इजरायल-ईरान संघर्ष: भारतीय स्टॉक मार्केट पर असर!

इजरायल-ईरान संघर्ष: भारतीय स्टॉक मार्केट पर असर!
Share

हाल ही में, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच कई सालों से दुश्मनी चली आ रही है, और हालिया घटनाओं ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है और अभी आशंका है कि ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए हमले से पूरे मध्य पूर्व में भयानक युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसको लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है। 

लेकिन क्या है ये संघर्ष भारतीय स्टॉक मार्केट या अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है, चलिए समझने का प्रयास करते है।

क्या है मामला?

आपने हाल ही में सुना होगा कि ईरान और इजरायल के बीच के युध्द की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते भारतीय स्टॉक में भी हमें आगामी सप्ताह में वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है। 

13 अप्रैल को ईरान ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में अपने दूतावास पर 1 अप्रैल के हमले के जवाब में इजरायल पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर, दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को सीधे संघर्ष में बदल दिया है। जवाब में इजरायल और उसके सहयोगियों का मजबूत जवाबी हमला हुआ, लेकिन जमीनी तौर पर कम ही नुकसान हुआ। 

अब आइए जानें इस हमले के पीछे की वजह, क्या हुआ और निवेशकों के लिए इसमें क्या है!

ईरान और इज़राइल के बीच संघर्ष की शुरुआत

BBC के अनुसार, 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले, ईरान और इज़राइल सहयोगी थे। परंतु उसके बाद, एक नया शासन आया जो इज़राइल के खिलाफ था और इज़राइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है।

इसके दूसरी ओर, इज़राइल को लगता है कि ईरान अस्तित्व के लिए खतरा है, क्योंकि ईरान ने प्रॉक्सी सेना बढ़ाई, हमास और हिज़बुल्लाह जैसे ग्रुप्स को फंडिंग की है। सिर्फ इतना ही नहीं, ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप भी लगाया जाता है, हालांकि ईरान इससे इनकार करता है।

ईरान – इजरायल संघर्ष भारत को कैसे प्रभावित कर सकता है?

मनी कंट्रोल के अनुसार, भारत अपनी आवश्यकता का 80% से अधिक ऑइल आयात करता हैं, जिससे ग्लोबल स्तर पर किसी घटना से क्रूड ऑइल की प्राइस भारत के लिए काफी संवेदनशील हो जाती हैं। यदि ईरान-इजरायल युद्ध जारी रहता है और मध्य पूर्व से तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो हमें क्रूड ऑइल की प्राइस में वृद्धि देखने को मिल सकती है। 

इसके अलावा, अगर हम सिर्फ पिछले दो सप्ताह की बात करें तो जिओपॉलिटिकल तनाव की चलते ब्रेंट क्रूड की ऑइल की प्राइस 6% से बढ़ गयी है और अभी $90bbl से ऊपर ट्रेड कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं, ग्लोबल मार्केट में तनाव और जून 2024 तक ओपेक की मात्रा में कटौती के विस्तार की वजह से 2024 में ब्रेंट क्रूड की प्राइस 17% बढ़ गयी है। 

भारत और ईरान के बीच आयत और निर्यात

भारत ईरान को कई तरह के सामान का निर्यात करता है, जिनमें प्रमुख हैं अनाज, फ़ूड इंडस्ट्रीज और पशु चारे का कचरा, खाने योग्य फल और मेवे, चाय, कॉफी और मसाले आदि। वहीं भारत ईरान से भी कई चीजें आयात करता है, जिनमें शामिल हैं मिनरल्स फ्यूल और ऑयल, आर्गेनिक केमिकल्स और खाने योग्य फल और मेवे आदि। 

यहां दिए गए इमेज में आप भारत और ईरान के बीच विस्तृत आयत-निर्यात को आसानी से समझ सकते है:

इजरायल-ईरान संघर्ष

 

ध्यान दें – *तिलहन और ओलिया फल, विविध अनाज, बीज और फल; इंडस्ट्रियल या औषधीय पौधे, पुआल और चारा।

* परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और मकेनिकल उपकरण और उनके पुर्जे।

ईरान-इजरायल संघर्ष का भारतीय स्टॉक मार्केट पर असर

ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते ग्लोबल मार्केट में अशांति के कारण सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 1% की गिरावट आई है। 

मनी कंट्रोल के अनुसार, एनालिस्ट का मानना है कि अगर ईरान-इजरायल का संघर्ष युद्ध में बदलता है तो ब्रेंट क्रूड ऑइल की प्राइस 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर देखने को मिल सकती है और इसका असर भारतीय स्टॉक मार्केट पर अभी से दिखना शुरु हो गया है। 

तेल मार्केट कंपनियां: क्रूड ऑइल की प्राइस में वृद्धि से इन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, HPCL, IOC, अडानी टोटल गैस और BPCL के स्टॉक्स में सोमवार को ही 3% तक गिरावट देखने को मिली है।

टायर कंपनियां: टायर इंडस्ट्री सिंथेटिक रबर बनाने के लिए क्रूड ऑइल के डेरिवेटिव्स का उपयोग करता है। इसलिए, क्रूड ऑइल की प्राइस में वृद्धि से इन कंपनियों की लागत में भी वृद्धि हो सकती है। MRF, अपोलो टायर्स और CEAT इत्यादि कंपनियों के स्टॉक्स में भी 2% तक गिरावट आई है।

पेंट कंपनियां: पेंट बनाने में भी क्रूड ऑइल के डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल होता है। इसलिए क्रूड ऑइल की प्राइस में वृद्धि से इन कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ सकती है।

निकेशको के लिए इसमें क्या है?

ईरान-इजरायल के संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं वर्तमान स्थिति से ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों देशों के बीच आज संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए निकट भविष्य में मार्केट वोलेटाइल रहने की उम्मीद है। निवेशक इसका फायदा उठा सकते हैं। मार्केट में गिरावट के दौरान अच्छी क्वॉलिटी और तेजी से ग्रोथ की ओर बढ़ने वाली कंपनियों को चुनकर निवेशक बेहतर रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

भविष्य की बातें

ET के अनुसार, व्हाइट हाउस के टॉप नेशनल सिक्योरिटी प्रवक्ता ने 14 अप्रैल को ABC के ‘दिस वीक’ प्रोग्राम में बताया है कि ईरान ने भले ही इजरायल पर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, हालांकि इजरायल को बड़ा नुकसान नहीं हुआ। प्रेज़ बाइडन ने इजरायल प्रधानमंत्री को चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने इरान के खिलाफ वापसी का निर्णय लिया, तो अमेरिका इसमें शामिल नहीं होगा। अमेरिका इजरायल को रक्षा में तो सहायता करेगा, लेकिन युद्ध नहीं चाहता है।

आज के लिए सिर्फ इतना ही। उम्मीद करते है कि यह आर्टिकल आपको रोचक लगा होगा, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूले। 

*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।

*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर

Teji Mandi Multiplier Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Flagship Subscription Fee
Min. Investment

3Y CAGR

Min. Investment

Teji Mandi Xpress Options Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets. Subscription Fee ₹399/month* for 6 Months
Call TypeTrade Type

Teji Mandi Xpress Options

₹399/month* for 6 Months

Xpress Options provides structured option trade setups published in a standardised format. Each strategy includes predefined entry, target, stop-loss, and expiry details to enable informed participation in derivatives markets.

Strategy Type

Options Trading

Teji Mandi Xpress Subscription Fee
Total Calls

Total Calls

Recommended Articles
Scroll to Top