा उपकरण, स्टील और एल्युमिनियम पर लगने वाला शुल्क 0% से बढ़कर 7.5% से 25% हो गया है। वहीं ज़रूरी खनिजों पर लगने वाला शुल्क भी अब 25% होगा, जो पहले नहीं था।
सेमीकंडक्टर: चीन से आयात होने वाले सेमीकंडक्टर पर लगने वाला शुल्क 2025 से 50% हो जाएगा, जो अभी 25% है।
कुछ चीनी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ में छूट बढ़ी
14 मई 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा विभिन्न चीनी वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की गई थी, लेकिन इसके लगभग एक सप्ताह बाद एक नया नोटिस जारी किया गया है जिसमें US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने चीन से आयात होने वाले 429 प्रोडक्ट्स में से लगभग आधे पर अतिरिक्त शुल्क में छूट को बढ़ा दिया है। यह छूट मोटर्स और मेडिकल उपकरणों जैसे महत्वपूर्ण प्रोडक्टस पर मई 2025 तक लागू रहेगी।
इस कदम का मकसद चीन से आयात को घटाना या वैकल्पिक स्रोतों से समान प्रोडक्ट प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय देना है। हालांकि, मौजूदा छूट 31 मई 2024 को समाप्त हो रहीं थीं, जिन्हें 14 दिन के अतिरिक्त समय के साथ अब 14 जून 2024 तक बढ़ा दिया गया है और 31 मई, 2025 तक कुछ एक्सक्लूजन का विस्तार किया गया है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या है?
CNN के एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल चीन के कुल इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात का 36% यूरोपियन यूनियन ने ही लिया। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में पिछले साल सिर्फ 1.1% चीनी इलेक्ट्रिक वाहन ही निर्यात किए गए, जो लगभग $365 मिलियन से भी कम है, इसलिए चीन को EV के मामले में कुछ खास असर नहीं पड़ेगा।
इसके साथ ही, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, चिकित्सा उपकरणों और प्राकृतिक ग्रेफाइट जैसे प्रोडक्ट्स पर लगे ज़्यादा टैरिफ भारत के लिए एक सुनहरा अवसर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक़, इनकी डिमांड ज़्यादा है और भारत इनका उत्पादन बढ़ाकर अमेरिका को निर्यात कर सकता है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में फिलहाल भारत को कोई खास फायदा नहीं दिखता क्योंकि हम अभी भी इनके आयात पर निर्भर हैं।
हालांकि, भारत सरकार ने भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें आयात शुल्क कम करना और नई EV पॉलिसी शामिल है।
भविष्य का दृष्टिकोण
रॉयटर्स के अनुसार, अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने नए टेलपाइप पॉल्यूशन स्टैंडर्ड की घोषणा की थी, जिसके तहत US में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का हिस्सा 8% से बढ़ाकर 2032 तक 56% करने का लक्ष्य रखा गया। हालांकि, US EV मेकर्स ने चिंता व्यक्त की है कि चीन से आयात EV उपकरण पर सब्सिडी नहीं दी जाती है, और अब यह टैरिफ में बढ़ोत्तरी। इसलिए यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि चीन में बनी सस्ती बैटरियों के बिना, EV की कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे US में EV अपनाने की गति धीमी हो सकती है।
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*यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य के लिए है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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