हर साल 10 जुलाई को ग्लोबल एनर्जी इंडिपेंडेंस डे अल्टरनेटिव एनर्जी सोर्सेज के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विश्वभर में मनाया जाता है। जिसमें रिन्यूएबल एनर्जी की विभिन्न फॉर्म जैसे कि सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, जिओथर्मल एनर्जी आदि को बढ़ावा देना शामिल है।
डोमेस्टिक स्तर पर बात करें तो, भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और जनसंख्या की वजह से पावर की अत्यधिक आवश्यकता वाला देश बन चुका है। देश में पावर की डिमांड हर साल लगातार बढ़ रही है और भविष्य में भी यह ट्रेंड जारी रहने का अनुमान है।
इस आर्टिकल में, हम भारत की वर्तमान ऊर्जा स्थिति, डिमांड, भारत कैसे डिमांड को पूरा कर रहा है, निवेशकों के लिए संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
भारत को कितनी पावर की आवश्यकता है?
भारत में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2024 में देश की बिजली खपत करीब 152.38 बिलियन यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9% अधिक है। इसके अलावा, ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 2031-32 तक भारत की बिजली की डिमांड 400 गीगावॉट (GW) से भी अधिक हो सकती है। यह ग्रोथ हमें इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, शहरीकरण, और बढ़ती जनसंख्या की पावर आवश्यकताओं की वजह से हुई है।
भारत इस डिमांड को कैसे पूरा करता है?
भारत अपनी ऊर्जा डिमांड को पूरा करने के लिए विभिन्न सोर्सेस का उपयोग करता है, जिसमें कोयला, हाइड्रोपावर, सोलर एनर्जी, और विंड एनर्जी प्रमुख हैं। वर्तमान में, भारत की ऊर्जा उत्पादन में कोयला आधारित थर्मल पावर का सबसे बड़ा योगदान है, लेकिन सरकार रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है।

भारत में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन कोयला पर निर्भर है, हालांकि सरकार रिन्यूएबल एनर्जी का योगदान बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
- कोयला आधारित थर्मल पावर: भारत का अधिकांश बिजली उत्पादन कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स से होता है। यह भारत की कुल बिजली उत्पादन का 75.82% है।
- हाइड्रोपावर: हाइड्रो और स्मॉल-हाइड्रो, एक क्लीन और रिन्यूएबल एनर्जी स्रोत है। भारत में हाइड्रोपावर उत्पादन का प्रमुख हिस्सा हिमालय के पहाड़ी इलाकों से आता है, जहां पर्याप्त पानी की उपलब्धता होती है। कुल मिलाकर हाइड्रो और स्मॉल-हाइड्रो का भारत की कुल बिजली उत्पादन में 6.63% है, और यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर मानसून के दौरान जब पानी की उपलब्धता अधिक होती है ।
- न्यूक्लियर एनर्जी: भारत में न्यूक्लियर एनर्जी उत्पादन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान में, भारत में कई न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट्स हैं, जो देश की कुल बिजली उत्पादन का 2.76% हिस्सा रखते हैं।
- सोलर एनर्जी: सोलर एनर्जी वर्तमान में कुल बिजली उत्पादन में लगभग 7.52% का योगदान करता है, लेकिन सरकार के प्रोत्साहन और प्रोजेक्ट्स के कारण इसका भविष्य में योगदान बढ़ने की उम्मीद है ।
- विंड एनर्जी: विंड एनर्जी, विशेषकर तटीय क्षेत्रों में, एक महत्वपूर्ण रिन्यूएबल एनर्जी स्रोत है और वर्तमान में यह कुल बिजली उत्पादन में 3.95% योगदान करता है।
पावर क्षेत्र की चुनौतियां
भारत की जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण पावर डिमांड लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि 2031-32 तक भारत की बिजली की डिमांड 400 गीगावॉट से अधिक हो जाएगी। इस बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए, भारत को 2031-32 तक कुल 900 गीगावाट की स्थापित क्षमता की आवश्यकता होगी, जो कि एक बड़ी चुनौती है।
भारत में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर से आता है। यह न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इसमें लागत भी अधिक आती है। इसके अलावा, कोयले की गुणवत्ता और उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
निवेशकों के लिए इसमें क्या हैं?
भारत के पावर सेक्टर में हो रहे बदलाव निवेशकों के लिए भी कई अवसर लेकर आ रहे हैं। आइए हम ऐसी कुछ प्रमुख कंपनियों को देखें जो भारतीय पावर सेक्टर में अहम भूमिका निभा रही है।

यह टेबल बीते वर्षों में पावर सेक्टर्स से जुडी कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है।
NTPC: यह भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है और दुनिया में छठी सबसे बड़ी थर्मल पावर उत्पादक कंपनी भी है।
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC): यह एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) है, जो भारतीय पावर सेक्टर में कंपनियों को फाइनेंस करती है। यह कंपनी प्रोजेक्ट्स को लोन देने के साथ ही एडवाइजरी सर्विसेज भी देती है।
टाटा पावर: यह भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पावर कंपनी है जिसकी सोलर, हाइड्रो, विंड और जिओथर्मल स्पेस में उल्लेखनीय उपस्थिति है। प्राइवेट क्षेत्र की कुल उत्पादन क्षमता में कंपनी का 52% का योगदान है।
अडानी पावर: यह भारत के सबसे बड़े प्राइवेट थर्मल पावर उत्पादकों में से एक है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता 15.25 GW है।
NHPC: यह भारत की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर यूटिलिटी कंपनी है।
पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: यह भारत की एकमात्र सबसे बड़ी ट्रांसमिशन कंपनी है और अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन, को-ऑर्डिनेशन, सुपरविज़न, निगरानी और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।
भविष्य की बातें
मनी कंट्रोल के अनुसार, FY2025 के अंत तक भारत में बिजली उत्पादन की दर एक दशक में सबसे तेज़ ग्रोथ के साथ बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें मुख्य रूप से 8.9% की ग्रोथ के साथ कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन प्रमुख भूमिका निभाएगा, जो 8.2% की ग्रोथ दर से बढ़ने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को भी पीछे छोड़ देगा।
हालांकि, भारत सरकार ने 2030 तक 500 GW की स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है जिसमें सोलर और विंड एनर्जी का महत्वपूर्ण योगदान शामिल है। साथ ही, 2032 तक 85 GW अतिरिक्त थर्मल क्षमता स्थापित करना है। इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत की वित्त मंत्री सीतारमण ने रूफटॉप जैसी योजनाओं की भी शुरुआत की थी और साथ ही विभिन्न पहल के तहत रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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*आर्टिकल में शामिल कंपनियों के नाम केवल सूचना के उद्देश्य के लिए है। यह निवेश सलाह नहीं है।
*डिस्क्लेमर: तेजी मंदी डिस्क्लेमर